ऊँचे कंक्रीट

कंक्रीट की ऊँचाई अनंत आकाश की ऊँचाई के समक्ष वामनकद होती है| अहसास कराती है – हे मानव! अभी तुम बौने हो| ऊँचे कंक्रीट, हरे भरे जीवंत जंगल की तरह स्व-स्फूर्त नहीं उग आते हैं| इनकी रचना नहीं की जाती, निर्माण होता हैं| रचनात्मकता की कमी पर्याय है इनका| कंक्रीट में प्राण-प्रतिष्ठा नहीं होती, कंक्रीट मुर्दा बना रहता है| ऊँचे कंक्रीट में बने घर जीवंत जाते हैं मगर कंक्रीट निर्लिप्त बना रहता है, किसी उदासीन पठार की तरह|

ऊँचे कंक्रीट जीवन के फैलाव और जीवन्तता के विस्तार से दूर होते हैं| कच्ची झोंपड़ी की जीवटता कंक्रीट में नहीं होती| ऊँचे कंक्रीट गर्व और गौरव की ऊँचाई का प्रतीक होते हैं, यह गर्व और गौरव घमंड की बानगी रखता है फलदार पेड़ों की तरह विनम्रता की नहीं इनमें|

कई बार लगता है इन ऊँचे कंक्रीट के निर्माता जिस तरह इनके आस पास लैंडस्केपिंग करते हैं, उस तरह इन पर भी वालस्केपिंग करते तो शायद यह जीवंत हो उठते|

मगर ऊँचे कंक्रीट घमंडी होते है, कलाकृति नहीं| काश, इन्हें निर्माता नहीं कलाकार सृजते|

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