विश्व- बंदी २ अप्रैल


उपशीर्षक – मूर्खता का धर्म युद्ध 

आज मानवता के संरक्षक भगवान विष्णु के अवतार श्री राम का जन्मदिन है| मानवता अपनी मौत मरना चाहती है| ताण्डव हो है| मैं मूर्खता का धर्म युद्ध देख रहा हूँ| कौन सा धार्मिक संप्रदाय ज्यादा मूर्ख है इस बात की होड़ चल रही है|

पहले भारत के प्रधानमंत्री की मानवतापूर्ण बात का तथाकथित वैज्ञानिक आधार खोजकर जनता कर्फ्यू की शाम तालियों, ढोल नगाड़ों बाजे ताशों के साथ देश ने अपना मजाक उड़वाया| इस से पहले गौमूत्र और गोबर के महाभोज आयोजित हुए कि इन दोनों पदार्थों के सेवन से विषाणु का असर नहीं होगा| फिर तबलीग वाले और उनकी मूर्खतापूर्ण वक्तव्य सामने आये जो काफ़िरों पर हुए इस खुदा के कहर में खुद बीमार पड़े और काफ़िरों से ज्यादा स्वधर्मियों के लिए ख़तरा बने| भारत के बाहर की ख़बरें भी दुःखदायी हैं| इस्रायल में ऑर्थोडॉक्स यहूदियों पर सरकार को पुलिस कार्यवाही करनी पड़ी और ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और स्वचालित हथियारों का प्रयोग करना पड़ा| अमेरिका में एक पंथ ने बीमारों के आग्रह किया की बीमार होने पर दूसरों पर खांसने और थूकने का हमला करें|

अधिकतर धर्म बड़ी बीमारियों को ईश्वर की मर्जी (यहूदी, ईसाई, मुस्लिम) या नए – पुराने पापों का फल (हिन्दू, बोद्ध, जैन, सिख) मानते हैं| कुल मिला कर हर धर्म का अन्धविश्वासी बीमारी में मरकर स्वर्ग का द्वार अपने लिए खोलना चाहता है| कुछ लोग अपने सहधर्मियों के लिए यह “सरल” मार्ग उपहार में देना चाहते हैं तो अन्य काफ़िरों/अविश्वासियों/कमुनिस्ट आदि को पाप का फल या प्रायश्चित का अवसर उपहार में देना चाहते हैं|

इन धार्मिक अंध-विश्वास के नाम पर बहुत से लोग चिकित्सकों और स्वस्थ्य कर्मियों पर हमला कर रहे हैं कि हमारी जाँच और इलाज न करों| दूसरी तरफ वो लोग भी हैं जो चिकित्सकों और स्वस्थ्य कर्मियों पर इसलिए हमला कर रहे हैं कि उनके मरीज को देखने में देरी हो रही है|

सब डरे हुए लोग अपना बचाव चाहते हैं| मेरे जैसे कुछ घर में “डरकर” बंद बैठे हैं| तो कुछ सड़क पर सिगरेट पीते हुए सोचते हैं कि बीमार (भले ही बीमार को अपनी बीमारी का पता तक न चला हो) घर बैठे| कुछ महानुभाव इलाज के अभाव में बीमारों को मार डालने तक की बात कर रहें हैं| यह इतना घाटक है कोई बीमार अपनी बीमारी बताने में भी डरने लगे| तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री को करोना हुआ है मगर दो अन्य मंत्री आज मंदिर में राम नवमी के सार्वजानिक पूजन कर कर ईश्वर प्रसन्न करते नजर आए|

सबसे घटिया वह लोग हैं जिन्हें करोना का इलाज कर रहे अपने किरायदार चिकित्सकों और स्वस्थ्य कर्मियों को घरों से निकाल रहे हैं| बहुत के पड़ोसियों ने चिकित्सकों और स्वस्थ्य कर्मियों को घर लौटने से मना कर दिया| इन मकान मालिकों और पड़ोसियों का कोई धर्म नहीं क्योंकि इनके पास अच्छा पैसा, उच्च जाति, उच्च वर्ग और कर देने का उलहना है|

शाम ठीक बीती| काम धंधा करना है पर इस माहौल में कार्य में चित्त लगाना कठिन हो रहा है| ब्लॉग के अलावा सामाजिक मीडिया के अपने को बाहर कर रहा हूँ| सही–गलत ईश्वर जाने|

विश्व-बंदी ३१ मार्च


उपशीर्षक – वित्तवर्ष का अंत 

कुछ घंटों में यह वित्त वर्ष बुरी यादों के साथ समाप्त होने जा रहा है| मैं आशान्वित हूँ कि नया वर्ष फिर से बहारें लाएगा| इस साल पहले दस महीने शानदार बीते| बहुत कुछ नया सीखा, किया और कमाया| मगर बही खाते कर चटख लाल रंग उड़ा उड़ा उदास सा हो गया है|

लेनदारियां बहुत बढ़ चुकी हैं और इस माहौल में उनकी वसूली सरल तो नहीं दिखती| पिछले एक महीने से कोई खास बिल नहीं कटे| अप्रैल से जून से वैसे भी थोड़ा तंग रहता है| इस बार हालत शायद और तंग रहेंगे| उधर, मुवक्किल पैसा समय पर नहीं देते मगर सरकार को अपना वस्तु-सेवाकर तुरंत चाहिए होता है| सरकारी कर गांठ से देना बहुत भारी पड़ता है| जब सरकार खुद आपकी मुवक्किल हो तो स्तिथि नाजुक ही रहती है| केवल रकम वसूल हो जाने रेशमी भरोसा रहता है| हम सेवा प्रदाता तो सिर्फ कागज पर ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं| जमीनी लाभ शायद कुछ नहीं|

इस समय बचत से लिए गए निवेश के हालात भी अच्छे नहीं| यह साँप छछुंदर की स्तिथि है| निवेश करें तो जवानी ख़राब, न करें तो बुढ़ापा| उसपर यह मंदी का समय किसी कंगाली से कम नहीं पड़ता| शेयर बाजार में मंदी के चलते निवेश बकत कुछ नहीं तो आज सरकार ने बचत वगैरा पर ब्याज घटा दी| कंगाली में आटा गीला हो चुका है| आटे से याद आया – पिछला गल्ला भी ख़त्म हो रहा हैं और इस महीने का गल्ला भरने के लिए आधे देश के पास पैसे नहीं बाकि बचे लोग के पास दूकान जाने की समस्या|

जिन लोगों के पास नौकरियां हैं उनकी भी समस्या है| लगभग सबको साल के आखिर और कार्यालय के बंद होने के कारण औना – पौना वेतन मिला है| मुनीम भी घर पर और याददाश्त से कितना हिसाब किताब लगायें|

ब्याज घटने से भविष्य निधि पर ७.१ फ़ीसदी, बचत पत्र पर ६.८ फ़ीसदी, किसान विकास पात्र पर ६.९ फ़ीसदी का ब्याज मिलेगा| बचत खाते पर सरकार ने ४ फीसदी पर ही ब्याज रखा हुआ है| इस सब से बुढ़ापे का गणित बिगड़ जाता है| मगर कुल मिलकर ब्याज की दर जीवनयापन की महंगाई की दर से कम होने का अंदेशा हो सकता है| यह बाद अलग है कि बाजार खुद मंदा हो रहे|

सरकार ने दिवालिया कानून को थोड़ा कमजोर थोड़ा सुस्त बनाया है तो काम धंधे में कमी रहेगी| इधर कुछ नया जानने सीखने की जरूरत रहेगी कि कुछ नया काम धंधा मिलता रहे|

प्रार्थना रहेगी बाज़ार में मंदी और देश में अकाल के हालात न बनें| यह नामुराद बीमारी और दुर्भिक्ष जल्दी दूर हो|

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विश्व-बंदी २९ मार्च


उपशीर्षक – सरकारी क्षमा प्रार्थना 

ट्रेन के डिब्बों को १० हजार आइसोलेशन कैंप में बदला जा रहा है? क्या अस्पताल इतने कम पड़ने वाले हैं? बिस्तरों की कमी होने पर यह उचित हो सकता हैं – परन्तु बेहद चिंताजनक है| इस समय तक हजार लोग बीमार हो चुके हैं और सौ करीब ठीक हुए हैं| करोना से दोपहर तक २५ लोग मरे, इसके अतिरिक्त २२ लोग सरकार द्वारा किये गए आक्रामक लॉक डाउन से मारे गए हैं| 

प्रधानमंत्री ने निर्लज्ज होकर जनता से “इस उचित निर्णय से होने वाली कठिनाई” के लिए माफ़ी मांगी है|

इतिहास इस माफ़ी को उसी तरह याद रखेगा जिस तरह माता कुंती द्वारा अपने परित्यक्त पुत्र कर्ण से मांगी गई माफ़ी को याद करता है| उचित निर्णय यदि गलत तरीके से लिए जाये तो उचित नहीं रहते| लक्ष्य ही नहीं साधन, साध्य और समय का भी महत्त्व है| आपातकालीन निर्णय लेने में त्रुटियाँ हो सकती हैं, परन्तु यह निर्णय बीस दिन देर से लेने के बाद भी बिना योजना बनाये लिया गया| बिना गलती सुधारे मांगी गई माफ़ी का कोई मतलब नहीं| अब तो गलती सुधारने का समय भी निकलता जा रहा है| तत्काल ट्रेन चला कर फँसे हुए नागरिकों को उनके घर तक पहुँचाना चाहिए था| बसों के भरोसे यह काम देरी करेगा|

आज खुद प्रधानमंत्री ने कहा है परन्तु अमल करने की जिम्मेदारी सिर्फ जनता के सिर पर डाल दी:

किसी को नहीं पता क्या पिछले चार साल से हर दिन लगाये जाते इस आपातकाल में जनता को जीने का अधिकार कब ख़त्म हुआ? बीमारी का बहाना बनाकर लम्पटता को न छिपाया जाए तो बेहतर है| ठीक है कि घर से बाहर निकलना ख़तरनाक है| मगर हालत इतने क्यों बिगड़ने दिए गए?

एक मित्र से बात हुई| पति-पत्नी दौनों उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं में हैं| पुलिस नाम पता और घर से निकलने की वजह की जगह पूछने डंडा चलाती है|

कोई भी तानाशाह हो, उसके पास हर समस्या का सबसे मानवीय समाधान भी सिर्फ़ डंडा है|