देहरादून शताब्दी

रेलगाड़ियाँ घुमक्कड़ों की पहली पसंद हुआ करतीं हैं| मितव्ययता, समय-प्रबंधन, सुरक्षा और आराम, का सही संतुलन रेलगाड़ियाँ प्रदान करतीं हैं| अगर यात्रा दिन की है तो भारतीय रेलगाड़ियों में शताब्दी गाड़ियाँ बेहतर मानीं जा सकतीं हैं| नई दिल्ली देहरादून शताब्दी मुझे कई कारणों से पसंद है| यह आने और जाने दोनों बार सही समय पर पहाड़ों और वादियों में होती है| यह डीजल इंजन से चलने वाली महत्वपूर्ण गाड़ियों में से एक है|

अगर आप जाड़ों की सुबह नई दिल्ली देहरादून शताब्दी में बैठे हैं तो आपको पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लहलहाते सरसों के पीले खेत में उगते हुए सूर्य के दर्शन होते हैं| बड़े बड़े हरे भरे खेत यहाँ की विशेषता हैं| वैसे जब दिल्ली में कड़ाके की ठण्ड हो तो आप हाथ को हाथ ने सुझाई दे, ऐसे घने कोहरे का आनंद भी के सकते हैं| जाड़ों में यह रेलगाड़ी आपको पहाड़ों की रानी मसूरी के बर्फ भरे पहाड़ों तक पहुँचने का माध्यम हो सकती है|

यह ट्रेन गन्ने के खेतों, गुड़ बनाने के लघु-उद्योगिक इकाइयों, बड़ी चीनी मीलों के पास से गुजरती है| कई बार आप इस गंध का आनंद लेते हैं तो कभी कभी आपको यह बहुत अच्छी नहीं लगती|

आते जाते देहरादून शताब्दी इंजन के दिशा परिवर्तन के लिए सहारनपुर में आधे घंटे रूकती है| मुझे यह आकर्षक लगता है| बच्चे इसे देखकर रेलगाड़ियों के बारे में बहुत कुछ समझ बूझते हैं और पहुत प्रश्न करते हैं| बहुत सी ट्रेन अपने इंजन की दिशा परिवर्तन के लिए रुकतीं हैं परन्तु यह कम लम्बी गाड़ी हैं इसलिए बच्चे इंजन का निकलना और लगना दोनों देखने चाव से कर सकते हैं| साथ ही प्लेटफ़ॉर्म पर भीड़ भी कम होती है|

इसके बाद यह ट्रेन एक भारत के महत्वपूर्ण शैक्षिक शहर रूड़की और महत्वपूर्ण धार्मिक शहर हरिद्वार में रूकती है| हरिद्वार से गुजरते हुए यह थोड़े समय के लिए आपको धार्मिक बना देती है| इस रेलगाड़ी की अधिकतर सवारियां हरिद्वार से चढ़ती उतरतीं हैं|

हरिद्वार के बाद यह गाड़ी राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (राजाजी नेशनल पार्क) से होकर गुजरती है| यहाँ इसकी गति अपेक्षागत धीमी रहती है| यह एक बाघ आरक्षित (टाइगर रिज़र्व) क्षेत्र है| रेलगाड़ी में बैठकर बाघ और अन्य जंगली जानवर देखना तो मुश्किल है, मगर आप यहाँ प्राकृतिक सौन्दर्य को निहार सकते हैं| शाम को जब रेलगाड़ी देहरादून से नई दिल्ली के लिए लौटती है तब यहाँ का सौन्दर्य देखते बनता है| इस रेलगाड़ी में लौटते हुए हरिद्वार से पहले का यह समय बहुत शांत होता हैं| यह उचित समय हैं, जब सूर्यास्त के समय आप शांत रहकर खिड़की के बाहर मोहक सौंदर्य का आनंद लेते हैं| कई बार लगता है खिड़कियाँ छोटी पड़तीं हैं|राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से गुजरते हुए यह गाड़ी एकल ट्रैक होती है, अर्थात आने -जाने के लिए एक ही ट्रैक से गाड़ियाँ गुजरतीं हैं| कुछेक स्थान पर पहाड़ काटने से बनी दीवार आपकी खिड़की से  हाथ भर ही दूर होती है| बहरहाल, दूसरी रेल लाइन का काम चल रहा है|

मार्च के पहले सप्ताह की शाम, देहरादून से लौटते हुए जब मैं अपने दोनों ओर संध्याकालीन सौंदर्य को निहार रहा हूँ, अधिकांश यात्री देहरादून और मसूरी की अपनी थकान उतारना चाहते हैं| मैं शांतिपूर्वक चाय की चुस्कियों के साथ सुरमई शाम का आनंद लेता हूँ| हरि के द्वार पहुँचने से पहले प्रकृति के मायावी सौन्दर्य का आनंद अलौकिक है|