चटकारा चटनी


नानाजी को जब भी याद करते हैं तो पुदीने की चटनी जरूर याद आती हैं| नानाजी, सिल – बटना, पुदीना, और हाथ से पीसी जाती हुई चटनी की महक|

एक एक कर कर पत्तियां चुनी जातीं, मुलायम डंठल सहेजे जाते, धोये जाते| ताजा महकते पुदीने की महक घर में ताजगी भर देती| उतने ही चाव से साफ़ शुद्ध हरी मिर्चें डंठल तोड़ कर रखीं जातीं| घर का सुखाया पिसाया ताजा आमचूर| पड़ोसियों को भी पता चलता था| चटनी बन रही है, पुदीने की चटनी|

बिजली की मशीनें किसी काम की नहीं होतीं, ये चटनी पीसती नहीं, काट काट कर पुदीने और मिर्च का दम निकाल देती हैं\ उसमें लेस नहीं आती, रेशा नहीं रहता|

बड़ी वाली सिल धो पौंछ कर रखी जाती| उसके बाद करीने से चटनी पिसना शुरू होता| पहले हरी मिर्च को अधिक मात्र में रखा जाता सिल पर, उसके बाद पुदीने की मात्रा| सेर भर पोदीने में पाव भर मिर्च और लगभग पाव भर से थोड़ी कम आमचूर| तीनों चीजें साथ साथ पीसी जातीं, जी हाँ आमचूर, कितना भी बारीक़ क्यूँ न पिसा हुआ हो उसे दोबारा पिसना होता, वरना वो चटनी की आत्मा में नहीं उतरता|

पिसती हुई चटनी में नानाजी, उसकी लेस, रेशा, गाढ़ापन सब पर निगाह रखते| मजाल है की चटनी से पानी अलग होकर बहने लगे|

घर में मौजूद उनकी बहु बेटियाँ, सोचती रहतीं, पिताजी जब चटनी पीस कर उठें तो क्या बना कर दिया जाये कि वो चटनी का आनंद ले सकें| नानाजी आँगन में चटनी पीसते तो घर की सभी महिलाएं रसोई में कुछ बनानें का जुगत कर रही होतीं; पकौड़े, कचौड़ी, आलू – टिक्की, आलू – परांठे, कुछ भी|

नानाजी चटनी में भगवान् खोजते थे, या चटनी खाने वालों में; पता नहीं| चटनी पीसते में पूरी श्रृद्धा और विश्वास होता था| जब नानाजी चटनी पीस कर उठते तो हम उन्हें हाथ नहीं धोने देते| उन्हें हाथ भी चाट कर साफ़ कर दिए जाते| एक बार, पिताजी ने उन्हें चटनी वाले हाथ चाटने की इच्छा प्रगट कर दी तो वो ख़ुशी से रो पड़े| दामाद अगर इतनी बात कह दे तो..  ..आँसू तो आने ही थे|

चटनी हमेशा पूरी श्रृद्धा और आदर के साथ घर में मौजूद सबसे सुन्दर बर्तन में रखी जाती| काँच की ख़ूबसूरत पारदर्शी प्यालियों में परोसी जाती| चटनी का स्वाद चटनी चखने से पहले ही दिल में उतरना चाहिए| चटनी का रंग आँखों में बस जाना चाहिए और उसकी गंध नाक में| गहरा हरा रंग, लेसदार गाढ़ापन, पुदीने की ताजगी भरी और मिर्च की तीखी गंध|

अगर चटनी को देख कर और सूंघ कर मूँह में पानी न आये तो उसका चटनी होना बेकार है| चटनी है तो चाट है; चटनी है तो चटकारे हैं; चटनी है तो आप उँगलियाँ चाट चाट कर खा सकते हैं| पकौड़े, परांठे, कचौड़ी, टिक्की, समौसे, सब बहाना है; उन्हें तो पेट में जाकर तेल फैलाना है| असल तो चटनी है, रंग है, गंध है, स्वाद है स्पर्श है, जिसे आँखों में, नाक में और जीभ में बस जाना है|

आईये चटनी का आनंद लीजिये; कोई भी बहाना, किसी भी बहाने… चटनी परोसिये| प्यार, इज्जत, श्रृद्धा, विश्वास के साथ|

पुल और ट्रक


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How Wikipedia Works: Bishakha Datta


विकिपीडिया पर गलत प्रचार और चुनावी प्रयोग हाल में चर्चा में रहे हैं| अच्छी बात ये है कि हर किसी को यहाँ पर “अपना सच” कहने की आजादी है, गलत बात ये है कि लोग “अपनी कल्पना का सच” कह देते हैं| अर्द्ध – सत्य, मधु – सत्य, मसाला सत्य, अन्ध- भक्ति सत्य, वास्तव में सत्य नहीं होते|
काफ़िला पर छपा यह आलेख पठनीय ही नहीं, इसे पढ़ना आवश्यक है|

Nivedita Menon's avatarKAFILA - COLLECTIVE EXPLORATIONS SINCE 2006

BISHAKHA DATTA is on the Wikimedia Foundation Board of Trustees. In th ewake of the shocking distortions found in the Wikipedia entry on Bhanwari Devi by an alert reader, Bishakha gives us a tutorial on how Wikipedia works.

1. Wikipedia is the world’s 5th biggest website, visited by almost 500 million readers each month – but created entirely by volunteers. We (meaning the Wikimedia Foundation in San Francisco/wikimedia chapters in 40 countries) do not pay writers or anyone to contribute to wikipedia; anyone contributing to wikipedia is called an ‘editor’. Currently, there are about 80,000 editors around the world creating wikipedias in 285 languages, of which 20 are Indian languages. To see English wikipedia being created in real time, click this link: https://en.wikipedia.org/wiki/Special:RecentChanges

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2. This model of…

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