चुप न बैठो…


चुप न बैठो… कोई आवाज उठाओ…

चुप रहना, चुपचाप सहना, हिंसा को बढ़ावा देना है और यौन हिंसा सिर्फ तन को ही नहीं मन को भी पीड़ा पहुंचाती है| यौन हिंसा समाज की गतिशीलता और जिन्दादिली को नुकसान पहुँचाने वाला सबसे बड़ा कारण है| इसलिए हमें, सब स्त्री और पुरुषों को इसके विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए|

मुख्यतः कॉर्पोरेट क़ानून के क्षेत्र में काम करने के कारण मुझे कंपनियों के कार्यरत महिलाओं के प्रति यौन हिंसा संबंधी कानून के बारे में कई बार काम करना पड़ता है| इसलिए मैं कंपनियों में कार्यरत महिलाओं के लिए के लिए उपलब्ध कानून के बारे में बात करूँगा| कार्यक्षेत्र में महिलाओं का यौन शोषण (रोकथाम, निषेध, निवारण) अधिनियम २०१३ इस विषय पर प्रमुख कानून है|

कंपनी की यौन हिंसा संबंधी जिम्मेदारी

  • काम के लिए सुरक्षित परिवेश जो कि कार्यरत व्यक्ति को संपर्क ले आने वाले व्यक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता हो;
  • कानूनी जानकारी और यौन हिंसा की शिकायत के लिए “आन्तरिक शिकायत समिति” के गठन की जानकारी देना;
  • समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम आदि करना;
  • आन्तरिक शिकायत समिति और स्थानीय शिकायत समिति को जाँच के लिए सभी सुविधाएँ उपलब्ध करना;
  • प्रतिवादी और गवाहों के आन्तरिक शिकायत समिति और स्थानीय शिकायत समिति के समक्ष उपस्तिथि सुनिश्चित करना;
  • आन्तरिक शिकायत समिति और स्थानीय समिति को जाँच के लिए आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध करना;
  • यदि महिला चाहे तो भारतीय दंड संहिता या किसी और कानून के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने में उस को आवश्यक सहायता उपलब्ध करना;
  • भारतीय दंड संहिता या किसी और कानून के अंतर्गत पुलिस या अदालत में दोषी के विरुद्ध प्रारंभिक कार्यवाही करना;
  • यौन शोषण को अपने सेवा नियमों के अंतर्गत दोष मानना; और
  • आन्तरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट के समय पर आना निगरानी पूर्वक सुनिश्चित करना| [धारा १९]

यह कानून समान रूप से प्रत्येक नियोक्ता पर लागू होता है|

आन्तरिक शिकायत समिति

प्रत्येक कंपनी एक आन्तरिक शिकायत समिति का गठन करेगी| यह समिति कंपनी के प्रत्येक कार्यस्थल के लिए अलग अलग होगी| [धारा ४]

पीड़ित महिला यौन उत्पीडन की शिकायत अपने कार्यस्थल पर गठित आन्तरिक शिकायत समिति के समक्ष शिकायत कर सकती है| शिकायत घटना के दिन से तीन महीने के भीतर होनी चाहिए| यदि इस तरह की घटना बार बार या कई बार हुई है तो अंतिम घटना के तीन माह के भीतर यह शिकायत होनी चाहिए| वैसे तो शिकायत लिखित में होनी चाहिए, मगर किसी कारण लिखित में न की जा सकती हो तो समिति इसे लिखित में दर्ज करने में महिला की मदद करेगी| समिति को अधिकार है कि यदि परिस्तिथिवश महिला अगर यह शिकायत तीन माह में न करा पाई हो तो उसे तीन महीने के बाद भी दर्ज कर सकते हैं| महिला की शारीरिक या मानसिक अक्षमता, मृत्यु आदि की स्तिथि में उसके कानूनी उत्तराधिकारी शिकायत कर सकते हैं| [धारा 9]

इस आन्तरिक शिकायत समिति को जाँच करने के लिए दीवानी अदालत के कुछ अधिकार भी दिए गए हैं| समिति जाँच के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति को बुला सकती हैं और किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए कह सकती है| समिति को अपनी जाँच शिकायत प्राप्त हों के ९० दिन में पूर्ण करनी होती है| [धारा ११]

समिति जाँच के दौरान महिला की प्रार्थना पर उसके तबादले या सामान्य से अधिक छुट्टियों के लिए आदेश दे सकती हैं| [धारा १२]

आन्तरिक जाँच समिति आरोपी को दोषी पाने की स्तिथि में आदेश दे सकती है कि:

  • सेवा नियम के हिसाब से इसे दोष मान कर कार्यवाही की जाये; या
  • वेतन या मजदूरी में से रकम काटकर पीड़ित को दी जाये|

सालाना रिपोर्ट

कंपनी की आन्तरिक शिकायत समिति प्रत्येक साल एक सालाना रिपोर्ट बनाकर कंपनी और जिला अधिकारी को देगी जो इस रिपोर्ट को प्रदेश सरकार को भेजेगा|

कंपनी का निदेशक मंडल अपनी सालाना रिपोर्ट में कैलेंडर वर्ष में प्राप्त शिकायतों और उनके निपटारे का विवरण देगा| [धारा २२ को धारा २(ग)(दो) के साथ पढने पर]

अंत में

यदि कोई कंपनी या अन्य नियोक्ता अपनी सालाना रिपोर्ट में इस प्रकार की कोई सूचना नहीं देता तो वहां पर न केवल महिलाओं वरन सम्मानित पुरुषों को भी कार्य करने से बचना चाहिए|

“I’m writing this blog post to support Amnesty International’s#KnowYourRights campaign at BlogAdda. You can also contribute to the cause by donating or spreading the word.”

कॉर्पोरेट जगत में यौन शोषण


 

अब जबकि तहलका मामला पूरी तरह गर्म है तो भूली बिसरी विशाखा दिशानिर्देश पुनः चर्चा में है| यद्यपि हरेक कॉर्पोरेट अधिवक्ता और कंपनी सचिव को यह दिशानिर्देश पता होने चाहिए, मगर मुझे इस गलती का अहसास है कि मैंने इन दिशा निर्देशों को आज तक मात्र एक बार सरसरी तौर पर पढ़ा है|

जब मैंने अपना कार्य प्रारंभ किया तो मुझे विशाखा दिशानिर्देश के बारे में प्रश्न का सामना करना पड़ा| कंपनी के मानव संसाधन विभाग की शीर्षस्थ अधिकारी ने मुझे एक पूरे दिन के लिए मीटिंग के लिए बुलाया| अपने आप को सँभालते हुए मैंने विशाखा दिशानिर्देश के बारे में बात शुरू की थी| मगर मुझे सीधे ही शब्दों में कहा गया कि बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के सामने एक ऐसा प्रस्ताव पेश करना है जिसे बिना किसी पारिवारिक समस्या के लागू किया जा सके| मेरा सामना एक जमीनी हकीकत से था| प्रबंध निदेशक का परिवार ही सभी उच्च पदों पर काबिज था और उनकी जाति विशेष के लोग अधिकतर पदों पर थे|

प्रबंध निदेशक का संदेश स्पष्ट था कि वो मानते हैं कि यौन उत्पीडन की किसी भी घटना का होना और छिपाया जाना, दोनों ही कंपनी के लिए घातक हैं| वह कंपनी और परिवार का मुखिया होने के नाते एक ऐसा प्रस्ताव चाहते थे जिससे परिवार और कंपनी दोनों में उन्हें किसी समस्या का सामना न करना पड़े|

प्रबंध निदेशक महोदय का विचार यह था की अधिकतर कंपनी में कुछेक उच्च अधिकारी, महिला और पुरुष, किसी न किसी रूप में यौन शोषण अथवा उसको छिपाने करने की मानसिकता रखते हैं|

Five ways to fight sexual harassment

यौन शोषण रोकने के पांच उपाय (Photo credit: InSapphoWeTrust)

उस समय की गयी मसक्कत का मेरा निष्कर्ष मैं यहाँ बाँटना चाहता हूँ|

भारत में कंपनी प्रबंधन के लिए बड़ी समस्या हैं:

(अ) परिवार और मित्रों का उच्च पदों पर आसीन रहकर कंपनी को हर मामले में अपनी बापौती समझते हैं|

(आ)                       अधिकतर यौन शोषण करने वाले लोग महत्वपूर्ण पदों पर होते है और अतिकुशलता से कार्य करने के लिए जाने जाते हैं|

(इ)   अधिकतर यौन शोषकों की आप ठीक उन्ही समूहों में निशानदेही कर सकते हैं, जिन से आप आर्थिक धोखाधड़ी का खतरा चिन्हित कर सकते हैं|

(ई)   प्रत्येक यौन शोषक अपने आस पास के कुछेक लोगों के सामने अपनी छवि या तो अच्छी बना कर रखता है अथवा पूरी तरह फंसा कर रखता है|

(उ)   हर मामले में यौन शोषक पुरुष ही यौन शोषक नहीं होते, परन्तु पुरुष यौन शोषण को सहने की अथवा उसमें सहयोग शुरू करने की प्रवृत्ति महिलाओं के मुकाबले अधिक रखते हैं| पुरुषों का यह सहयोग, सह – शोषक और शिकार दोनों के रूप में होता है|

(ऊ)  महिलाएं शिकार के रूप में शोषण को प्रायः स्वीकार नहीं करतीं परन्तु समाज, सहकर्मियों और घरेलू समस्याओं के कारण समझौता करने पर विवश होती हैं| शायद, उन्ही कारणों से महिलाओं में सह –  शोषक के रूप में काम करने की प्रवृत्ति भी पाई जाती है|

अधिकतर यौन शोषकों की आप ठीक उन्ही समूहों में निशानदेही कर सकते हैं, जिन से आप आर्थिक धोखाधड़ी का खतरा चिन्हित कर सकते हैं|