चिकुनगुनिया की रात


गुनिया की माई के चिकुन और गुनिया,

बचपन की सोनचिरैया जैसा चिकुनगुनिया,

बढ़ई की गुनिया सा चिकना चिकुनगुनिया|

तेरे प्यार की टूटन की तरह टूटता तन बदन,

पोर पोर से दर्द – दर्द से रिसता हुआ गगन,

मेरे अंतर उतरती प्यार की पहली पहली चुभन,

हौले हौले चुभती तेरी साँसों की बहकी पवन|

 

गुनिया की माई के चिकुन और गुनिया,

बचपन की सोनचिरैया जैसा चिकुनगुनिया,

बढ़ई की गुनिया सा चिकना चिकुनगुनिया|

तंदूर की तलहटी में भुनता तंदूरी चिकन,

छिटक छिटक जाता चरमराता अंतर्मन,

इश्क़ की कड़ाही के जलते तेल में तलते

आखिरी उम्मीद का चढ़ता इश्क़न बुखार|

 

गुनिया की माई के चिकुन और गुनिया,

बचपन की सोनचिरैया जैसा चिकुनगुनिया,

बढ़ई की गुनिया सा चिकना चिकुनगुनिया|

चौपड़ की बिसात पर शकुनि का पासा,

धृतराष्ट्र की धूर्तसभा में विदुर की भाषा,

अंधे भीष्म का जोशीला सांस्कृतिक प्रलाप,

अस्पताल में दम तोडती मरीज की मुनिया|

 

गुनिया की माई के चिकुन और गुनिया,

बचपन की सोनचिरैया जैसा चिकुनगुनिया,

बढ़ई की गुनिया सा चिकना चिकुनगुनिया|

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