द लास्ट ऑवर


वेब सीरीज़ को हिंसा, गालियों और यौन विकृतियों के नाम पर जाना जाने लगा है| “द लास्ट ऑवर” देखते हुए यह महसूस हुआ कि इसमें गालियाँ नदारद हैं| क्या गालियाँ किसी कृति के मूल्यांकन का तरीका हो सकता है? 

क्रोध, घुटन, अवसाद और बेचारगी गाली के रूप मे बाहर आते हैं| थोपी गई गालियों कथानक और पात्र दोनों को कमजोर करती हैं| कहा जा सकता है कि “द लास्ट ऑवर” पात्रों और संवादों के साथ न सिर्फ न्याय करती है, बल्कि कथानक की मजबूती पर भरोसा करती है| यह कलाकृति क्रोध, घुटन, अवसाद और बेचारगी को दृश्य, अभिनय व अन्य मनोभाव के जरिये दिखाने में सफल रही है|  

इसका कथानक आम हिन्दी हृदय क्षेत्र के बाहर जाने का गम्भीर प्रयास है| कथानक प्रारम्भ से ही जिज्ञासा जगाने में कामयाब हो जाता है| जल्दी ही पात्रों के मनोभाव दर्शा देते हैं कि यह कथा गंभीर दर्शकों के लिए हैं| कथा परिवेश भारत की तथाकथित मुख्यधारा से हटकर है|  कथा विस्तार सोचने के लिए मजबूर करने लगता है कि हम अपने देश के सांस्कृतिक विस्तार को कितना कम जानते हैं| जागरूक दर्शक थोड़ी देर में कथानक और पात्रों के साथ साम्य बिठाने में कामयाब हो जाता है| इस तरह के जोखिम हमें उठाने होंगे यदि हम भारत के सांस्कृतिक विस्तार को समझना समझाना चाहते हैं| परन्तु यह व्यावसायिक चुनौती भी है| कथानक किसी प्रकार के सरलीकरण (टाइपकास्ट) से बचकर चलता है| यह इसकी प्रमुख सफलता है| 

कथानक की खूबी है गंभीरता और गठन| आप किसी भी दृश्य को छोड़कर आगे नहीं बढ़ पाते| कथानक की अंतिम समय तक आपको बहुत से दृश्य और संवाद स्मरण रखने होते हैं – शब्दशः नहीं| अंतिम घड़ी (अंतिम कड़ी के भी) के सभी दृश्य इस सावधानी की मांग करते हैं| यह समझने में प्रायः समय लगता हैं कि कौन से दृश्य अंतिम घड़ी के दृश्य हैं| अंतिम घडी के कुछ दृश्य में निर्देशक दर्शकों की सहायता करने का प्रयास करता है जो मुझे लगता है कि निर्देशक का अपने आपसे और दर्शकों के साथ अन्याय है| कदाचित, यह सहायता अनायास हुई हो| 

मजे की बात है कि बहुत से दर्शकों को अंतिम कड़ी के बाद भी  बहुत से प्रश्न के उत्तर नहीं मिलते| यह कथानक जब भी दर्शक को भटकाता है, उसे दोबारा देखने की दरकार है| अधिकतर प्रश्न के उत्तर दिए गए हैं| यह अलग बात है कि यह सब मौन चलचित्रण है| कोई भी उत्तर संवाद अदायगी के रूप में सामने नहीं आता| यह इस कथानक की कामयाबी है|

पटकथा, निर्देशन और संपादन बेहद चुस्त है| अभिनय बढ़िया है| जाने माने नामों से हटकर भी अभिनय अच्छा हुआ है| कई बार लगता है कि कुछ मनोभाव पात्रों के साथ चस्पा हो गए हैं| हिंसा बेहद काम है, दो एक दृश्य में हिंसा सम्बन्धी मनोभाव उतने गंभीर नहीं बने हैं जितना यह कथानक गंभीर है| 

कुल मिला कर यह देखने लायक वेब सीरीज है| इसे दो या तीन बार भी देखा जा सकता है, हर बार नयापन महसूस होता है| 

मुझे इसका अंग्रेजी नामकरण समझ नहीं आया| पूरी कृति में कहीं भी इस अंग्रेजी शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है| पूरा कथानक आख़िरी घड़ी के आगे पीछे घूमता है| आधुनिक हिंदी कला बाज़ार में अंग्रेजी नामकरण नासूर की तरह बिखर गए हैं| 

शायद में यह बताना भूल गया कि यह सीरीज पराभौतिक सनसनी है| 

कृपया, अपने बहुमूल्य विचार यहाँ अवश्य लिखें...

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