पौरुष का वीर्यपात

 

किसी समय इस भारत देश के किसी क्षेत्र में रावण नाम का एक राजा रहता था| उसके तप और प्रताप से देवता भी डर कर थर थर कांपते थे| कहते हैं, दुर्भाग्य से उसे अपने आप पर घमंड हो गया था| अपनी बहन के प्रणय निवेदन को ठुकरा दिए जाने से नाराज होकर रावण ने राम की पत्नी का अपहरण कर लिया था| इस अपराध की सजा के तौर पर रावण को अपनी और अपने सभी प्रियजनों की जान गवाँनी पड़ी| परन्तु आज के सन्दर्भ में विशेष बात यह है कि रावण ने सीता को अशोक वाटिका में सुरक्षित रखा और कई प्रणय निवेदन किये| अति विशेष बात ये है कि उसने असहाय सीता से किसी भी प्रकार से अनुचित सम्बन्ध जबरन बनाने की कोई कोशिश नहीं की| मैं रावण के इस आत्म नियंत्रण, ब्रह्मचर्य और असहाय स्त्री के प्रति आदर की भावना और शक्ति को ह्रदय से नमन करता हूँ|

इस समय देश भर विशेषकर हरियाणा राज्य में लगातार जारी बलात्कारों के बारे में देश भर में एक दबी दबी सी चर्चा है| कोई स्त्री के कपड़ो को दोष देता है तो कोई उसके भाग्य को| कोई भी राम और रावण के आदर्श को नहीं देखता| एकनिष्ट राम पत्नी के प्रेम से बंधे है और दूसरे सम्बन्ध के बारे में नहीं सोचते| रावण असहाय स्त्री को भी सम्मान देता है] न कपड़ो का प्रश्न, न आयु, न जाति, न धर्म, न कर्म, न वर्ग, न मूल, न निवास, कैसा भी निम्न कोटि का तर्क कुतर्क नहीं| राम बलात्कार पीड़ित अहिल्या का आदर करते है| राम मर्यादा के नाम पर अपनी पत्नी को वन भेज देते है पर क्या राम बलात्कारी देवराज इन्द्र का आदर करते है या बलात्कार पीड़ित पत्नी का परित्याग करने वाले गौतम को गले लगाते है?

दुर्भाग्य है, इस देश में राम राज्य नहीं है| ये तो देवलोक की निर्लज्ज इन्द्रसभा है, जहां स्त्री को देवदासी और अप्सरा बनकर नाचना पड़ता है| स्त्री भोग्या है, अधम है|  राम का आदर्श कहाँ है? राम का मंदिर क्या केवल अयोध्या में ही बनेगा; जन मानस से मन मंदिर में नहीं?

एक और बात|

ब्रह्मचर्य के व्रत के बारे में बात होती है| ब्रहमचर्य कोई स्त्री का सतीत्व नहीं कि कोई इन्द्र गौतम का भेष रख कर आये और नष्ट कर दे| क्या इस पुरुष बहुल समाज में ब्रह्मचर्य की बात नहीं होनी चाहिए? क्या पुरुष को अपने पौरुष की कटिबद्ध होकर रक्षा नहीं करनी चाहिए? स्त्री को परदे में रखने की बात करने वालो, क्या तुम अपनी आँखों पर पलकों का पर्दा नहीं गिरा सकते| सोच लो, वीर्यपात तुम्हारा ही होना है; सोच लो, पौरुष तुम्हारा खंडित होता है; सोच लो, ब्रह्मचर्य तुम्हारा ही नष्ट होता है| पहले अपना इहलोक और परलोक सम्हालो|

हतभाग्य!! वो निर्लज्ज पंचायत बैठ कर स्त्री की योनि पर पहरा दे रही है|

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7 विचार “पौरुष का वीर्यपात&rdquo पर;

  1. King Ravan was one of the most intellectual , brave, and had a great personality and beauty…he is also considered father of Pediatrics in Ayurveda…not only an inventor,musician,writer, brave warrior but also had the ability and strength ,which normal human beings of today don’t even posses…Ravana had respected Devi Sita becuase he knows her actual divine incarnation….. he had before also destroyed chastity of many womens ….but due to his divine knowledge and ability to read the future he had respected Sita who was not a simple women but an incarnation of Godess,….. …Lord Rama who is considered maryada purushottam Human never appreciate Indra nor Gautam rishi but forgive them of their Sins for which they were in pain and shame by heart…..sending devi SITA to forest was his decision as a King who is answerable to his peoples & democratic… we people hadn’t read the teachings of lord Ram nor followed them and interpret-ting it according to our little and confused rational knowledge …. HINDUS especially brahmans had forget lord RAMA who remove untouchability and considered all humans as equal….but later varn system evoluted in to a caste system of untouchability…its an irony….

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  2. पिगबैक: क्या तुम पुरुष विश्ममित्र?? | गहराना

  3. मेरे हिसाब से तो देवताओं की सारी कहानियां जो उनके दुश्चरित्र की लिखी गई हैं, सारी की सारी झूठी और मनगढ़ंत हैं। कदाचित सोचिये जिनकी हम पूजा करते हैं और वो दुश्चरित्र कैसे हो सकते हैं ? वर्तमान समय में भी (जिसे हम घोर कलयुग कहते हैं) हम भारत वासियों में इतनी समझ तो है ही की हम मर्यादित जीवन को ही प्राथमिकता देते हैं, फिर दूसरी तरफ देखते हैं की लगभग सभी देवताओं (अपवाद स्वरूप कुछ को छोड़ देते हैं) के जीवन चरित्र में भरी विषमता (अधोचारित्र और लम्पटता) है, फिर भी हम उनकी पूजा करते हैं। आखिर ऐसा कैसे?

    हम भारतवासी दुश्चरित्रता को कभी भी महत्व नहीं देते हैं, सामाजिक जीवन में मर्यादा हमारी विरासत है, परंपरा है, और यही हमारी जीवन रेखा भी है। फिर ऐसा विरोधाभास कैसे? कहीं न कहीं भयंकर भूल हुई है।

    इंद्र का अर्थ ही है संयमशील, जो राजा है समस्त देवताओं का वही सर्वाधिक लम्पट। ऐसा हो सकता है क्या? जरा सोचिये ?

    देवताओं की महिमा ही है : “सोलह कला संपन्न, सम्पूर्ण निर्विकारी, अहिंसा परमोधर्मः, मर्यादा पुरषोत्तम”। फिर ऐसी अमर्यादित जीवन ? संभव है क्या ?….. कदापि नहीं।

    जहाँ देवता हैं वहां असुर नहीं हो सकते। और जहाँ असुर हैं वहां देवताओं के पैर भी नहीं पड़ते।

    मैं देवताओं की इस तरह की मनगढ़ंत कहानियों को सर्वथा अनुचित मानता हूँ। और इनका विरोध करता हूँ।

    रामायण, महाभारत और अन्य शास्त्र सिर्फ कहानियां ही हैं और इन्हें कहानियों की तरह ही लिया जाना चाहिए।


    सादर,
    शिवेंद्र मोहन सिंह

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    • जो कुछ लिखा गया है वो पुरातन हैं, सत्य या असत्य परन्तु आज उनका चरित्र चित्रण उसी प्रकार से जन मानस में विद्यमान हैं|
      एक प्रश्न हैं, आशा हैं आप उत्तर देंगे; अगर आप इन सब को कहानियाँ मानते हैं तो इन कथा – नायकों की पूजा कैसे कर लेते हैं?

      ये कथा हों या सत्य; परन्तु इनता स्पष्ट है कि अच्छाई और बुराई हर युग में रही हैं, और उनके मापदंड भी बदलते रहे हैं| हमें आज से सन्दर्भ में अच्छी चीजें ग्रहण कर लेनी चाहिए|

      मैं राम, रावण, इन्द्र, गौतम, अहिल्या और सीता के इस देश के पूर्वज (अथवा उनके कथा निरूपण) के रूप में स्वीकार करता हूँ| उनके कार्य से सहमत होने और न होने में अपने विवेक का प्रयोग करता हूँ|

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  4. @shivendra mohan singh :
    It remind me of my child memories when our teachers use to question about the existence of Rama ,Ravan or Lanka and divya dristi to sanjay who act as commentator to Dhritrastra… ..but later when all things were proved through scientific researches ,we have no reason to believe or question the existences…. simply lack of availability of any researches on a particular subject give option to refer them as virtual stories only…. I am having questions in mind:
    1. Existence of air planes?
    2. Killing of a human race during evolution : may be Nendertheles man or australopithecus..which were having resemlence to present human being and have more cranial power…. no one knows how they exit from geneline… ,however that race might be a part of army supporting lord Rama….?
    3. Ram Setu which we Indians were not believing, until Nasa lauched sattelite image of it.in 2001?
    4.use of internet like technology in Mahabaharat war…?
    and many more……………………………..
    In short we are at liberty to consider it as imaginary work of fiction until no serious researches are conducted at scientific levels to find their actual presence…. Its worth mentioning that non availibilty of evidences cannot be the sole reason to consider a thing as fiction…….

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