अनुपालन आवश्यकताओं ने कमी हो


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छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए सरल तरीका है कि अनावश्यक अनुपालन को कम किया जाए| सरकार कई कंप्लायंस को एक साथ मिला देने की प्रवृत्ति से भी दूर रहे| किसी भी प्रक्रिया में छोटे मोटे छिद्र भरने के लिए उस से अधिक श्रम, पैसा और कठिनता खर्च हो रही है जितना तो नुक्सास उस छिद्र से नहीं होता| इस से बचना चाहिए और कारोबारी को मूलतः ईमानदार मानकर काम किया जाए| नियमों को सरल भाषा में लिखा जाए तो भी बहुत बड़ी राहत होती है क्योंकि नियम समझने में ऊर्जा और धन कम खर्च करना पड़ता है|

मेरे विचार से लघु और मध्यम कारोबारियों और कंपनियों को ऑडिट से मुक्ति मिलनी चाहिए| छोटी कम्पनियों को ऑडिट की जरूरत नहीं है| उन्हें स्वतंत्र घोषणा के आधार पर अपना काम करने दिया जाए|

छोटी कंपनियों को हर माह अलग अलग फॉर्म भरने के स्थान पर अपने सभी अपडेट एक त्रैमासिक फॉर्म में भरकर जमाकर देने का विकल्प भी दिया जा सकता है| परन्तु यह फॉर्म तिमाही के पंद्रह दिन के भीतर जमा करना हो|
सभी प्रकार के निल रिटर्न को समाप्त किया जाए और उन्हें स्वतः भरा हुआ मान लिया जाए|

सबसे बड़ी बात यह कि यदाकदा की सरलता और राहत के स्थान पर सदा सरल की नीति अपनाई जाए|

 

चैनाराम का घेवर


इस साल तालाबंदी के बीच दिल्ली वालों ने शराब के लिए लम्बी कतारें लगाई तो खबर बनी| मगर ऐसा नहीं कि दिल्ली वाले सिर्फ़ पीने के लिए कतार में लगते हैं| बढ़िया खाने के लिए लगने वाली इन कतारों में लगने वालों में मैं भी सम्मलित हूँ| बीते शनिवार मैं एक बात फिर एक खास कतार में था – “करोना से डरोना” मन्त्र का जाप करते हुए| यह दिल्ली की सबसे अनुशासित कतारों में से एक है| यह सावन में लगती है| कतार में लगने वाले भोले के भक्त तो हैं पर कांवर के लिए नहीं, परन्तु घेवर के लिए कतार में लगते हैं|

दिल्ली में सबसे अनुशासित सालाना कतार चैनाराम हलवाई की दुकान पर होती है – Chaina Ram Sindhi Confectioners| साल भर इस दुकान पर बेहद संजीदा किस्म के खास शौक वाले ग्राहकों की भीड़ रहती है| यहाँ आम जमावड़ा कराची हलवा और सिन्धी नमकीन के शौक़ीन लोगों का रहता है| इस दुकान पर छोले भठूरे खाकर नेताओं के राजघाट पर दिनभर के उपवास के लिए जाने का समाचार २०१८ में चर्चा में था|

जब सावन के अंधे को हरा हरा दिखता है तो मेरे विचार से सावन के भूखे को घेवर का स्वाद आता रहता होगा| अगर दिल्ली में यह घेवर चैनाराम हलवाई का हो तो बात खास है| मैं पिछले पांच सावन से इस दुकान पर कतार में लगता रहा हूँ और जब भी दो किलोग्राम से कम घेवर लेकर घर पहुँचा हूँ तो घर पर कठिनाई का  सामना करना पड़ा है|

घेवर का आकर औसत पर थोड़ा दाना बड़ा है – यह एक दम ठीक सिका हुआ है| मेरे हिसाब से इसमें मैदा के साथ कुछ न कुछ तरीका जरूर अपनाया गया है| खास बात है कि यहाँ ज्यादा मीठी परन्तु कम गाढ़ी और मोटाई में पतली रबड़ी का प्रयोग होता है, जिससे यह बहते हुए घेवर की तह तक हाती जाती है और पूरे घेवर में अपना स्वाद छोड़ती है| एक घेवर का औसत वजन प्रायः आधा किलो का रहता है| इसे मूँह में घुलते महसूस करने और धीरे धीरे इसका स्वाद लेने का आनंद अलग ही है|

ऐश्वर्य मोहन गहराना 

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सकारात्मक ऊर्जा और शौचालय


यह सकारात्मकता की अतिशयता का युग है| हम बात बेबात में सकारात्मकता को पकड़ कर बैठ जाते हैं| हो यह रहा है कि नकारात्मकता का नकार जीवन पद्यति बन गया है, बिना यह समझे को नकारात्मकता को नकारने के चक्कर में हम स्वभाविक सकारात्मकता को छोड़ बैठे हैं|

एक बच्चे से शौचालय का दरवाज़ा खुला रह गया| कुछ हो देर में सारा परिवार उसे समझाने लगा कि शौचालय से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है जिस कारण घर में दरिद्रता आती है| बेचारा न सकारात्मकता समझा न दरिद्रता, रोने लगा|

शौचालय का महत्त्व ही यह है कि तन-मन की नकारात्मकता को आप वहाँ निकाल आते हैं और वास्तविक सकार का अनुभव करते हैं| आप तरोताजा महसूस करते हैं| शयनकक्ष और शौचालय वास्तव में दो ऐसे स्थान है जहाँ बसे मौलिक विचार आप तक आते हैं| यह दोनों स्थान सकारात्मक है|

वास्तव में नकारात्मकता क्या है? विकास नकारात्मक है, क्योकि यह यथास्तिथि को नकारने से बनता है| क्या संतोष नकारात्मक है क्योंकि यह परिश्रम और विकास को नकार देता है; नहीं संतोष प्रायः सकारात्मक है और जीवन में शांति और स्थायित्व लाता है| पर जीवन में हम इस सब को सरलता से नहीं समझते|

वास्तव में जिसे हम स्वीकार करना चाहते हैं वह सकारात्मक लगता है| हमारा प्रिय नेता सकारात्मक और उसकी आलोचना नकारात्मक लगती है| जबकि सब जानते हैं चापलूसी, अंधविश्वास, किसी भी व्यक्ति के सही गलत को सम्यकता से न देख पाना नकारात्मकता है| यानि वास्तव में समालोचना और आलोचना जन्य प्रशंसा सकारात्मक है, चापलूसी और निंदा नकारात्मक| यहाँ भी एक मज़ेदार बात है, निंदा किसी को नकारात्मक नहीं लगती, बल्कि यह तो आज बड़ा व्यवसाय है जिसे गोसिप का नाम देकर मनोरन्जन के लिए बेचा जा रहा है| हम निंदा को पहचान ही नहीं पाते कि यह स्वस्थ मनोरंजन है या नकारात्मकता| वास्तव ने किसी अभिनेत्री का नृत्य सकारात्मक मनोरंजन है और किसी पुरुष से उनका नाम जोड़ना नकारात्मक|

शौचालय की बात पर वापिस जाते हैं – शौचालय यदि साफ़ है तो कोई कारण नहीं कि यह नकारात्मक ऊर्जा देगा| परन्तु यदि, हमारा मन शौचालय को लेकर अच्छे विचार नहीं रखता तो यह नकारात्मक महसूस होगा| परन्तु अपने आप में शौचालय सकारात्मक है, यह आपके तन मन के नकारात्मक अवशिष्ट को निकालने में मदद करता है|

शयनकक्ष और शौचालय वास्तव में दो ऐसे स्थान है जहाँ बसे मौलिक विचार आप तक आते हैं|

पुनश्च: कुछ मित्रों का कहना है कि शौचालय में जीवाणु विषाणु की अधिकता के कारण उसे नकारात्मक ऊर्जा युक्त माना जाना चाहिए; यह सब हमारी सोच है, घर में सबसे अधिक जीवाणु विषाणु रसोई के बर्तन मांजने के स्थान पर होते हैं, या हमारे तन में| शौचालय से तो आप उन्हें तुरंत बहा आते हैं|

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