मोबाइल बैंकिंग और सुरक्षा


मेरा मोबाइल को लेकर रिकॉर्ड काफी ख़राब रहा है| पहला मोबाइल लेने के बाद पहले आठ साल में मुझे आठ मोबाइल खरीदने पड़े| मगर मुझे केवल दो मोबाइल ही सेवानिवृत्त करने का अवसर मिला, शेष मोबाइल किसी न किसी जेबकतरे या उसके ग्राहकों को सेवाएं देते रहे| बाद में बैंकों में मोबाइल पर सुविधाएँ देना शुरू किया और तरह तरह के एप्प बनने लगे| तथाकथित कैशलेस समय में सरकार आपको अनजाने ही सलाह दे रही है कि अपने सारे बैंक खाते अपने मोबाइल की एप्प में डालकर चलो|

मुझे उनके एप्प की सुरक्षा के बारे में कुछ नहीं कहना| पहला तो मुझे तकनीकि जानकारी नहीं| दूसरा अगर असुरक्षित भी हों तो भी उनके बारे में टिपण्णी करकर मैं मानहानि के मुक़दमे को दावत नहीं देना चाहता|

मगर मेरा मोबाइल कितना सुरक्षित है? कोई निवेश सलाहकार सलाह नहीं देता कि अपने सारे निवेश के जगह किये जाएँ तो क्या अपनी सारी जायदाद की चाभी अपने मोबाइल में रख देना उचित है|

मोबाइल का चोरी हो जाना दिल्ली जैसे शहर में इतनी आम बात है दिल्ली पुलिस उसकी उचित चोरी रिपोर्ट भी लिखना उचित नहीं समझती| मोबाइल आपका पुराना मोबाइल बेचने से ज्यादा पैसे कमाएगा या दुरूपयोग करकर?

मोबाइल सिम क्लोंनिंग तकनीकि तौर पर बच्चों का खेल है| मोबाइल सिम आपके मोबाइल की मास्टर चाभी है| मोबाइल सिम क्लोंनिंग के अलावा भी मोबाइल में सेंध लगाने के तरीके मौजूद हैं| बहुत सारे स्पाईवेयर मोजूद हैं, जिनमें से कुछ चाइल्ड प्रोटेक्शन के नाम पर खुले आम मिलते और प्रयोग होते हैं| साथ में मोबाइल मैलवेयर हैं हीं|  पर क्या यह घोषित शत्रु की वास्तविक शत्रु हैं?

हाल में एक छात्र समूह ने अपने एक साथी की बिना इच्छा मोबाइल छीन कर उसके मोबाइल एप्प का प्रयोग एक भोजनालय में कर दिया| लेकिन अगर सोचें तो यह चिंताजनक बात हैं| आपके कोई भी मित्र परिवारीजन आपके मोबाइल से कुछ भी खर्च कर सकते हैं – आपका लाड़ला या लाड़ली भी|

मुझे मोबाइल एप्प का विचार सिरे से ही इसलिए बेकार लगता हैं की यह अत्यंत सरल है| आपको या किसी गलत व्यक्ति की मोबाइल पर इसका प्रयोग करते में समय नहीं लगता| दूसरा किसी भी प्रकार के एकल प्रयोग कुंजीशब्द (OTP) भी उसी मोबाइल पर आते हैं|

मुझे जब भी प्रयोग करना होता हैं मोबाइल पर भी नेटबैंकिंग का प्रयोग करना हूँ| यह सुरक्षित समय लेती हैं और बहुत सारी जानकारी मोबाइल में जमा कर कर नहीं रखती| आपको हर जानकारी खुद से देनी होती है| मैं नेटबैंकिंग के लिए अक्सर ब्राउज़र कि सुरक्षा विंडो (इन्कोग्नितो या इनप्राइवेट विंडो) का प्रयोग करता हूँ| यह आपके सारे डाटा को कम से कम अपने यहाँ सुरक्षित नहीं रखती|

बुढ़ापा एप्स


यह पोस्ट लिखते समय मुझे इस बारे में बताने में यह रूचि नहीं है कि 24 जनवरी को ओबेरॉय होटल में नोकिया इंडीब्लोगर्स मीट के दौरान हमने क्या हो – हल्ला किया| मेरा घर इस होटल से बहुत दूर नहीं है और मैं पैदल ही लौट रहा था| घर के पास ही काफी वरिष्ठ जोड़ा दिखाई दिया| उनकी आपसी बातचीत और चिंता सुनकर मैंने उनसे बातचीत की|

कहीं से भी लौटते में देर हो जाती है लो डर लगता है; डरतें हैं कि दुनियां से ही न लौट जाएँ| पहले तो रास्ते में कुछ हो जाये तो किस को खबर दें; पता नहीं खबर देने लायक भी रहेंगे या नहीं| बेटी कनाडा में और बेटा बंगलौर में|

रात को घर में घुसते समय बाहर लाइट्स जलाने के लिए भी दिक्कत होती है| मोबाइल को रौशनी से देख कर ही ताला खोलते हैं| फिर कई बार अँधेरे घर में घुसते में भी डर लगता है|

लाइट्स जली हुई भी छोड़कर नहीं जा सकते| पड़ोसी क्या, चोर उचक्कों को भी पता चल जाता है कि घर खाली है| हाँ! दो दिन लाइट्स न जलें तो भी पता चाल जाता है| ऐसा रिमोट भी तो नहीं है कि बंगलोर में बैठ कर दिल्ली में लाइट्स जल जाएँ, बंद हो जाएँ| मजाक मत करो मोबाइल या ऍसऍमऍस से कैसे लाइट्स जल सकतीं हैं|

अच्छा तो हमारी दवा खाने का टाइम भी मोबाइल याद दिला सकता है क्या? हाँ! एक बार तो फीड करने का काम तुम जैसे किसी बच्चे से करा ही लेंगे, बेटा|

कितना अच्छा हो जाएँ अगर हमारा मोबाइल सड़क पर चलते समय रास्ते के कंकड़ पत्थर गड्ढे पानी सबका भी बताता चले| और सड़क पार करना, तो बस भूल ही जाओ बेटा| बुढ़ापे में हमें तो कम ही दिखता है, मगर बाकी लोग तो बस| सबको जल्दी है अपने काम की|

मोबाइल पर तो नंबर दबाने में भी हाथ को संभाल कर चलाना पड़ता है| वर्ना लिखते हैं बीटा, लिख जाता है नेता| ये सब तुम जो सपना दिखा रहे हो वो किसी काम का नहीं है, अगर हमारे काँपते हाथ और टूटी आवाज पर ही सब कुछ नहीं हो पाया तो| ये मोबाइल कुछ भी करने से पहले एक बार पूछ तो लेगा न बेटा?

बुढ़ापा बीमारी है या नहीं बेटा; मगर कोई सुध नहीं लेता हमारी; यह दुःख जरूर हमें बीमार बना देता हैं| खैर तुम्हारा भला करे| बातें तो तुम अच्छी कर लेते हो|