परी चौक ग्रेटर नॉएडा


wpid-img_20150712_145304.jpg wpid-img_20150712_150019.jpg wpid-img_20150712_145326.jpg wpid-img_20150712_145318.jpg wpid-img_20150712_145438.jpg wpid-img_20150712_145441.jpg wpid-img_20150712_150041.jpg

मोटापा प्रबंधन में शहद


मोटापा प्रबंधन एक ऐसा विज्ञान है जिसमें हर खाता – पीता व्यक्ति कुशलता हासिल करना चाहता है| एक विश्व में एक बड़ा वर्ग मोटापे की समस्या से जूझ रहा है| जिस विश्व में तीन चौथाई आबादी भूख से जूझ रही है, उसमें भले ही यह सृष्टि का एक व्यंग है मगर जीवन की सच्चाई भी है|

मोटापा कम करने की दवाओं, कपड़ो, जादूओं, मशीनों, इलाजों और तंत्र – मन्त्र से आज बाज़ार भरे पड़े हैं| इंसान को भूख न लगे इस बात की दवाएं भी आज बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हैं| भोजन के संतुलन की बात हम सभी करते हैं तब भी भोजन का स्वाद और अच्छी पाचन क्षमता शरीर में वसा का भंडार बना ही देती है| इस बात की आवश्यकता लगातार बहती जाती है कि हम जितना भी खाएं, उसमें से जो भी अतिरिक्त हमारे शरीर में बच जाए उसे हम परिश्रम और व्यायाम से नष्ट कर दें|

शरीर के लिए व्यायाम की आवश्यकता उसको सुचारू रखने के लिए बहुत ही आवश्यक है परन्तु कैलोरी जलाने के लिए व्यायाम का मैं बहुत समर्थन नहीं करता|

कैलोरी जलाना उस स्तिथि में सही तो माना जा सकता है जब शरीर में पहले से ही वसा एकत्र हो गयी हो परन्तु यह स्तिथि न आये इसका ध्यान देना बहुत जरूरी है|

प्रथम आवश्यकता इस बात की है कि हम संतुलित खाए और उतना ही खाएं जितना शरीर के लिए जरूरी हो| यदि हमने कोई खाद्य स्वाद के कारण ग्रहण किया है तो दुसरे खाद्य को कम खाकर उसकी अपने कैलोरी ग्राह्य को कम कर सकते हैं| इस से हम भोजन और खाद्य पदार्थों की बर्बादी करने से बच सकते हैं| बचा हुआ भोजन किसी किसी और के काम आ सकता है|

साथ ही हम अपने लिए ऐसा भोजन चुन सकते हैं जिसमे समुचित संतुलन हो और किसी प्रकार का हानिकारक प्रभाव हमारे शरीर पर न हो| कम वसायुक्त भोजन, कम नमक, कम मीठा, कम मसाले कुछ ऐसे नुस्खे हैं जिनका हम लगातार प्रयोग करते रहते हैं| इस बात का ध्यान भी रखना होता है कि भोजन पर्याप्त स्वादिष्ट बना रहे|

यदि हम प्राकृतिक भोजन करें तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है| प्रयेक प्राकृतिक उत्पाद में एक विशेष स्वाद और संतुलन होता है| प्रायः भोजन पकाने के क्रम में हम उसमे मसाले, नमक, मीठा और अन्य अवयव अप्राकृतिक रूप से जोड़ देते हैं| हमें फल, सलाद, कंद मूल आदि खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में अधिक से अधिक शामिल करना चाहिए|

शहद एक प्राकृतिक खाद्य है जिसे बिना किसी श्रम के भोजन में सम्लित किया जा सकता है| यह सुपाच्य है और स्वादिष्ट भी| आज के समय में बाजार में लोकप्रिय ब्रांड का शहद बहुत आसानी से उपलब्ध है| इसे सलाद में डालकर उसका स्वाद बढाया जा सकता है तो चाय में डालकर चाय को अमृततुल्य बना सकते हैं| आज विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन भी शहद से बनाये जा रहे हैं| हम सभी इस बात पर सहमत होंगे कि शहद से स्वादिष्ट मीठा पदार्थ अभी भी मानवता को ज्ञात नहीं है| इसके औषधीय लाभ अलग से हैं| यदि आप इतने संतुलन के बाद भी मोटापा महसूस कर रहे हैं तो गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन तो हमेशा ही एक विकल्प है|

तानाशाह का इन्तजार


उस वक्त में कानपूर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर बैठा हुआ था कि किसी ने ठेठ कनपुरिया लहजे में कहा, फिर इमरजेंसी लग गयी क्या देश में? दरअसल, एक एक बाद एक कई गाड़ियाँ अपने ठीक समय पर आकर चली गईं थी| देश आपातकाल को ट्रेन के समय पर चलने और अनुशासन के लिए याद करता है| मुझे लगता है कि आपातकाल के बाद जनता सरकार इसीलिए चली गयी कि उसके नेता देश में क्या अपने आप में भी अनुशासन नहीं ला पाए| यहाँ तक कि आपातकाल के अपराधियों को भी जनता परिवार आजतक दंड नहीं दिला पाया|

Captureआपातकाल अगर देश में अनुशासन पर्व रहा तो संजय गाँधी वो सुकुमार तानाशाह, जो देश को मिलते मिलते रह गया|

देश के सपनों का तानाशाह जो ईमानदार होता है, रोबिन हुड होता है, निर्णय लेता है, उसका व्यक्तित्व इतना तगड़ा होता है कि लोग उसके निर्णय को बिना सोचे समझे अमल में लाते हैं| भरोसा होता है, उसका निर्णय देश हित में ही होगा|

आखिर हमारा देश मंदिर – मस्जिद में “सच्चा” विश्वास, “सच्ची” आस्था और आदरणीयों से प्रश्न न करने के शिष्टाचार के साथ ही तो बड़ा होता है|

हम इस आस्था को इंदिरा गाँधी के रूप देख चुके है और नरेन्द्र मोदी के रूप में देख रहे है| भले ही यह नेता, प्रश्नों का उत्तर देने में संकोच न करें, मगर इनके आस्थावान आपको प्रश्न नहीं करने देंगे| जब राष्ट्र सत्ता को अवतार और नारायण के रूप में देखने लगें, तो प्रश्न की सम्भावना नहीं बचती|

क्या हमारा राष्ट्र वाकई चाबुक चाहता है? सर्वेक्षण कहते है कि पचास प्रतिशत पढ़े – लिखे होनहार युवा देश में तानाशाही या सेन्य शासन देखना चाहते है| यह पढ़ी – लिखी होनहार युवा पीढ़ी देश की सबसे अनुशासनहीन पीढ़ी बताई जाती है| वह पीढ़ी जो अपने माता – पिता की बात को आदेश क्या, सलाह भी न मानती हो उसे अगर अपने ऊपर एक बाहरी आदमी का सरकारी चाबुक चाहिए तो यह उसका अपने आप पर व्यंग है|

तानाशाह करेगा क्या? उत्तर घूमफिर कर समान ही होते है: देश का अंधाधुंध विकास, आरक्षण का खात्मा, पाकिस्तान को औकात बताना, आबादी (मुसलमानों और दलितों की) काबू करना| इसमें प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना और काले धन की वापसी भी कभी कभी जुड़ जाते है|

मजे की बात यह कि तानाशाही समर्थक लगभग सभी मानते हैं कि इस हिंदुस्तान का कुछ नहीं हो सकता, और इसलिए सबको अमेरिका और कनाडा का ग्रीनकार्ड सबसे पहले चाहिए|

इंस्टेंट कॉफ़ी, इंस्टेंट मेसेंजर, इंस्टेंट गूगल, इंस्टेंट आरती और इंस्टेंट सेक्स की पीढ़ी को समय कहाँ है? तानाशाही तो कडुवी अंग्रेजी दवा है जिससे भले ही कितना साइड इफ्फेक्ट हो या जड़ से बीमारी न जाये मगर ठीक होने का भ्रम तो पैदा हो ही जाता है| भ्रम बनाये रखना हमारी नियति नहीं इंस्टेंट मजबूरी है|