ॐकारेश्वर – ममलेश्वर


मध्यप्रदेश का खंडवा जिला पवित्र नदी नर्मदा का विशिष्ट कृपापात्र है| नर्मदा किनारे ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी जिले में पड़ता है| हनुमंतिया से लौटते हुए अचानक ॐकारेश्वर में स्तिथ मध्यप्रदेश पर्यटन के नर्मदा रिसोर्ट में रुकने का कार्यक्रम बना| नर्मदा रिसोर्ट के प्रभारी श्री नितिन कटारे हमें तुरंत ही साग्रह ॐकारेश्वर मंदिर ले गए| शयन आरती शुरू हो चुकी थी| हमारे पूरे प्रयास के बाद भी हमें आरती देखने को नहीं मिली, आरती जरूर ले पाए| आरती करना, आरती देखना और आरती लेना तीनों एक ही मूल घटना के अलग अलग परिणाम है जो पल भर की देरी के कारण बदल जाते हैं| जब हम पहुंचे तब आरती का अंतिम पद गाया जा रहा था| जिस समय हम यहाँ पहुंचे तब शयन आरती हो चुकी थी|

भगवान् शिव उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से यहाँ रात्रि विश्राम के लिए पधार चुके थे| उनका शयनकक्ष तैयार था| उनके बैठने और सोने के स्थान पर चौपड़ बिछी हुई थी, जिससे भगवान् सोने से पहले परिवार के साथ क्रीड़ा का आनंद ले सकें| सुबह ब्रह्ममुहूर्त में भगवान् पुनः प्रस्थान कर जायेंगे| सृष्टि चलाना विकट कार्य है| मैं मन ही मन भगवान् की अनुपस्तिथि पुनः में आने का वचन देता हूँ| आरती लेने के बाद मस्तक पर चन्दन का त्रिपुण्ड धारण कर कर वापिस हो लेता हूँ|

पर्यटन निगम के प्रयास से मुख्य पुरोहित ने हमसे वार्तालाप किया| ॐकारेश्वर मंदिर वास्तव में नर्मदा नदी के बीच मान्धाता नाम के द्वीप पर स्तिथ है| इस द्वीप पर राजा मान्धाता और उनके पुत्रों द्वारा तपस्या की कथा मिलती है| उनकी तपस्या के कारण भगवान् शिव यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट हुए|

भोजन के बाद मध्यरात्रि तक हम उस शांत नगर में भ्रमण करते रहे| प्रातः मैं पुनः ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन करता हूँ| भगवान् के प्रस्थान के बाद सूना सूना सा है| लगता नहीं कुछ विशेष है| लोग उसी प्रकार पूजा अर्पण कर रहे है जैसे किसी सामान्य मंदिर में होती प्रतीत होती है| अब ममलेश्वर जाना है| ममलेश्वर मुख्यभूमि पर है| बिना ममलेश्वर दर्शन ॐकारेश्वर दर्शन पूरे नहीं होते| यह प्राचीन मंदिर है| कुछ लोगों की मान्यता है कि यह मूल ज्योतिर्लिंग है तो अन्य के अनुसार दोनों ही मूल हैं| इसका प्राचीन स्थापत्य मुझे अन्य ज्योतिर्लिंग मंदिरों का स्मरण दिलाता है| पण्डे – पंडितों का दक्षिणा के लिए संपर्क करते हैं| तभी मुझे एक तख़्त पर हजार के लगभग मिट्टी के छोटे छोटे शिवलिंग दिखते हैं| मैं उनमें से एक पंडित को बुलाकर उनकी कथा पूछता हूँ| यह कथा सुनाने के बीस रूपये से उनकी बोनी तो हो गई मगर उसके मुख पर बेरोजगारी की चिंता बरकरार है|

हमें अब इंदौर के लिए निकलना है|

 

हनुवंतिया पुकारे आजा…


मध्य प्रदेश में जल – पर्यटन? जी हाँ, इंदिरा सागर बांध सुना है न| उसी में सौ से अधिक द्वीप और टापू उभर आये हैं| हनुवंतिया से टापुओं का यह सिलसिला शुरू होता है| हनुवंतिया टापू नहीं है, यह तीन ओर से नर्मदा के बांधे गए जल से घिरा हुआ है| मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम इसको विकसित करने के क्रम में दूसरा जल-महोत्सव आयोजित कर रहा है –  15 दिसंबर 2016 से एक महीने के लिए|

बारिश के बाद जब बाँध में बहुत अच्छा पानी आ जाता है और गर्मियों तक बना रहता है, तब मध्यप्रदेश में जल – पर्यटन का सही समय है| मध्यप्रदेश में कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठण्ड भी नहीं पड़ती| नर्मदा का पवित्र स्वच्छ जल और प्राकृतिक संसार, आपको लुभाते हैं| आस पास सघन वन, वन्य – जीव, रंग – बिरंगे पक्षी माहौल को रमणीय बना देते हैं| जीवन की आपाधापी से दूर आपको क्या चाहिए – तनाव मुक्त नीलाभ संसार|

हनुवंतिया में क्रुज, मोटर बोट के बाद अब हाउस बोट भी शुरू हो रहीं हैं| जल – क्रीड़ा, साहसिक खेल, आइलैंड कैम्पिंग, हॉट एयर बलून, पेरा सेलिंग, पेरा स्पोर्ट्स, पेरा मोटर्स, स्टार गेजिंग, वाटर स्कीइंग, जेट स्कीइंग, वाटर जार्बिंग, बर्मा ब्रिज, बर्ड वाचिंग, ट्रैकिंग, ट्रीजर हंट, नाईट कैम्पिंग आदि  बहुत कुछ शामिल है|

इंदिरा सागर बांध 950 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा बड़ा है| इस लिए यहाँ पर्यटन के क्षेत्र में विकास और निवेश की अपार संभावनाएं है| सरकार निजी क्षेत्र को यहाँ पर्यटन विकास के लिए प्रेरित कर रही है| जल्दी ही बहुत से रिसोर्ट, हाउसबोट आदि यहाँ आने की सम्भावना हैं|

खंडवा रेलवे स्टेशन से हनुवंतिया 50 किलोमीटर है और इन्दोर हवाई अड्डे से यह 150 किलोमीटर है| मध्य प्रदेश का हरा भरा निमाड़ क्षेत्र (इंदौर के आसपास का क्षेत्र) अपनी संस्कृति और विविधता के लिए जाना जाता है| विन्ध्य पर्वत माला की सतपुड़ा पहाड़ियां, नर्मदा और ताप्ति नदियाँ, ॐकारेश्वर का मंदिर और भीलों की मीठी निमाड़ी बोली निमाड़ की पहचान हैं| मध्य प्रदेश के इसी निमाड़ क्षेत्र में है खंडवा| खंडवा से याद आते हैं – फिल्म अभिनेता अशोक कुमार, किशोर कुमार, अनूप कुमार| हिंदी की प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कविता “पुष्प की अभिलाषा” भी पंडित माखन लाल चतुर्वेदी द्वारा यहीं खंडवा में लिखी गई थी|

नीलाभ जल वाला हनुवंतिया आपको बुला रहा है|

 

मध्य प्रदेश में पर्यटन संभावनाएं


मध्य प्रदेश हाल के वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में सबसे अधिक विकास करने वाले राज्यों में बना हुआ है| हाल में संम्पन्न सिंहस्थ महाकुम्भ के अलावा भी मध्य प्रदेश में पर्यटन के लिए जाने वालों की संख्या बढ़ी है| मध्य प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए बहुत से प्रयास किये जा रहे हैं| जिनमें से एक २७ मई २०१६ को दिल्ली में आयोजित रोड शो भी है, जिसे मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की असिस्टंट मैनेजिंग डायरेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल की उपस्तिथि में आयोजित किया गया|

मध्य प्रदेश को हाल में ६ राष्ट्रीय पर्यटन पुरुस्कार मिले हैं और अभी भी पर्यटन विकास की अपर संभावनाएं हैं| मुझे उनमें से कुछ की चर्चा यहाँ करनी चाहिए:

  • ९ राष्ट्रीय उद्यान:
  • २५ वन्यजीव अभ्यारण्य:
  • ३ उनेस्को विश्व विरासत स्थल: खजुराहो, भीमबेटका, साँची;
  • जलक्षेत्र: इन्द्रासागर, बंसागर, तवा,
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: खजुराहो नृत्य महोत्सव, मालवा उत्सव, तानसेन उत्सव, अल्लाउद्दीन संगीत उत्सव;
  • २ ज्योतिलिंग: महाकालेश्वर, ओमकारेश्वर;
  • २ मुग़ल वास्तुशिल्प: भोपाल, बुरहानपुर;
  • वस्त्रशिल्प: बाघप्रिंट, चंदेरी और महेश्वर साड़ियाँ;
  • १ ब्रॉड गेज रेल रेस्टोरेंट (भोपाल –एक्सप्रेस) – विश्व में एकमात्र;
  • कारवां टूरिज्म – हॉलिडे ऑन व्हील;
  • जल महोत्सव – हनुवान्तिया (जल्दी ही – बरगी, चोरल, भेडाघाट संभावित)
  • फोटोग्राफी पर्यटन – बंसागर, गाँधी सागर आदि
  • बुद्धिस्ट सर्किट, हेरिटेज सर्किट, (स्वदेश दर्शन – भारत सरकार) नर्मदा – दर्शन;
  • प्रकाश – ध्वनि कार्यक्रम – ग्वालियर, ओरछा, खजुराहो, इंदौर, उज्जैन,

इस सब के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन संबंधी निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्टाम्प ड्यूटी, लक्ज़री टैक्स, आदि में छूट दे रहा है| मांडू, खजुराहो, ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर, ओरछा, बुरहानपुर के किये अलग से मार्केटिंग योजना बनाई गई है| अब पर्यटन टोल फ्री १८०० – २३३ – ७७७७ से सरलता से सलाह ले सकते हैं| यात्रियों की सुविधा के लिए प्रमुख मार्गों पर हर ४० – ५० किलोमीटर पर सुविधाओं का विकास किया जा रहा है| प्रदेश में २२ होम स्टे शुरू हुए है और अन्य लोगों के जुड़ने की सम्भावना है|