आतंकित सरकारें


किसी भी देश में आतंकवाद को बढ़ावा तभी मिल सकता है जब उस देश की सरकारें और उन सरकारों को चुनने वाली जनता डरपोक हो| जब भी हम किसी व्यक्ति या संगठन को आतंकवादी कहते हैं वो उसका सीधा अर्थ है कि हम डरे हुए हैं|

डरना उस कायरता का परिचायक है| कोई भी बहादुर देश किसी व्यक्ति या संगठन को अपराधी या अपराधिक संगठन कहे, तो समझ आता हैं| नियम क़ानून तोड़ने वाला व्यक्ति अपराधी है|कोई भी व्यक्ति एक देश काल में अपराध हो सकता है किसी अन्य देश काल में नहीं| उदाहरण के लिए मानहानि पहले बहुत से देशों में अपराध माना जाता था, परन्तु अब अधिकांश देश इस अपराध नहीं मानते|

जब हम किसी व्यक्ति या संगठन के उचित या अनुचित किसी भी कार्य से डरते हैं और उस डर को स्वीकार करते हैं तो उसे आतंकवादी कहते हैं|हम आतंकवाद का अपनी आतंरिक शक्ति में सामना नहीं कर पाते| यही कारण हैं कि सुदूर यूरोप में हुए बम धमाके हमारे “बहादुर” भारतियों को सोशल मीडिया में सक्रिय कर देते हैं| दूसरी ओर हम अपने देश में होने वाले बलात्कार, हत्याओं, रोज रोज की सड़क दुर्घटनाओं और चिकित्सीय लापरवाही से नहीं डरते| हम किसी सड़क दुर्घटना या दंगों में मारे गए 10 लोग नहीं डराते वरन हम सुदूर देश में किसी बम धमाके से डर जाते हैं|हमें गुजरात, राजस्थान या मुंबई में पत्थर फैंकते और बस जलाते उपद्रवी लड़के आतंकवादी नहीं लगते बल्कि कश्मीर में बम फैंकते लड़के हमारी नींद उड़ा देते हैं|हमारा अपना चुना हुआ डर ही हमें अधिक डराता है|

आतंकवाद दरअसल आतंकवादियों से अधिक उन लोगों का हथियार है जो इससे पैदा होने वाले डर से लाभान्वित होते हैं या डरने में जिन्हें प्रसन्नता मिलती हैं| दुनिया के दर्जन भर देश तबाह करने के बाद भी अमेरिका दुनिया का सबसे आतंकित मुल्क हैं – उसकी डरी हुई बहादुरी आतंकवाद के मुकाबले कहीं इंसानों की हर साल जान ले लेती है| कश्मीर में जितने लोग हर साल कुल मिला कर अपराधी और आतंकवादी घटनाओं में मारे जाते हैं कम से कम उतने लोग राजधानी दिल्ली या मुंबई में अपराधी घटनाओं में मारे जाते हैं| मगर हम नहीं डरते|अपराध और अपराधी हमें नहीं डराते| अपराधों से लड़ने वाले पुलिसवालों को उतना बड़ा मैडल नहीं मिलता जितना किसी कथित आतंकवादी से लड़ने वाले पुलिसवाले को मिलता है|

आतंकवाद की एक खास बात है, दुनिया की कोई भी सरकार आतंकवाद के आगे घुटने नहीं टेकती| आतंकवाद से लड़ने की कसमें खाना दुनिया भर की राजनीति में रोजमर्रा का शगल है| मगर छोटे छोटे अपराधियों और गुंडों के समूह के आगे सरकारें जब तब घुटने टेकती रहती हैं| भारत देश में पिछले सौ सालों में बहुत सी किताबें, नाटक और फ़िल्में सिर्फ इसलिए प्रतिबंधित हो गई कि सरकारों को कानून व्यवस्था के लिए ख़तरा लगा| हम सब जानते हैं यह ख़तरा उन किताबों, नाटकों और फिल्मों से नहीं बल्कि उनका कथित तौर पर विरोध करने वालों से था| सरकारें उनसे लड़ने में असमर्थ थीं और इतनी डरी हुयीं थी कि उन्हें आतंकवादी या अपराधी कहने का भी साहस न जुटा सकीं| उनसे लड़ने की बात तो दूर की बात है, पिछले सौ सालों में बहुत से हलफनामे सरकारों ने अदालत में दिए हैं कि किताबें, नाटक या फ़िल्में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ देंगी – मतलब इतना बिगाड़ देंगी कि सरकार संभाल न पायेगी|

उफ़!! पिछले सौ साल में कोई सरकार हलफनामों में यह न कहने की हिम्मत भी न जुटा सकी कि वो जिनसे डरी हुई है वो किताब, नाटक या फिल्म नहीं गुण्डा तत्व हैं|

 

 

 

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हवाला के चेहरे


छोटे शहरों में जिस तरह घरेलू झगड़े देखने के लिए मजमा लगता है, वैसे ही आजकल हमारे टेलीविजन पर गिरफ्तारियां देखने का मजमा लगता है| ये टेलीविजन वाले अपनी कानूनी समझ में इतने कच्चे होते हैं कि गिरफ़्तारी को ही न्याय का अंतिम सत्य मान कर चौबीस घंटे का उत्सव मना लेते हैं|

पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने एक एयर होस्टेज को हवाला लेनदेन के मामले में हवाई जहाज से उतार कर गिरफ्तार कर लिया| दिन भर मीडिया में इस तरह हल्ला मचा जैसे देश के असली दुश्मन को पकड़ लिया गया हो| चेनलों की हवाला से क्या वास्ता? उन्हें तो एयरहोस्टेज प्रोफेशन के साथ जुड़े ग्लेमर की आड़ में अपनी टीआरपी बढ़ाने से मतलब|

हवाला लेनदेन के मामले में धन को इधर से उधर लाने ले जाने वाले की भूमिका कठिन और मूर्खतापूर्ण होती है| यह लोग माल के मालिक नहीं, हवाला के ढाबे के छोटू नौकर होते हैं| मगर माल के असली मालिक और कर्ताधर्ता कोई और लोग होते हैं|

खैर मामले में कथित तौर पर एक हवाला ऑपरेटर को भी गिरफ्तार क्या गया है| हवाला ऑपरेटर का काम कुछ कुछ रंगरेजों या किसी ढाबे के रसोइये की तरह का है| यह लोग देश का काला धन बाहर देशों की आर्थिक गंगा में दुबकी लगा कर सफ़ेद कर लाते हैं|

हमारा मकसद यहाँ किसी एयर होस्टेज, हवालाकर्मी या हवाला ऑपरेटर का बचाव करने का नहीं| मगर प्रश्न यह उठता है कि आखिर यह हवाला प्रयोग करने वाले महारथी कौन लोग है? यह क्यों नहीं पकड़े जाते|  ख़बरों में कहा गया कि कुछ सर्राफ़ा बाज़ार के लोग हैं| हवाला की गंगा में सर्राफ़ा बाज़ार का महत्त्व गंगोत्री जैसा है| लोग अपना काला धन लाते हैं और उसे यहाँ सुनहरा निवेश बनाकर उन्हें दे दिया जाता है| इसके आगे उस काले धन को देश विदेश की गंगा में दुबकी लगा लगवाकर सफेदी करने का काम हवाला के हिस्से में आता है|

अब हमारे देश में काला धन पैदा करने वालों पर हाथ डालना तो मुश्किल काम है| काले धन वाले क़ानून के इतने पास बैठे हैं कि क़ानून के लम्बे हाथ उनसे आगे निकल जाते हैं और उन्हें पकड़ नहीं पाते| इसीलिए हमारे देश में वित्तमंत्री लोग उनके लिए आम माफ़ी योजना लाते रहते हैं और क़ानून की इज्ज़त बचाते रहते हैं|

मगर कभी सोचा नहीं हमने कि अगर टैक्स चोर न हों तो यह हवाला ऑपरेटर क्या करेंगे? यह टैक्स चोर ही वास्तव में हवाला के असली माईबाप और असली चेहरा हैं|

मोबाइल बैंकिंग और सुरक्षा


मेरा मोबाइल को लेकर रिकॉर्ड काफी ख़राब रहा है| पहला मोबाइल लेने के बाद पहले आठ साल में मुझे आठ मोबाइल खरीदने पड़े| मगर मुझे केवल दो मोबाइल ही सेवानिवृत्त करने का अवसर मिला, शेष मोबाइल किसी न किसी जेबकतरे या उसके ग्राहकों को सेवाएं देते रहे| बाद में बैंकों में मोबाइल पर सुविधाएँ देना शुरू किया और तरह तरह के एप्प बनने लगे| तथाकथित कैशलेस समय में सरकार आपको अनजाने ही सलाह दे रही है कि अपने सारे बैंक खाते अपने मोबाइल की एप्प में डालकर चलो|

मुझे उनके एप्प की सुरक्षा के बारे में कुछ नहीं कहना| पहला तो मुझे तकनीकि जानकारी नहीं| दूसरा अगर असुरक्षित भी हों तो भी उनके बारे में टिपण्णी करकर मैं मानहानि के मुक़दमे को दावत नहीं देना चाहता|

मगर मेरा मोबाइल कितना सुरक्षित है? कोई निवेश सलाहकार सलाह नहीं देता कि अपने सारे निवेश के जगह किये जाएँ तो क्या अपनी सारी जायदाद की चाभी अपने मोबाइल में रख देना उचित है|

मोबाइल का चोरी हो जाना दिल्ली जैसे शहर में इतनी आम बात है दिल्ली पुलिस उसकी उचित चोरी रिपोर्ट भी लिखना उचित नहीं समझती| मोबाइल आपका पुराना मोबाइल बेचने से ज्यादा पैसे कमाएगा या दुरूपयोग करकर?

मोबाइल सिम क्लोंनिंग तकनीकि तौर पर बच्चों का खेल है| मोबाइल सिम आपके मोबाइल की मास्टर चाभी है| मोबाइल सिम क्लोंनिंग के अलावा भी मोबाइल में सेंध लगाने के तरीके मौजूद हैं| बहुत सारे स्पाईवेयर मोजूद हैं, जिनमें से कुछ चाइल्ड प्रोटेक्शन के नाम पर खुले आम मिलते और प्रयोग होते हैं| साथ में मोबाइल मैलवेयर हैं हीं|  पर क्या यह घोषित शत्रु की वास्तविक शत्रु हैं?

हाल में एक छात्र समूह ने अपने एक साथी की बिना इच्छा मोबाइल छीन कर उसके मोबाइल एप्प का प्रयोग एक भोजनालय में कर दिया| लेकिन अगर सोचें तो यह चिंताजनक बात हैं| आपके कोई भी मित्र परिवारीजन आपके मोबाइल से कुछ भी खर्च कर सकते हैं – आपका लाड़ला या लाड़ली भी|

मुझे मोबाइल एप्प का विचार सिरे से ही इसलिए बेकार लगता हैं की यह अत्यंत सरल है| आपको या किसी गलत व्यक्ति की मोबाइल पर इसका प्रयोग करते में समय नहीं लगता| दूसरा किसी भी प्रकार के एकल प्रयोग कुंजीशब्द (OTP) भी उसी मोबाइल पर आते हैं|

मुझे जब भी प्रयोग करना होता हैं मोबाइल पर भी नेटबैंकिंग का प्रयोग करना हूँ| यह सुरक्षित समय लेती हैं और बहुत सारी जानकारी मोबाइल में जमा कर कर नहीं रखती| आपको हर जानकारी खुद से देनी होती है| मैं नेटबैंकिंग के लिए अक्सर ब्राउज़र कि सुरक्षा विंडो (इन्कोग्नितो या इनप्राइवेट विंडो) का प्रयोग करता हूँ| यह आपके सारे डाटा को कम से कम अपने यहाँ सुरक्षित नहीं रखती|