समाज
काला क्या?
काला रंग प्रकाश को अपनी ओर आकर्षित और समाहित कर लेता है| काला कलंक नहीं, सम्मोहन है| उसका अपना आकर्षण है, महत्व है|
दिन की शुरुवात का सबसे अच्छा तरीका है काली कॉफ़ी; साधारण मगर दिलचस्प, कडुवी मगर स्वादिष्ट, तरल मगर ठोस, शान्त मगर प्रफुल्लित|
घोड़ा गति का प्रतीक है| मुझे काले रंग के घोड़े पसंद हैं| उजले रंग के घोड़ों की तरह ये दौड़ते समय का प्रतीक नहीं हैं| मुझे काला घोड़ा साहस समृद्धि और संतोष प्रदान करता है| बचपन से इच्छा है मेरे पास एक काला घोड़ा हो| उसपर स्वर हो कर मैं जंगल जंगल पर्वत पर्वत घूम सकूँ|
समाज में असमानता और अपराध हमें हमेशा व्यथित करते हैं और दुखी कर देते हैं| एक काला कोट हमें उस समय उम्मीद की किरण दिखाता है| कितने ही कलंक क्यूँ न लगें काले कोट पर, मगर न्याय की आशा है| अपने आप पर भरोसे का प्रतीक है| सज्जन को समाज में नया दिलाना हो या दुर्जन को उसके दुष्कार्य की उचित सजा| काला कोट हमेशा साथ देता है| काला कोट वकील बनकर जिरह करता है और जज बनकर न्याय| जब भी मैं कला कोट पहनता हूँ मुझे न्याय के लिए सतत संघर्ष की प्रेरणा होती है|
काली स्याही वाला काला कलम; बचपन में एक ऐसा कलम था न मेरे पास| नीली स्याही वाले कलम से एकदम अलग| सफ़ेद पन्नों पर चमकता हुआ| भीड़ से अलग, स्पष्ट|
काला धन अगर मिल जाये तो क्या बात हो| सफ़ेद धन तो बहता पानी है, काला धन समंदर| अरब खरब हंस पद्म… गिनती नहीं आती मुझे इतनी, जितना काला धन हो सकता है| कई बार सोचता हूँ, अगर सारा न मिले, देर सारा ही मिल जाये; बस एक बार लौट कर आ जाये मेरे देश.. मेरे पास| कुछ सड़कें बनवाऊंगा, कुछ पुल, कुछ बगीचे, कुछ बाग़ और हाँ एक बड़ा सा ज़ेल… काला कारागार… अरे भाई जिन्होंने काला धन पैदा किया हैं, उनके लिए एक सही सलामत बड़ा सा घर होना चाहिए न|
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अक्षर ज्ञान: चूल्हा नीचे चूल्हा
आज मेरा ढाई साल का बेटा स्कूल में पहली बार कलम पकड़ेगा| अपना बचपन याद आया|
मेरा स्कूल पाँच साल की आयु में शुरू हुआ था| माँ ने घर पर ही सौ तक गिनतियाँ, दस तक पहाड़े और हिंदी अंग्रेजी वर्णमाला याद करा दी थी| साथ में उर्दू वर्णमाला को लेकर एक कविता भी थोड़ी बहुत याद थी| बाकि कुछेक कविता याद थीं| मगर तख्ती से अपना वास्ता केवल इतना था कि वो गेंद – बल्ला (क्रिकेट) खेलने के लिए उम्दा थी|
जब स्कूल पहुंचे तो तख्ती का हमेशा के लिए बल्ला बन गया| और एचबी की पेंसिल और पच्चीस पैसे की कॉपी ने बाजी मार ली| कॉपी के कागजों से हवाई जहाज बनाना हमें आता था, मगर स्कूल के पहले हफ्ते में बारिश का जोर था तो स्कूल में आया ने हमें कागज की नाव बनाना सिखा दिया| आया जल्दी ही हमारी दोस्त और अध्यापक दोनों हो गईं| दरअसल हमारी टीचर गाँव नाते से चाची लगती थीं तो लाड़ – प्यार में हम पढ़ते नहीं थे और आया दोस्त थी तो वो खुद पढने का नाटक कर कर पढ़ाती थीं|
अब आया तख्ती पर पढ़ी थी और कागज पर लिखना उन्हें आता नहीं था तो तख्ती और कलम एक बार फिर से जिन्दगी में वापस आये|
पहले हफ्ते में चुल्हा बनाना सिखाया गया, जिसे आप आज अंग्रेजी का उल्टा C या लेता हुआ U कह सकते हैं| उसके बाद उ और ऊ की बारी आईं| मेरे लिए पढ़ने और लिखने पढने की वर्णमाला कुछ दिन अलग रहीं| उ ऊ अ आ अं अः ओ औ इ ई ए ऐ
आया ने शायद दो माह में स्वर लिखना सिखाये|
चूल्हे के नीचे चूल्हा बना कर उ बना और उ के ऊपर कुते की दुम लगा कर ऊ| अ और आ के बीच भी कुछ कहानियां थी जो याद नहीं रहीं| मगर याद है जब दो बहुओं में लड़ाई हो गयी तो एक एक ने सीधा और दूसरी ने उल्टा चूल्हा बना दी थी जिससे इ बन गया था|
बाद में जब आया ने क ख ग घ की जगह सबसे पहले व और ब सिखाना चाहा तो उसको कुछ भी सिखाने से मना कर दिया गया और क ख ग घ से शुरू किया गया| मगर जब भी मुझे लिखने में दिक्कत होती तो आया ही मेरी मदद करती|

