कंडीशन सीरियस है!!


ऊपर की साँस छत को छूती है तो नीचे के सड़क को| हर कोई दम साधे बैठा है| कहीं साँस हमेशा के लिए न छूट जाये; डर के मारे सबने मूलबंध लगा रखा है| कई लोग तो सीट से ऐसे चिपके हैं कि डर  रहे हो कि ऊपर का रोका साँस कहीं नीचे से न निकल जाये| जो खड़े हैं उनको अपनी नानी और परनानी का नाम मुँह जबानी याद हो गया है| हर किसी ने अपनी सीट का हत्था या अगली सीट का कन्धा कस के पकड़ा है|

सामने के शीशे पर लटके भगवान् जी की कंडीशन तो सबसे सीरियस है| लगता है कि लंका की परिक्रमा करते करते कहीं शीशा फोड़ कर न भाग छूटें| डिरेवर ने जोर जोर से गाना बजा रखा है; शीला की जवानी| शायद शीला से उसकी कोई पुरानी याद जुडी होगी या शायद इस बस का जवानी का नाम शीला रहा हो| जब भी गाने में आता है… तेरे हाथ न आनी, डिरेवर गाड़ी का चक्का कस के पकड़ लेता हैं| वर्ना कंडक्टर जोर से चीखता है, स्त्री-रिंग संभाल के…. बे…|

गाड़ी को भी लगता है म्यूजिक का बड़ा शौक है…. खड़ खड़ खड़.. खड़ खड़ खड़… खड़ खड़ाक खड़…| राग खड़ाकी बहुत उम्दा बज रहा है| सारे लोग इसे सीरियस कंडीशन से सुन रहे हैं| कई तो आँख बंद कर के गर्दन भी हिला रहे हैं| मगर चेहरे से लगता है कि कंडीशन बहुत सीरियस है| एक नयी नवेली के आँख से तो बीच बीच में पानी रिसने लगता है और वो अपने पति को ऐसे ही देख लेती है जैसे कोई निरीह हिरणी सियार को देखती हो|

पीछे बैठे यात्री तो बीच बीच में हवा में कूद जाते हैं| और जोर से आवाजें निकालते हैं; आआआआआ ईईईईईईए ऊऊऊऊऊऊऊओ| कंडक्टर उनकी तरफ देख कर बता रहा है, शौकर कभी हाल ही मरम्मत करवाया है| सरकारी हेड मित्री साब से| उसकी कंडीशन एक दम फिट है| सरकारी ओके लगा है उस पर|

जो यात्री खड़े हैं उनपर भवानी सवार है; लगातार झूम रहे हैं| गाड़ी की छत से लटकी रौड सबने ऐसे ही पकड़ रखी है जैसे यही पकड़ के वैतरणी पार जाना है| एक महिला आगे खड़े सूटेड बूटेड पुरुष के ऊपर बार बार लुडक रही है और डरा सहमा का पुरुष अपनी रोती से सूरत लेकर बार बार एक ही बात कहता है…  माफ़ करना.. बहनजी… गलती से लग गया है| यह कहते में उसका सारा जोर बहनजी शब्द पर है| वो  लगातार जप रहा है जय हनुमान ज्ञान गुण सागर… लगता है सुबह घर से नहीं मंदिर से निकल के आया है… शायद बेचारे का मंगल का व्रत है| बीच बीच में उसके आगे खड़ा बुजुर्ग उसकी तरफ देख कर पूछ लेता है; आप आराम से तो हैं; दामाद जी| बुड्ढे का सारा जोर दामाद जी शब्द पर है कि सबको बताना चाहता हो, कि यह सूटेड बूटेड उसका पुराना शिकार है|

एक जोर का झटका लगा| जो खड़े है वो लुढ़क गए हैं; औरतें कुत्ता कमीना वाली गालियाँ दे रहीं हैं और आदमी रिश्तेदारी वाली| जो लोग पीछे बैठे थे वो आआआआआ ईईईईईईए ऊऊऊऊऊऊऊओ के बाद अपना सर सहला रहे हैं और जो आगे बैठे है उन्होंने सीट को और ज्यादा कस के पकड़ लिया है| एक बच्चा रो रहा है… पप्पा… आआअ… ..पप्पा घर चलो…प्लीईईईई…| गाड़ी अचानक से रोड के साइड पर खड़ीं हो गयी है| डिरेवर ने अनाउंस किया है; पिंचर हो गया है…. और सुबह से मुँह में जमा किया हुआ गुटखा बाहर थूक दिया है|

सारे पुरुष यात्री एक एक कर उतर कर खेत की तरफ मुँह कर के खड़े हो गए हैं…. और सबने अपने सर नीचे झुका लियें हैं| तभी एक भीख मांगने वाला लड़का गाता हुआ चला आ रहा है… देख तेरे इंसान की हालात क्या हो गयी भगवान…|

उस सूटेड बूटेड आदमी ने भिखारी लड़के को चांटा मार दिया है और गाड़ी के नीचे से डिरेवर कह रहा है… पंचर बहुत सीरियस है| कंडीशन बहुत सीरियस है|

भिखारी लड़का अब रो रहा है… ससुरे के… अगर भीख में देने के पैसे नहीं थे तो सूट क्यूँ पैन के आ गया…| और ससुर जी किसी सहयात्री को बता रहे हैं… इन हरामियों की वजह से देख गाड़ी; क्या सारे देश की कंडीशन बहुत सीरियस है| 

[इस समय इंडीब्लॉगर की कंडीशन सीरियस है और वो सबसे कुछ सीरियस लिखने के लिए कह रहे हैं, सीरियसली| आप मेरी बात को सीरियस नहीं ले रहे तो भाई कैडबरी ५ स्टार वालों से पूछ लो| लगता है आप की कंडीशन सीरियस है| कैडबरी ५ स्टार के पेज पर जाकर तो देखो सारी सीरियसनेस बाहर]

विवाह, प्रेम और कामुकता


 

यह प्रेममयी सप्ताह है| प्रेम आज सबसे कम चर्चित और सबसे अधिक विवादास्पद शब्द है| धार्मिक कट्टरपंथियों  ने इसे ममता, वात्सल्य, स्नेह, मित्रता और आदर का पर्याय बनाने का प्रयास किया है तो सांसारिक अतिवादियों ने कामुकता का|

विवाह और प्रेम की आपसी स्तिथि तो और भी खराब है| विवाह जहाँ धार्मिक या अधिक से अधिक सामाजिक सम्बन्ध है तो प्रेम हार्दिक या आत्मिक|

प्रेम विवाह के बाद भी प्रेम बरकरार रहेगा अथवा विवाह में प्रेम उत्पन्न होगा?

प्रेम में कामुकता आएगी या कामुकता में भी प्रेम बना रहेगा?

जीवन की वास्तिविकता को स्वीकार करें या न करें, परन्तु स्तिथि कुछ इस प्रकार है:

सप्रेम अवैवाहिक कामुक सम्बन्ध!   

अप्रेम अवैवाहिक कामुक सम्बन्ध!

सप्रेम वैवाहिक कामुक सम्बन्ध!           

अप्रेम वैवाहिक कामुक सम्बन्ध!

सप्रेम वैवाहिक सामाजिक सम्बन्ध!  

अप्रेम वैवाहिक सामाजिक सम्बन्ध!

सप्रेम विवाहेतर कामुक सम्बन्ध!          

अप्रेम विवाहेतर कामुक सम्बन्ध!

सप्रेम विवाहेतर सामाजिक सम्बन्ध!  

अप्रेम विवाहेतर सामाजिक सम्बन्ध!

मैं न तो विवाह की संस्था पर प्रश्न उठता हूँ, न प्रेम की वास्तविकता पर| परन्तु क्यों प्रेमपूर्ण सम्बन्ध समाज की वयवस्था दम घोंट दिया जाता है|

क्या हमें प्रेम की कद्र करना नहीं आना चाहिए?

यदि विवाह बहुत पवित्र है तो संन्यास का पलायन क्यों है?

यदि संन्यास संसार की पूर्णता है तो स्त्री का त्याग क्यों है? घर छोड़कर भागना क्यों है?

यदि विवाह की संस्था इतनी पवित्र है तो तलाक का बबाल क्यों है?

यदि तलाक, विवाह का कलंक है तो विवाह में कुंठा क्यों है?

प्रेम को जीवन की पूर्णता मानने से हमारा इन्कार क्यों हैं? केवल विवाह को ही प्रेम मानने की हठ क्यों है?

वैश्या का बलात्कार


 

किसी भी पीडिता स्त्री को वैश्या साबित किया जाना, भारतीय न्यायालयों में बलात्कार के आरोप के बचाव के रूप में देखा जाता है| प्रायः स्त्री को चिकित्सकीय जाँच में यह बताया जाता है कि “यह आदतन” है| परन्तु, विवाहिता स्त्री अथवा लम्बे समय से शोषण का शिकार रही स्त्री को यह जाँच क्या बताती है? मैं दो प्रश्नों पर विचार का आग्रह करूँगा|

लेकिन क्या किसी वैश्या से “जबरन यौन सम्बन्ध” बनाना अपराध नहीं हैं? किसी भी वैश्या की सहमति लेना शायद समाज में सबसे आसान होता होगा; परन्तु जो पुरुष यह आसान सी सहमति भी नहीं ले सकते…|

मेरे विचार से यदि किसी भी स्त्री को वैश्या साबित किया जाता है तो आरोपी पर बलात्कार के साथ साथ धन वसूली का मुकदमा भी चलना| उसे साबित करना चाहिए कि उसने धन दिया था और पैसे लेने के बाद भी यह वैश्या पूर्व सहमति से मुकर गई|

मेरी पूरी सहानुभूति उस समाज के साथ है जो उस पुरुष को हेय दृष्टि से नहीं देखता जिसका पुरुषार्थ इतना भी नहीं है कि वह एक वैश्या की सहमति भी हासिल कर सके|

जिस समाज में वैश्या भी अपने को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस करतीं हैं उस समाज में एक घरेलू स्त्री का तो घर से बाहर निकलना ही बहुत असुरक्षित है| क्योंकि वैश्याएँ जितने अच्छे से पुरुष वासना को समझती है उतना और कौन समझता होगा|

समाज को सुरक्षित बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम अंग्रेजों द्वारा लादे गए धर्म और क़ानून को छोड़ें और उस पुराने भारतीय समाज की और लौटें जहाँ वेश्याओं का भी सम्मान और सुरक्षा थी| निश्चित रूप से यौनकर्म का सुरक्षित, नियंत्रित, और नियमित होना सुरक्षित होना, सारे समाज में सुरक्षा का मानदंड है|