मार के टक्कर, रफूचक्कर


 

“मार के टक्कर, रफूचक्कर” सुनने में जरूर एक सामान्य सा जुमला है, परन्तु यह इस दुर्घटना के शिकार और उसके परिवार के लिए एक बड़ा दर्द है|

सड़क कानून के जानकार यह सलाह हमेशा देते रहते है कि किसी भी दुर्घटना में गलती करने वाले वाहन की पंजीकरण संख्या (Registration Number) जल्दी से कहीं लिख ली जानी चाहिए| ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि इससे हमें मोटर वाहन दुर्घटना वाद न्यायाधिकरण (Motor Vehicle Accident Claim Tribunal) में अपनी बात ले जाने में काफी सरलता रहती है| हम न्यायाधिकरण को बता पाते है कि किस वाहन या किन किन वाहनों की गलती से यह दुर्घटना हुई और किन लोंगे के विरुद्ध यह वाद लाया जा रहा है| न्यायाधिकरण सम्बंधित वाहन की बीमाकर्ता कंपनी को राहत राशि देने का आदेश दे पायेगा|

अब यदि किसी वाद कर्ता पीड़ित को सम्बंधित वाहन का पंजीकरण संख्या नहीं मालूम हो तब क्या होगा| ऐसा प्रायः तभी होता है, जब सम्बंधित वाहन ““मार के टक्कर, रफूचक्कर” हो गया हो|  इस परिस्थिति में क़ानून पीड़ित व्यक्ति को बेसहारा नहीं छोड़ देता बल्कि पूरी सहायता करता है|

पीड़ित व्यक्ति या उसका प्रतिनिधि उप-क्षेत्राधिकारी या तहसीलदार को निर्धारित प्रपत्र पर इस सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दे सकता है| यह अधिकारी इस मामले की पूरी जाँच करेगा| इस जाँच में पुलिस में दायर की गई प्रथम सूचना रपट तथा चिकत्सीय जाँच रपट को ध्यान में रखा जाएगा| जाँच अधिकारी अपनी रपट जिला न्यायाधिकारी (डीएम)  जोकि claim settlement commissioner कहलाता है, को देगा| न्याधिकारी के आदेश पर सरकार पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा राशि का भुगतान करेगी| यह मुआवजा राशि सभी सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा जमा कराई गई धनराशि से बनाए गए हर्जाना (क्षतिपूर्ति) फंड से दी जाती है| इस प्रावधान में मृत्यु की स्तिथि में पच्चीस हजार रुपये और गंभीर चोट लगने पर साढ़े बारह हजार रुपये का प्रावधान है| इस मुआवजे के लिए क्षतिपूर्ति योजना १९८९ के खंड २० (१) के अंतर्गत आवेदन करना होता है|

 

गरीबी रेखा की समाप्ति


प्रिय जनसेवक महोदय,

 

विभिन्न समाचार माध्यमों से समाचार माध्यमो से समाचार मिल रहा है कि आपको मष्तिष्क का कोई बेहद संक्रामक रोग हो गया है| अतः आपने इस देश से गरीबी जैसे कलंक का नाम निशान मिटा देने का संकल्प लिया है| अति प्रसन्नता हुई| इस देश में आजतक किसी भी स्वस्थ्य व्यक्ति ने यह साहस नहीं दिखाया है, यह सदा ही खेद का विषय रहा है|

 

अभी आपने गरीबी रेखा को दैनिक खर्च की नई “उचाईयों” से जोड़ दिया है| आपने अतुल्य साहस का परिचय देकर, नगर क्षेत्रों में गरीब कहलाने के लिए खर्च की समय सीमा कानूनन ३२ रूपए और गाँव देहात में २६ रुपये निर्धारित कर दी है| अभी तक विश्व बैंक वाली गन्दी मानसिकता वाले लोग इसे २ अमरीकी डालर बता रहे थे| इस तरह वो भारत को बदनाम करना चाहते थे| इस नई व्यवस्था से आपने एक कलम हिलाकर करोड़ो घटिया लोगों की गरीबी खत्म कर दी| सही है, कलम में तलवार से भी बड़ी ताकत है|

मैं जानता हूँ कि यह छोटे मुँह बड़ी बात होगी, परन्तु मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि इस गरीबी रेखा जैसी निहायत ही गन्दी चीज को खत्म कर दीजिए और देश को गरीबी से मुक्ति दिला दीजिए|

 

एक और विनम्र निवेदन है, थोड़ा सा कष्ट जरूर होगा परन्तु आप या आपका कोई सम्मानित प्रतिनिधि किसी सार्वजनिक स्थान पर आकर हमें यह प्रस्तुतिकरण दे कि किस प्रकार देश की अबोध जनता इस जादुई धनराशि में अपना पेट भर सकती है| मेरा प्रस्ताव यह कि आप दिल्ली के रामलीला मैदान या मुंबई के आजाद मैदान में आयें, महीने भर सबके सामने रहें, जनता आपको ३१०० रूपये (१०० रूपये प्रतिदिन) चन्दा कर कर दे, उस जमा धन से आप महीने भर पेट भर मौज करें| इस पुनीत प्रदर्शन से जनता का अवश्य मार्गदर्शन होगा|

 

आशा है कि देश की तुच्छ जनता शीघ्र ही ३२ रूपये में पेट भरना सीख जायेगी|

धन्यवाद सहित,

ऐश्वर्य मोहन गहराना