विश्व-बंदी २० अप्रैल


उपशीर्षक: भयातुर चिंताएं

कहना चाहता हूँ दिल्ली में डर लगता है| पर देश में डरना मना ही नहीं अक्षम्य पाप है|

वैसे भी इंसान भले ही बिना सोचे बड़े कौर खा ले मगर उसे बिना सोचे बड़ी बात नहीं कहनी चाहिए| करोना शायद इंसानियत को बदलने जा रहा है या शायद नहीं| हम १९१८ से तुलना शायद नहीं कर सकते क्योंकि मानवता और अर्थ व्यवस्था उस समय से बहुत बड़े हैं| जितनी तबाही करोना ने इस साल की है उसे करने में इसे १९१८ में शायद कई गुना समय लगता और आज के सन्दर्भ से देखें तो तबाही का कारण करोना से अधिक हमारी कमजोर चिकित्सा पद्यति होती| कितना दूरगामी प्रभाव वर्तमान बीमारी छोड़ती है, यह इतिहास जानेगा| यदि यह बीमारी लम्बे समय रहती है तो निश्चित ही इसके दूरगामी प्रभाव होंगे| अन्तराष्ट्रीय राजनीति जरूर गरमाई है परन्तु मुझे यह तात्कालिक गुस्से से अधिक फ़िलहाल इसका कोई सार नहीं दिखता| अगले महीने समीकरण किसी भी करवट बदल सकते हैं|

बहुत से गरीब जिन्हें खाने के लिए भीख, कूड़े और झूठन का सहारा था उनके लिए यह दिन कुछ राहत लायें हैं| जिन्हें खैरात लेना नहीं सुहाता उनके आत्मसम्मान पर बन आई है| बढ़ती ग़रीबी और घटता आत्मसम्मान उन्हें नकारा बना सकता है| निम्न मध्यवर्ग के लिए अलग कठिनाई हो सकतीं हैं|

उलट विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद मुझे है| इसका कारण करोना नहीं बल्कि यह सीख है कि विकास का विकेन्द्रीयकरण होता तो हम बहुत से अपनी लगभग तिहाई अर्थव्यवस्था को चला सकते थे| देश के तिहाई ज़िलों में करोना का असर नहीं है| अगर गांव और तहसील/तालुकों की बात करें तो शायद दो तिहाई गाँव और तालुके एकदम अछूते हैं| इस तरह की स्तिथि में विकेन्द्रीय विकास निश्चित ही अर्थव्यवस्था की हानि को कम कर सकता है| हाँ, अगर विकास विकेन्द्रीय होता तो भौगोलिक रूप से अधिक क्षेत्र प्रभावित होता पर प्रभावित आबादी इतनी ही होती|

परन्तु यह सब अटकलें हैं| वास्तव में मेरा दिमाग यह सोच रहा है कि क्या दिल्ली जैसे महानगर सुरक्षित है? देखा जाये तो अलीगढ़ कहीं अधिक सुरक्षित लगता है| पर कब तक, कितना?

पर दुविधा यह है कि अगर केंद्रीयकृत विकास फैला तो जल्दी ही दिल्ली का प्रभामंडल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दस बीस वर्ष में अलीगढ़ पहुँच जाएगा| अलीगढ़ की दिशा में गाज़ियाबाद, मेरठ, गौतम बुध नगर, और बुलंदशहर प्रभावित है साथ में निकटवर्ती आगरा भी|

ईश्वर नींद आप भेजते रहना|

विश्व-बंदी १८ अप्रैल


उपशीर्षक – नए ध्रुव 

कल शाम हल्की बारिश हुई थी आज तेज हवाओं के साथ वैसी ही बारिश जैसी अक्सर फ़सल करने के दिनों में उत्तर भारत में आती रहती है| हवाएं गर्मी से राहत लेकर आईं| सूरज छिपने के साथ बादल भी कम हो गए|

दिल्ली में कुल ७६ कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित हो चुके हैं| बीमारी नियंत्रण में महसूस होती है| सोमवार के कार्यालय और बहुत से कारोबार के खुलने को लेकर घरों में चिंता का माहौल है| जिन घरों के अकेले कमाने वाले – चिकित्सकीय कर्मचारी, पुलिस, आदि लोगों के परिवार को तिहरा संकट है – काम छोड़ नहीं सकते, नाते-रिश्तेदार-पास-पड़ोसी साथ छोड़ रहे हैं, भविष्य की चिंता तो है ही|

भारत्त के शेयर बाजार की खस्ता हालात के चलते हाल में चीन के पीपल’स बैंक ऑफ़ चाइना ने भारत की बेहद बड़ी कम्पनी एचडीऍफ़सी में एक फ़ीसदी से अधिक के शेयर खरीदे थे| जिसके बाद देश में चिंता का माहौल था| आज सरकार ने प्रत्यक्ष पूँजी निवेश के नियम के कड़ा परिवर्तन किया है जिसे चीन के आर्थिक आक्रांत को रोकने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है|

अभी तक भारत में बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिक और कंपनियां को छोड़कर कोई भी विदेशी या विदेशी संस्था बिना किसी पूर्वानुमति के भी निवेश कर सकती थी| बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिक और कंपनियां सरकारी अनुमति के बाद निवेश कर सकती हैं जिनमें से पाकिस्तान के लोगों के लिए कुछ विशेष क्षेत्र में निवेश मना था|

आज के बाद भारत के किसी भी भूमि- पडौसी देश के नागरिक और संस्थाएं बिना पूर्व अनुमति के निवेश नहीं कर पाएंगी, जिनमें से पाकिस्तान के लोगों के लिए कुछ विशेष क्षेत्र में निवेश मना रहेगा| पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यानमार और बांग्लादेश आदि भारत के भूमि-पड़ौसी हैं|

चिंता यह हो सकती है कि यह क़दम चीन विरोधी नए अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीकरण में भारत की स्तिथि को एक तरफ़ खड़ा करता है| साथ ही सस्ता निवेश करने के लिए अन्य अमित्रों को भी खुला मैदान मिल सकता है| मेरी चिंता सऊदी अरब और इस्रायल से लेकर रूस और अमेरिका से आने वाला निवेश भी है खासकर तब जब यह निवेश उनके हाथ में नियंत्रण सोंप दे| खैर भी सब अटकलें हैं और सरकार चौकस लगती है|

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

विश्व-बंदी १७ अप्रैल


उप-शीर्षक: संशोधित समेकित दिशानिर्देशों के साथ गृह मंत्रालय का आदेश

आज जब भारत सरकार के सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का ईमेल मिला| इसमें संशोधित समेकित दिशानिर्देशों के साथ गृह मंत्रालय का आदेश दिनांक 15.04.2020  संलग्न करते हुए मंत्रालय ने आग्रह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए इकाइयों में सभी एहतियाती उपाय किए जाने चाहिए। साथ ही बहुत से मित्रों से वार्तालाप करते हुए समझ आया कि कुछ उद्योगपति और अधिकारी भले ही खुद घर पर बैठे हों, परन्तु कर्मचारियों और कामगारों के प्रति सहानुभूति न रखते हुए उन्हें येन-केन प्रकारेण कार्यालय में देखना चाहते हैं| तो सोचा कि इस सरकारी आदेश को कानूनी निगाह से देखा जाए| आज की करोना डायरी में यही सही|

मुख्य बात यह है कि अगर आपका कार्यालय या कारखाना अगर खोले जाने की अनुमत सूची में है तो उसे किस प्रकार की सावधानियाँ बरतनी है और किसे बुलाना यां नहीं बुलाना है|

आवश्यक रूप से कड़ा पाठ

क्यों कि यह आदेश एक ऐसे कानून से है जिसमें सजा का प्रावधान है और इसका उद्देश्य बेहद ख़तरनाक बीमारी को रोकना है, इसलिए इसको कड़ा नियम मानकर पढ़ना उचित होगा| इसका ढीला ढाला पाठ आपको सजा का भागी बना सकता है| इस कानून को तोड़ने पर आपको सजा देने के लिए आपकी दुर्भावना सिध्द करने की आवश्यकता नहीं होगी|

क्यों कि यह आदेश बेहद कम समय में तैयार किया गया है अतः इसमें कुछ बाते आगे पीछे हुई हैं| हमें इसे समग्र आधार पर ही पढ़ना चाहिए|

उलंघन पर सजाएँ

इस आदेश का उलंघन करने पर उलंघन करने वालों, जिनमें सरकारी कार्यालय व कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं, को तो साल तक की जेल हो सकती है, साथ में जुरमाना तो है ही|

अनुमति नहीं है:

तेरह प्रकार की गतिविधियाँ पूरे देश में हर हाल में पूर्णतः बंद है| कुछ गतिविधियों को (पैराग्राफ ५-२० में) कन्टेनमेंट ज़ोन के बाहर अनुमति दी गई है| अन्य जिन गतिविधियों को अनुमति नहीं दी गई है उन्हें केवल घर से कार्य करने करवाने की अनुमति समझी जानी चाहिए और इसके लिए कार्यालय भूल कर भी न खोलें|

केंद्र सरकार में लगभग १७० ज़िलों को हॉट स्पॉट घोषित किया है| स्थानीय प्रशासन उन ज़िलों में इलाकों को कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित कर सकता है, उदहारण के लिए दिल्ली में सभी नौ जिले हॉट स्पॉट हैं और इनमें इस समय कुल ६० कन्टेनमेंट ज़ोन हैं|

नहीं बुला सकते:

अनुमति के नियमों में सरकारी क्षेत्र और कुछेक अन्य क्षेत्र को अधिकतम अनुमति सीमा के अन्दर ही कर्मचारी बुलाने की अनुमति है| उदहारण के लिए सरकारी कार्यालयों में छोटे और मझोले अधिकारियों व् कर्मचारियों को ३०% से अधिक क्षमता में नहीं बुलाया जा सकता| परन्तु असली नियम यह नहीं है बल्कि अन्य है| असली नियम मैं नीचे बता रहा हूँ:

  • कन्टेनमेंट ज़ोन में रहने वाले कर्मचारी नहीं बुलाये जा सकते, पर यह घर से काम कर सकते हैं
  • ६५ वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारी नहीं बुलाये जा सकते, पर यह घर से काम कर सकते हैं|
  • किसी भी बीमारी के ग्रस्त कर्मचारी, भले ही वो कार्यालय आने के लिए तैयार हों, नहीं बुलाये जा सकते, पर यह घर से काम कर सकते हैं|
  • ऐसा कोई स्त्री-पुरुष जिनकी कोई भी संतान पांच वर्ष के कम हो, नहीं बुलाये जा सकते, पर यह घर से काम कर सकते हैं|
  • बिना चिकित्सा बीमा कराएँ किसी व्यक्ति को नहीं बुलाया जा सकता, पर यह घर से काम कर सकते हैं|
  • कार्यालय और किसी भी मीटिंग में बैठे हर व्यक्ति को दूसरे से एक मीटर/६ फुट दूर खड़ा या बैठा होना चाहिए|
  • किसी भी मीटिंग में १० या अधिक लोग सामान्यतः नहीं बुलाए जाने चाहिए|
  • किसी भी गैर जरूरी व्यक्ति को कार्यालय आने की अनुमति नहीं होगी|

कार्यालय की तैयारी:

  • कार्यालय आने वाले हर व्यक्ति के आने जाने का प्रबंध कार्यालय करेगा, इसके लिए किसी भी सार्वजानिक वाहन का प्रयोग नहीं होगा|
  • किसी भी वाहन में उसकी क्षमता के चालीस प्रतिशत से अधिक लोग नहीं बैठे होंगे| यानि चार और पांच सीटों वाली कार में मात्र दो लोग| पचास लोगों की बस में बीस लोग मात्र|
  • कार्यालय खुलते और बंद होते समय सेनिटाइज़ किया जाएगा|
  • कार्यालय में आते हर वाहन और उपकरण को विषाणु रहित किया जायेगा – लेपटोप, पेन पेन्सिल को शामिल समझने में ही भलाई समझें|
  • कार्यालय में हर आते और जाते व्यक्ति के तापमान जाँचने की पूरी थर्मल स्क्रीनिंग व्यवस्था होगी|
  • हर उचित स्थान पर सेनिटाइज़र और हाथ धोने की व्यवस्था होगी|
  • भोजन-अवकाश के साथ नहीं होगा हर व्यक्ति अलग अलग भोजन करेगा| मित्रता और घुलने मिलने की अनुमति न दें|
  • कोई बड़ी मीटिंग नहीं होगी|
  • किसी भी हालात में एक साथ पांच व्यक्ति इकठ्ठे न हो| बेहतर समझ कहती है कि एक व्यक्ति प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अधिक व्यक्तियों के संपर्क में न आए|
  • कार्यालय के निकटतम मौजूद कोविड -१९ जाँच केंद्र और अस्पताल और क्लिनिक की जानकारी उपलब्ध रहेगी|