Unlikely Tails – Mani Padma

These short stories are really short if your counts words. Well crafted stories do not have a useless display of words. Mani Padma seems to have relatively good vocabulary among contemporary young fiction writers. In a solo collection of short stories, not more than half of these stories satisfy your literary bud. In this collection, I simply satisfied with all stories. Stories are not unusual but written very well.

When writers these focus no marketable stuff and drop literal value, Mani Padma is successful to save literal values. He crafted stories with a simple formula. These are our neighbourhood stories, routine life, but with a good reflection of events and human nature. Stories are being narrated across the table. Their tone and flows are smooth, slow and simple.

Against my earlier presumption, there is no short story in this collection with title “unlikely tails”. After careful reading these stories, I find a smooth twist in the chain of events which usually unpredictable before the last paragraph. These stories do not force you to sit and read in one sitting, do not increase your heart beats after each paragraph, do not increase your curiosity top of your mind, and do not force you to have hot coffee turned cold. No, nothing, stories simply take a smooth turn which you feel unlikely at first sight of reading. These unlikely turns are so smooth, you think twice each time if this is most logical tails of the story. I believe, yes these are.

These stories touch human relationship mostly from the angle of a common girl. Unlikely tails have women protagonist but without pushing fashionable feminism forward. You never feel any hardcore urge for and against any character. Naturally, messages if any there, delivered smoothly in our conscience.

These stories exhibit sharp focus of vision towards day to day events. Take the first story “Prince Charming”, until protagonist point of the observation, you do not note the point and once your note, you agree simply. As a rare instance, writing of the second story may be closed before last few words – explanatory statement by the protagonist. The story may have more impact, though most readers may not notice.

“Pummi’s Escort Service” reveals upon the biased and dirty mind of the middle-class male. “Date with future” is a cute comment upon relationships in the era of reality shows. “Breakfast” looks into the personal relationship of a ‘family’ woman. When one read “Dead – end”, you have silence suddenly after the inner violence of your own thought. “Dull-iance” is a story which comments upon female minds and deviates slightly from the pattern. I do not find in this collection a story which may be called average.

Manipadma is from Assam, now based in Delhi. No story is from Assam in this collection. It may be a conscious attempt to save her from regional writer tag. These stories are based in and around Northern India – the Hindi belt. Same time, no story is really from the medical background.

Mani Padma has good potential to be a good fiction writer. Her style of writing is suitable for short stories not for novels. “Unlikely Tails” is her solo debut.

Unlikely Tails (PostScript) – If you think, there are 17 stories as it seems, you are not the good reader. Though back cover, as well as index, read 17 stories, these are actually 18 stories. I presume it is the delebrate attempt. You need to find out how these are actually 18. [Hint is hidden in index itself]

Title: Unlikely Tails
Authors: Mani Padma
Publisher: Creative Crow Publishers LLP
Publishing year: 201
Genre: Fiction – Short Stories
ISBN:  938-84901-60-1
Binding: Hardbound
Number of Pages: 125
Price: Rs. 650/-

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नीम का पेड़

नीम का पेड़ पढ़ते हुए आपको हिन्दुस्तान की उस राजनीति दांव –पेंच देखने को मिलते हैं, जो आजादी के बाद पैदा हुई| हमारी हिन्दुस्तानी सियासत कोई शतरंज की बिसात नहीं है कि आप मोहरों की अपनी कोई बंधी बंधी औकात हो| यहाँ तो प्यादे का व़जीर होना लाजमी है| व़जीर की तो कहते हैं औकात ही नहीं होती, केवल कीमत होती है| यूँ नीम का पेड़ सियासत और वजारत की कहानी नहीं होनी चाहिए थी, मगर हिन्दुस्तानी, खासकर गंगा- जमुनी दो-आब के पानी रंग ही कुछ ऐसा है सियासत की तो सुबह लोग दातून करते हैं| ऐसे में नीम के पेड़ की क्या बिसात, ये तो उस लोगों का कसूर है जो आते जाते उसे नीचे बतकही करते रहे होंगे| वर्ना तो जिस आँगन में उसने अपनी तमाम उम्र गुज़ारी वहां गुजरा तो गुजरा कुछ होगा|

नीम का पेड़ इस उपन्यास में शायद अकेला ऐसा शख्स है, जो आज के ज़माने में नहीं पहचाना जा सकता| रही मासूम रज़ा की यहीं मासूमियत रही कि उन्होंने एक पेड़ को सूत्रधार होने का मौका दिया| यहीं काम अगर उस कलई के उस पुराने लोटे बुधई के आंगन में पड़ा रहा करता होगा, तो आप पहचान जाते कि ये कौन है| उस लोटे और उसकी घिसी हुई पैंदी का जिक्र न करकर रज़ा साहब ने इस देश की सियासत के पालतू टट्टुओं के साथ न इंसाफी कर दी है| आदर्शवादी लोगों से अक्सर ऐसी गलतियाँ हो जातीं हैं|

ये कहानी उन दो पुराने रिश्तेदारों की है, जिनको जमींदारी के बैठे ठाले दिनों में सियासत खेलने का चस्का लगा होगा| जमींदारी जाती रही| जमींदारों और नबाबों को लगा कि बदल कर ओहदों का नाम बदलकर विधायकी और सांसदी में तब्दील हो गया है| हुआ दरअसल यूँ उलट कि विधायकी और सांसदी जमींदारी और नबाबी बन गई| बदलते वक़्त के साथ, नए प्यादे आते गए, वजारत बदलती रहीं और व़जीर बिकते रहे|

नीम के पेड़ की कहानी इतनी सरल है कि आप गौर भी नहीं करते कि सियासत में दांव खेल कौन रहा है| कहानी बदलते हिंदुस्तान की जमीन से उठती है| यह कहानी इन वादों का इशारा करती है जिनके बूते वोट खींच लिए जाते है| यह कहानी उस आदर्शवाद जिसके जीतने की हम उम्मीद करते हैं|

पुस्तक – नीम का पेड़

लेखक – राही मासूम रज़ा

प्रकाशक – राजकमल प्रकाशन

प्रकाशन वर्ष – 2003

विधा – उपन्यास

इस्ब्न – 978-81-267-0861-1

पृष्ठ संख्या – 350

मूल्य – 350 रुपये

अकबर

अकबर का दौर अजीब हालत का दौर था| एक बदहवास सा मुल्क सकूं की तरफ बढ़ता है| अपनी लम्बी पारी से भी और बहुत लम्बी पारी खेलने की चाह में अबुल मुज़फ्फर जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर बादशाह ने अपनी हालत कुछ अजीब ही कर ली थी| यह उपन्यास उस “हालत –ए – अजीब” से शुरू होता है, जिसमें बादशाह सलामत कह उठे थे – “गाइ है सु हिंदू खावो और मुसलमान सूअर खावो|” यह वो शब्द है जिनको मूँह से निकलने पर तब और आज सिर्फ जुबां नहीं, सिर कट सकते हैं, और तख़्त बदल उठते हैं| यह वो बादशाह अकबर है, जिन्हें न सिर्फ पूर्व जन्म में शंकराचार्य के श्रेष्ठ ब्राह्मण कुल में जन्मे मुकुंद ब्राह्मण का अवतार बताया गया बल्कि जो खुद “अल्लाहो अकबर” को नए अर्थ देने की कोशिश में पाया गया| यह वो अकबर बादशाह है जो बाद में “दीन – ए- इलाही” की शुरुआत करता है और छोड़ सा देता है| वह बादशाह अकबर जो, “जैसे जिए वैसे मरे| ना किसी को पता किस दीन में जिए, ना किसी को पता किस दीन में मरे|”

यूँ; पुस्तक को पढ़ने और पसंद करने के बाद भी इसकी विधा के बारे में सोचना पड़ता है | हालांकि लेखक प्रकाशक इसे उपन्यास कहते हैं| मैं इसे ऐतिहासिक विवरण कहूँगा| हम सबको पढ़ना चाहिए| हिंदी में ऐतिहासिक उपन्यास बहुत है| शाज़ी ज़मां का “अकबर” इतिहास का पुनर्लेख है जिसे औपन्यासिकता प्रदान करने का कठिन प्रयास लेखक ने किया है| वो कुछ हद तक सफल होते होते असफल हो जाते हैं| असफल इसलिए कि आप पाठक इस से ऊब जाता है| तमाम प्रसंगों में सन्दर्भों की भरमार है| बकौल शाज़ी ज़मां, “इस उपन्यास की एक-एक घटना, एक-एक किरदार, एक-एक संवाद इतिहास पर आधारित है|”

समय, सनक और समझ से जूझते अकबर बादशाह की टक्कर पर हिंदुस्तान में डेढ़ हजार साल पहले सम्राट अशोक का जिक्र आता है| इन दो से बेहतर नाम महाकाव्यों में ही मिल सकते हैं| अकबर की जिन्दगी के ऊँचे नीचे पहलू इस विवरण में आए है जिनमें से एक को, इस पुस्तक को बाजार में बेचने के लिए भी उछाला गया था – अकबर के मूंह से निकली एक गाली जिसे तमाम हिंदुस्तान आज भी देता है| पुस्तक अकबर को उसके समकालीन लेखकों और इतिहासकारों के नज़रिए से हमारे सामने रखती है| अकबर के समकालीन इतिहास की जानने समझने के लिए यह महत्वपूर्ण विवरण प्रदान करती है| साथ है, हिंदुस्तान का अपना माहौल आज भी कुछ ज्यादा नहीं बदला है इसे समझा जा सकता है|

यह विवरण उपन्यास तो नहीं बन पाया है साथ ही उन महत्वपूर्ण बातों से नज़र चुराता सा निकल गया है जिन्हें इसके पत्रकार – इतिहासकार लेखक छु सकते थे| मसलन अकबर के हिंदुस्तान का फ़ारस, तुर्की, पुर्तगाल और पोप के साथ रिश्ता तो चर्चा में आता है; मगर उन हालत के बारे में टीस छोड़ जाता है जो तुर्की और इस्लाम के यूरोप और ईसाइयत से रिश्ते की वजह से पैदा हुए थे और नतीजतन हिंदुस्तान और दुनिया की तारीफ में बहुत उठापटक हुई| अकबर के जाने के बाद का दौर, धर्मतंत्र और राजतन्त्र के कमजोर होने का दौर भी था जिसने बाद में संविधानों और राष्ट्रों के लिए रास्ता खोल दिया था|

कुल मिला कर किस्सा यह शेख़ अबुल फ़ज़ल के अकबरनामा और मुल्ला अब्दुल क़ादिर बदायूंनी के ख़ुफ़िया मुन्तखबुत्तावारीख के इर्द गिर्द बुना गया है और इसमें तमाम लेखकों और इतिहासकारों की लिखत को रंगतभरे खुशबूदार मसालों के साथ परोसा गया है|

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पुस्तक – अकबर

लेखक – शाज़ी ज़मां

प्रकाशक – राजकमल प्रकाशन

प्रकाशन वर्ष – 2016

विधा – उपन्यास

इस्ब्न – 978-81-267-2953-1

पृष्ठ संख्या – 350

मूल्य – 350 रुपये

 

6 Degrees – Game of Blogs

Name of 5 characters are same. Descriptions of these 5 characters are same. They are characters of 3 different stories, not written by 3 different fiction writers but by 3 different teams of bloggers. Location of these stories is one – Mumbai. Is it case of plagiarism? Oh no! All this is in one book, yes one book.

“6 Degrees – Game of Blogs” is a collection of 3 fictions written by three teams and have 3 different dimension of fiction writing. All three stories have suspense and thrill. Each story has about 30,000 words spanning more than 120 pages.

Bloggers participated in a blogging event called “Game of Blogs” organised by BlogAdda. Descriptions of Five character and a few other details were shared. The bloggers were put into teams of 8-10, and each team must come up with a story. 10 days to come up with 10 episodes. The best teams move forward to the next round. 3 rounds of this game of blogs were not a simple fun but a hard competition. 300 bloggers from 30 locations participated. One this is most common – the collaborative spirit. After 3 rounds, 3 teams emerged as winners and those stories were published into a book – 6 Degrees – Game of Blogs.

The Awakening

This is a science fiction where mythology is used to carry fiction forward. This makes approach different but lovable mix of myths, science, family, and thrill – for we Indians. A closely knit family of three was living a happy life in Mumbai. Two guests appear from nowhere. Page by page new mysteries reveals themselves. Humanity came into danger and need urgent intervention from some sort of superpower.  Though, readers assume the climax well before, how events turn up is real fun.

Entangled Lives

This is a murder mystery with lot of drama and doubts.  A loosely knit happy family of three with one maid suddenly face murder in the house in presence of two strangers. No one knows the criminal. Police investigations legally ended up with a confession which creates doubt in mind of investigating officer. But, mystery never solved legally. This is strongly built and best story in the book.

Missing – a journey within

A daughter of happy family goes missing. A son of another happy family leaved the hope and home. Fortune bring them to same point of time and place to make them friend. This story has well knitted stories of different characters.

This book is a nice collection of collaborative spirit of creative minds to develop same idea into different direction into well knitted, well crafted, well-developed, well written, well-edited, well presented fictions. Language is easy English with few local terms from Mumbai and Delhi. Stories has good and steady pace with required melodrama and suspense.

Book Details

Title: 6 Degrees – Game of Blogs
Authors: 3 teams of bloggers
Publisher: Leadstart Publishing, Mumbai
Publishing year: 2016
Genre: Fiction – Science Fiction, Murder Mystery, Thriller,
ISBN: 978-93-5201-389-0
Binding: paperback
Number of Pages: 422
Price: Rs. 349

Team of Bloggers:

The Awakening – Team by lines

Anmol Rawat – http://anmolrawat.blogspot.in
Preethi Venugopal – http://tulipsandme.blogspot.in
Saumyaa Verma – http://callitate.blogspot.in
Tina Basu – http://twinklingtinawrites.blogspot.in
Ashutosh Bhandari – http://aybeescorner.blogspot.in
Paresh Godhwani – http://pareshgodhwani.blogspot.in
Prerna Maynil – http://prernamaynil.blogspot.in
Ramanathan P – http://allthreeaces.com

Entangled Lives – Team Potliwale Baba

Shoumik De – http://thesolutionbaba.wordpress.com
Srilakshni I – http://iamstri.wordpress.com
Sneha Bhattacharjee – http://snehabhattacharjee.blogspot.in
Hemant – http://shoooonya.blogspot.in
Shamim Rizwana – http://livelaughlovewithsharu.wordpress.com
Nirav Thakkaer – http://niravthakker.com
Tushar – http://tusharmangl.blogspot.in
Ritu Pandey – http://altruisticgirt.wordpress.com

Missing – A Journey within – Team Tete – a – Ten

Sharon D Souza – http://thekeybunch.com
Oindrila De – http://notallmoonshine.blogspotin
Anupriya Mishra – http://anupriyamishra.com
Vaisakhi Mishra – http://thewordpool.blogspot.in
Tinu Menachary – http://someolfnewstuff.blogspot.in
Gauri Kamath – http://survivaloftheoptimist.blogspot.in
Ritesh Agrawal – http://abookisasexything.com
Aayan Banarjee – http://gyanban.com
Raghu Chaitanya – http://ummwowhuh.blogspot.in

6 Degrees is India’s first book published through collaborative blogging, written completely by bloggers for the Game of Blogs activity at BlogAdda. Know more about Game of Blogs here. You can buy 6 Degrees: Game of Blogs if you liked the review.

The Bestseller She Wrote

A story written with difference has usual but well crafted plot of ambition, love, like and mistake. I decided to drop this book once, at its cover… “soon to be a motion picture”, motion pictures is one of my dislike in literature. But, a master storyteller certainly knows how much is how much. The story with appropriate pace and words arrested my mind and heart for the weekend. Love, prejudice, betrayal, strength, and ultimate winning of great family values seem to be time-tested concept of Indian masala movies. A reading reveals the author kept in mind possibility for a movie and focused in that way on play, pace and dialogue. One good thing, characters speaks themselves not the writer.

It engaged me with real life characters, but… at point to point it connects and disconnects with big names until I realize, it talk about none… a fiction. However, reference of real persons, events and sequence make book interesting and give a real feel to reader.  Author has firsthand knowledge of IIM, Banking, Writing and Publishing, it well reflects in the book.

This is story of an extremely successful author who is doing a mistake. She is equally competent young aspiring promising but more ambitious.  The story, about relationship, has element of romance, drama and light dose of mystery.

The book has small chapters. Earlier chapters it look like a love and romance but slightly light mystery take shape. Readers seem to know, what may be in background and want to confirm. Interestingly, It happen with perfect pace. When Mystery unfold, it suddenly turn into usual drama and more than just before end, you seems to lost interest as story has some more pages.

This book may also be a utility for younger generation of aspiring storytellers. It unfolds many aspects of writing, publishing, publicity and of course book launch. Book  publishing part may  be read as a case study for budding writers and others interested in career in publishing industry.

Author did best when it kept the mistake a mistake without any usual justification. However, author seems to typecast the background the girl; either to give some sympathy or justification. However, all this information may be more dramatic. At the end, when mystery unfold, it lost second relationship somewhere in deep-sea, a story which may be also be equally crafted. I am hopeful, in motion picture we may have more to know. Authors and film – makers may keep some mystery for future ventures.

Author

Ravi Subramanian, an alumnus of IIM Banglore, naturally crafts stories on backdrop of financial services industry. He has Golden Quill Reader’s Choice Award for If God Was a Banker, Economist Crossword Book Award in 2012 for The Incredible Banker and the Crossword Book Award in 2013 for The Bankster.

Book name: The Bestseller She Wrote

Author: Ravi Subramanian

Total number of pages: 391

Cost: Rs 295

Binding: Paperback

Genre: Fiction

Language: English

ISBN No: 978-93-85152-38-2

Published By: Westland Ltd.

I am reviewing ‘The Bestseller She Wrote’ by Ravi Subramanian as a part of the biggest Book Review Program for Indian Bloggers. Participate now to get free books!