हनुवंतिया पुकारे आजा…


मध्य प्रदेश में जल – पर्यटन? जी हाँ, इंदिरा सागर बांध सुना है न| उसी में सौ से अधिक द्वीप और टापू उभर आये हैं| हनुवंतिया से टापुओं का यह सिलसिला शुरू होता है| हनुवंतिया टापू नहीं है, यह तीन ओर से नर्मदा के बांधे गए जल से घिरा हुआ है| मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम इसको विकसित करने के क्रम में दूसरा जल-महोत्सव आयोजित कर रहा है –  15 दिसंबर 2016 से एक महीने के लिए|

बारिश के बाद जब बाँध में बहुत अच्छा पानी आ जाता है और गर्मियों तक बना रहता है, तब मध्यप्रदेश में जल – पर्यटन का सही समय है| मध्यप्रदेश में कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठण्ड भी नहीं पड़ती| नर्मदा का पवित्र स्वच्छ जल और प्राकृतिक संसार, आपको लुभाते हैं| आस पास सघन वन, वन्य – जीव, रंग – बिरंगे पक्षी माहौल को रमणीय बना देते हैं| जीवन की आपाधापी से दूर आपको क्या चाहिए – तनाव मुक्त नीलाभ संसार|

हनुवंतिया में क्रुज, मोटर बोट के बाद अब हाउस बोट भी शुरू हो रहीं हैं| जल – क्रीड़ा, साहसिक खेल, आइलैंड कैम्पिंग, हॉट एयर बलून, पेरा सेलिंग, पेरा स्पोर्ट्स, पेरा मोटर्स, स्टार गेजिंग, वाटर स्कीइंग, जेट स्कीइंग, वाटर जार्बिंग, बर्मा ब्रिज, बर्ड वाचिंग, ट्रैकिंग, ट्रीजर हंट, नाईट कैम्पिंग आदि  बहुत कुछ शामिल है|

इंदिरा सागर बांध 950 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा बड़ा है| इस लिए यहाँ पर्यटन के क्षेत्र में विकास और निवेश की अपार संभावनाएं है| सरकार निजी क्षेत्र को यहाँ पर्यटन विकास के लिए प्रेरित कर रही है| जल्दी ही बहुत से रिसोर्ट, हाउसबोट आदि यहाँ आने की सम्भावना हैं|

खंडवा रेलवे स्टेशन से हनुवंतिया 50 किलोमीटर है और इन्दोर हवाई अड्डे से यह 150 किलोमीटर है| मध्य प्रदेश का हरा भरा निमाड़ क्षेत्र (इंदौर के आसपास का क्षेत्र) अपनी संस्कृति और विविधता के लिए जाना जाता है| विन्ध्य पर्वत माला की सतपुड़ा पहाड़ियां, नर्मदा और ताप्ति नदियाँ, ॐकारेश्वर का मंदिर और भीलों की मीठी निमाड़ी बोली निमाड़ की पहचान हैं| मध्य प्रदेश के इसी निमाड़ क्षेत्र में है खंडवा| खंडवा से याद आते हैं – फिल्म अभिनेता अशोक कुमार, किशोर कुमार, अनूप कुमार| हिंदी की प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कविता “पुष्प की अभिलाषा” भी पंडित माखन लाल चतुर्वेदी द्वारा यहीं खंडवा में लिखी गई थी|

नीलाभ जल वाला हनुवंतिया आपको बुला रहा है|

 

छोटे पहाड़ी शहर


पालमपुर - बढ़ते वाहन

पालमपुर – बढ़ते वाहन

अक्सर पर्यटक स्थलों पर भीड़भाड़ मुझे उनसे दूर कर देती हैं| अगर भीड़ का अकेलापन ही महसूस करना है तो दिल्ली मुंबई का कोई भी चौराहा क्या बुरा है| कम भीड़भाड़ वाले पर्यटक स्थलों के प्रति मेरा स्वाभाविक आकर्षण मुझे इस बार पालमपुर ले गया|

पहाड़, खुबसूरत शहर, रंगबिरंगे घर, अलग अलग रंग की टिन की छतें, पहाड़ों से नीचे उतरते और पहाड़ों पर ऊपर चढ़ते बादल, बार बार बरसात, जुलाई का पहला सप्ताह, हाल में पहुंचा हुआ मानसून, सब इस जगह को जन्नत बना रहा था|

मगर पहाड़ों पर या किसी भी पर्यटन स्थल पर बढ़ते हुए वाहन बड़ी समस्या हैं| संकरी सड़कों पर वाहनों की भीड़ उन्हें असुरक्षित तो बनाती ही है, वहां के सौंदर्य को भी नष्ट करती है|

मुझे लगता है कि पर्यटक स्थलों के बाहर ही वाहनों को रोक लिया जाना चाहिए और शहर में पारंपरिक साधनों, साइकिल, रिक्शा, घोड़े, खच्चरों का ही प्रयोग होना चाहिए|

नीमराणा फोर्ट पैलेस


नीमराना जाने के मामले में हुआ यूँ कि सब कुछ इत्तिफाक से होता चला गया| एक प्रतियोगिता के चलते एक ब्लॉग पोस्ट यहाँ लिखी गई| जिसमें मैंने पद – पर्यटन यानि घुमक्कड़ी पर अपने विचार रखे थे:

पद – पर्यटन का अर्थ यह नहीं है कि हम घर से लेकर अपने गंतव्य की यात्रा पैदल करें| इसके कई पहलू है| अधिक पैदल यात्रा, बेहद कम सामान, पर्यटन स्थान से अधिक जुड़ाव|

उसके बाद एक प्रसिद्ध पर्यटन पत्रिका के रेस्पोंसिबल टूरिज्म सम्मलेन के लिए बुलावा आया और वहाँ जो कुछ पढ़ा सीखा उस पर भी ब्लॉग पोस्ट यहाँ लिखी गई| अब उन दोनों पोस्ट पर पुरुस्कार स्वरुप नीमराणा जाने का वाउचर मिल गया| मजे की बात यह कि हमारे लिए तारीख तय करना बहुत मुश्किल हुआ, आखिरकार एक पुराने वादे के चलते एक जरूरी मीटिंग में न जाने का फैसला किया गया| खान मार्किट पर नीमराना शॉप में गर्मजोश सवाल के बदले हमें जो महल (कमरा) लेने की उदास सलाह दी गई, वही हमने चुन लिया| वैसे यह चुनाव सही रहा|

मार्च के पहले सप्ताहांत हम बस पकड़ कर नीमराणा जा पहुंचे| राष्ट्रीय राजमार्ग से होटल तक एक पुराने मित्र ने टैक्सी का प्रबंध करवाया था| भारी भरकम विकास के बीच मौजूद छोटी से कस्बाई आबादी से होकर हम एक पुराने किले में प्राचीन शानदार किले में मौजूद अधुनातन शानदार रिजोर्ट पहुंचे|

पुखराज महल

जी हाँ, यही नाम था – पुखराज महल –  जहाँ हम रुके थे| पंद्रहवीं शताब्दी में बने भाग का सबसे ऊपरी और महत्वपूर्ण महल| तीन कमरों (जिनमें से एक को स्नानागार में बदला गया है), एक बालकोनी, एक टेरेस के साथ नीमराणा फोर्ट, शहर और आसपास का शानदार नजारा| प्राचीन आभा देता हुआ फर्नीचर, सजावट और आधुनिक स्नानागार|

पुखराज महल: आधिकारिक फ़ोटो

पुखराज महल: आधिकारिक फ़ोटो

नीमराणा फोर्ट पैलेस का हर कमरा अपने आप में अलग है| उस से दिखाई देने वाला नजारा भी कुछ हद तक बदल जाता है| पुखराज महल से आप स्विमिंग पूल ही नहीं, लगभग पूरा रिसोर्ट ही देख सकते हैं| यहाँ से स्विमिंग पूल, डाइनिंग हॉल, ओपन एयर थिएटर और अन्य सुविधाएँ आदि सब पास ही हैं| कमरों की साज सज्जा आपको एक दिन के महाराजा होने का पूरा अनुभव देने के लिए काफी है|

नीमराणा फोर्ट के नए हिस्से और आधुनिक निर्माण अपने पुरानेपन को आधुनिकता के साथ संजोने का प्रयास है|

हम भी दिनभर पूरे किले में घूमते रहे| सामान्य किलों के विपरीत यहाँ हमें अपनी मर्जी से कहीं भी घूमने, बैठने और खड़े होने की आजादी थी| बहुत से लोग तो लगा कि इसी रिसोर्ट में रुक कर भारतीय वास्तुशास्त्र, इतिहास, भूगोल, कला और संस्कृति की जानकारी ले लेना चाहते हैं| दो तीन लड़के लड़कियां तो शायद फोटोग्राफी में अपना कैरियर यहीं बना लेना चाहते हैं| यह आसन फोटोग्राफी के लिए बढ़िया स्थान है|

हर शनिवार को कुछ न कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है| उस दिन तेज आंधी और बारिश के कारण कार्यक्रम खुले में न होकर बंद कमरे में हुआ| उसके बाद भोजन, गाला डिनर, का साप्ताहिक आयोजन था| यह भी आज सामान्य भोजन कक्ष में हो रहा है|

अगले दिन विंटेज कार से नीमराणा कस्बे का चक्कर लगाया और दिल्ली आ गए| विंटेज कार के ड्राईवर के अलावा हर कोई यहाँ बहुत अधिक औपचारिक था| यह बड़े होटलों में होता है|

यह औसत भारतीय के लिए महंगा मगर एक सुखद अनुभव था|