देशी नाश्ता


आज कहाँ नाश्ता होता है| एक वक़्त था जब हम सुबह का नाश्ता और शाम का नाश्ता दोनों करते थे| किसी परिचित, अपरिचित और सदा – उपस्तिथ को बिना “चाय” – नाश्ता वापस नहीं जाने दिया जाता था| नाश्ता उत्तर भारतीय जनमानस के दैनिक जन जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना होती है| अगर किसी घर में जाकर आपको चाय – नाश्ता न मिले तो लोग उस घर में आर्थिक और सामाजिक स्टार के अनुसार उसे असभ्य, घमंडी, असामाजिक, गरीब, खस्ताहाल, गंवार, और ऐसा ही कुछ कहते थे| कई भारतीय शहरों में अगर आप किसी के घर जाएं और मेजबान को यह वक्त न दें कि वो आपको नाश्ता करा सके तो आपकी हाजिरी नहीं लगाई जाती है| कई बार मिलने का समय लेते हुए कहते है “बहुत कम देर के लिए आ पाएंगे, नाश्ते का समय नहीं दे पाएंगे, अभी से माफ़ कर दीजियेगा”| अगर यह जरूरी सभ्यता न दिखाई जाए तो आपके शिष्टाचार पर प्रश्न लगना लाजमी है|

यहाँ दिल्ली जैसे महानगरों में तो चाय – नाश्ता का मतलब चाय ही होता है मगर बाकी भारत में “चाय” की जगह पानी, शरबत, दूध, छाछ, लस्सी, कॉफ़ी, आदि आदि पेय हो सकते हैं मगर नाश्ता, हमेशा नाश्ता ही होता है|  आजकल नाश्ता भारी भरकर होने लगा है जैसे परांठा, पूरी, कचौरी, सेंडविच आदि| यह सब ब्रेकफास्ट तो हो सकता है कि जल्दी जल्दी किया और काम पर निकल पड़े; राम जाने दिनभर एक निवाला नसीब हो न हो|

देशी भारतीय नाश्ता हमेशा “चना – चबैना” ही रहा है| देशी नाश्ता जब मन करे तब किया जा सकता है| भुना चना, मूंगफली, भुनी मटर, मक्का के फूले, मुरमुरा, खील, कौमरी, और न जाने क्या क्या| आज भी आप इलाहाबाद की किसी भी सड़क पर इसका एकदम ताजा लुफ्त उठा सकते है| और घरों में तो यह अमूमन रहता ही है| यह देशी नाश्ता वसामुक्त (नो-फैट) होता है साथ ही प्रोटीन और फाइबर से पूरी तरह से भरा हुआ| यानि सोलह आना देशी ताकत, पूरी तंदरुस्ती| फिर भी अफ़सोस है कि हम अपने देश की इन अच्छी बातों को भूलते रहे है|

आज भूमंडलीकरण (ग्लोबलाइजेशन) का दौर है| देशी विदेशी कंपनी जब देश में आ रहीं है तो अपने देश की ख़राब और अच्छी बातें अगर ला रहीं है तो हमारे देश की भी भूली बिसरी ख़राब और अच्छी बातें अपना भी रहीं हैं| एक साम्य उत्पन्न हो रहा है| अभी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का फेसबुकिया परिचय पढ़ रहा था:

More than 100 years ago, W.K. Kellogg saw the promise in a single grain. Standing true to this promise, Kellogg brings you ‘Anaaj ka Nashta’ made from the choicest Indian wheat, corn and rice for a breakfast that is as Indian as you are.

यह परिचय अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है| जब में इस पेज को देख रहा था तो पाया कि कई तरह के प्रयोग, कुछ नए कुछ पुराने, आजकल खाने को लेकर हो रहे हैं| एक प्रयोग देख कर तुक गया, जिसने मुझे लाई के लड्डू, मुरमुरे के लड्डू, और ऐसे ही कई पुराने भारतीय नाश्तों का स्मरण करा दिया|

इसे नाम दिया गया है “मूवी वाला नाश्ता: कॉर्नफ्लेक्स पॉपकॉर्न क्लस्टर”, शायद उन्हें पता है कि युवा भारत आजकल मूवी देखते समय ही इस तरह के प्रयोग कर पाता है| इसमें कॉर्नफ्लेक्स, पॉपकॉर्न, मेवा – मखाने, शक्कर, मख्खन, शहद, आदि का प्रयोग है| इसे हम शायद कहीं घूमते, टहलते हुए भी खा सकते है| अगर आपको देखकर और सुनकर ही खाने का लुफ्त उठाना है तो यह स्थान भी अच्छा है|