विश्व-बंदी २४ मई

उपशीर्षक –  पिनाराई विजयन

केरल – ईश्वर का अपना देश| पर साम्यवाद का बहुमत| वर्तमान में हिन्दू धर्मं के सर्वसुलभ रूप के संस्थापक आदि शंकराचार्य की भूमि – परन्तु शेष भारत और उत्तर भारतीय हिन्दुओं  में गोमांस भक्षण के कारण निन्दित| जब केरल जाएँ तो हर कण में संस्कृति के दर्शन – परन्तु कट्टरता और उदारवाद का सम्पूर्ण समिश्रण| केरल के आधा दर्जन यात्राओं में मुझे कभी केरल के सामान्य जीवन में कट्टरता नहीं मिली| केरल में मुझे हिन्दू, मुस्लिम और ईसाईयों के बीच आपसी समझ अधिक दिखाई देती हैं| सभी लोग अपनी साँझा संस्कृति के प्रति विशेष लगाव रखते हैं|

उत्तर और पश्चिम भारत में सांप्रदायिक तनाव के पीछे भारत विभाजन की याद जुड़ी हुई है| जिन मुस्लिमों ने पाकिस्तान की मांग की, उनमें से कई गए नहीं| कई मुस्लिम जिनके पुरखों को पाकिस्तान का पता नहीं मालूम वो सोचते हैं कि गलती हुई कि नहीं गए| हिन्दू खासकर शरणार्थी हिन्दू सोचते हैं कि यह लोग क्यों नहीं गए| मगर दक्षिण भारत खासकर केरल में यह सोच प्रायः नहीं है| केरल का हिन्दू- मुस्लिम कट्टरपंथ पाकिस्तान से अधिक अरब से प्रभावित है|

इस सब के बीच केरल भारत के आदर्श राज्यों में है| बंगाल और केरल भारतीय वामपंथ की प्रयोगशाला हैं – बंगाल असफल और केरल सफल| केरल में विकास और राष्ट्रीय जुड़ाव (राष्ट्रवाद नहीं) बंगाल ही नहीं किसी अन्य राज्य से बेहतर है| केरल में आप मलयालम हिंदी या अंग्रेजी का झगड़ा नहीं झेलते| यहाँ हिंदी प्रयोग बहुत सरल है|

केरल के सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ शिकायतें कम हैं| यह राज्य अपने बूते उठ खड़ा होने का माद्दा रखता है| २०१८ की बाढ़ की दुःखद याद को मैंने २०१९ की अपनी कई यात्राओं में देखा| सब जानते हैं कि केंद्र सरकार से केरल को वांछित मदद नहीं मिल पाई| परन्तु मुझे आम बातचीत में इसका मामूली उल्लेख मात्र ही मिला| इस से अधिक शिकायत तो उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग तब करते हैं जब केंद्र और राज्य दोनों में एक दल की सरकार हो और पर्याप्त मदद मिली हो|

हभी हाल में केरल ने बिना किसी परेशानी और मदद के कोविड-१९ से लड़ने की शुरुआत की थी| जिस समय उत्तर भारतीय करोना के लिए गौमांस और शूकरमांस भक्षण के लिए केरल को कोस रहे थे और बीमारी को पाप का फल बता रहे थे – केरल शांति से लड़ रहा था| यह लड़ाई पूरे भारत की सबसे सफल लड़ाई थी|

२०१८ की बाढ़ हो या २०२० का करोना, पिनाराई विजयन का नेतृत्व उल्लेखनीय है| आज उनका जन्मदिन है| भले ही यह असंभव हो, परन्तु मुझे लगता है कि उन्हें केरल के मुख्मंत्री पद से आगे बढ़कर भारत का प्रधानमंत्री बनना चाहिए| ऐसा न होगा, भारतीय लोकतंत्र का गणितीय दुर्भाग्य है|जन्मदिन की शुभकामनाएं|

Enter your email address to follow this blog and receive notifications of new posts by email.

कृपया, अपने बहुमूल्य विचार यहाँ अवश्य लिखें...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.