गूगल के बहाने कंपनियों के जन्मदिन पर

आज २७ सितम्बर २०१६ को गूगल अपना अठारहवां (18 वां) जन्मदिन मना रहा है| मगर लगता है की कुछ लोचा है|

यूनाइटेड किंगडम के प्रख्यात अखबार द टेलीग्राफ की इस ख़बर के मुताबिक सन २००५ में गूगल ने अपना सातवाँ जन्मदिन सत्ताईस सितम्बर को नहीं वरन छब्बीस सितम्बर दो हजार पाँच (२६ सितम्बर २००५) को मनाया था| जबकि गूगल का छठां जन्मदिन सात सितम्बर दो हजार चार (७ सितम्बर २००४) को था| लेकिन गूगल का पांचवां जन्मदिन आठ सितम्बर दो हजार तीन (०८ सितम्बर २००३) को हुआ| खुद गूगल के मुताबिक गूगल ने अपना इनकारपोरेशन एप्लीकेशन चार सितम्बर उन्नीस सौ अठान्वै (०४ सितम्बर १९९८ को सरकार के पास दाखिल की थी| उधर गूगल डॉट कॉम पंद्रह सितम्बर उन्नीस सौ सतानवे (१५ सितम्बर १९९७) को पंजीकृत हुई|

बहरहाल, अब गूगल हर साल २७ सितम्बर को ही अपना जन्मदिन मनाने का सोच रही है|

ऐसा नहीं है कि कंपनी के जन्म दिन का मसला अकेला गूगल का मसला है|

सिद्धांततः कम्पनी दो या अधिक लोगों के मन में कंपनी बनाने की इच्छा के जन्म लेने के साथ उन सबके मस्तिष्कीय गर्भ में उत्पन्न होना शुरू होती है| इस प्रक्रिया में उसका रंग रूप आकार प्रकार कद काठी आदि तय की जाती है| सिद्धान्तः कंपनी उस दिन बन जाती है जिस दिन यह सब तय हो जाता है| इसके बाद कंपनी के नाम पर सरकार सरकारी मुहर लगवाई जाती है जो तकनीकि रूप से उस नाम से कंपनी बनाने की अनुमति होती है| अगले चरण में कंपनी के जन्मदाता – प्रमोटर उस नाम से कंपनी के इनकारपोरेशन के लिए अर्जी दाखिल करते हैं| यह सभी चरण देश और काल के हिसाब से आजकल के दो घंटे से लेकर पुराने ज़माने के दो एक साल तक हो सकते हैं|

परन्तु कानूनन कंपनी का जन्म उस दिन माना जाता है जिस दिन सरकार से इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट मिलता है| परन्तु, कंपनी के प्रमोटर इस आधिकारिक जन्मदिन का प्रायः इन्तजार नहीं करते और नाम तय होते ही कंपनी का कुछ न कुछ काम धाम शुरू भी कर देते है|

उदहारण के लिए अभी हाल में एक कंपनी खोलने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई| कंपनी के प्रमोटर अपने इस बच्चे के लिए पिछले तीन साल से योजना बना रहे थे| इस साल फरवरी में उन्होंने कंपनी की पूँजी, कार्यकलाप, नागरिकता, निवास स्थान (कार्यालय), लोगो, पञ्चलाइन आदि मसलों पर अपना विमर्श पूरा किया| तमाम कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए उन युवा प्रमोटरों पर संसाधन (कागजात – जैसे पहचान पत्र) नहीं थे तो उन्हें बनाने की कार्यवाही हुई| इसके बाद एक दिन उन्होंने कंपनी बनाने संबंधी औपचारिक अनुरोध किया गया | तीन चार दिन में कंपनी के लिए नाम विशेष की सरकारी अनुमति मिली| अब प्रमोटर अपनी कंपनी के नाम और लोगो को लेकर इतने उत्साहित थे कि कहा गया कि जब तक बढ़िया सा लोगो न बन जाए तब तक कंपनी इनकारपोरेशन की औपचारिक एप्लीकेशन न लगाईं जाए| वो कंपनी के जन्म के दिन शानदार कार्यक्रम करना चाहते थे| इसके बाद एक दिन शाम को एप्लीकेशन इस हिसाब से लगाईं गई कि अगले दिन कंपनी को इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट मिले| मगर सरकारी कार्यालय उस दिन अच्छे मूड में था और कंपनी उसी दिन यानि योजना से एक दिन पहले बन गई| पुराने समय में एक और दिक्कत थी| कंपनी बनने के लगभग दस दिन बाद प्रमोटर को अधिकृत रूप से पता लगता था कि कंपनी बन चुकी है|

अब आप कंपनी का वास्तविक जन्म दिन तय करते रहिये| कानून वही मानेगा जो वो मानता है – सनद की तारीख़|

 

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