जूते 03/09/201624/04/2017 / Aishwarya Mohan Gahrana / एक टिप्पणी छोड़ें मेरे पिता उस दौर में जन्में थे, जब (उनके हिसाब से) जूते की पालिश की चमक आपके भाग्य की चमक को दर्शाती थी। पापा जब भी चमकदार जूता देखते, खरीद लेते। मगर बाद में उन्हें पोलिश करने का समय नहीं निकाल पाते। यह बात नीचे दी फेसबुक पोस्ट की वजह से याद आई| मित्रों को बताएं Share on WhatsApp (नए विंडो में खुलता है) WhatsApp Share on Telegram (नए विंडो में खुलता है) Telegram Tweetअधिक छापें (नए विंडो में खुलता है) Print Email a link to a friend (नए विंडो में खुलता है) Email PocketShare on Tumblr Share on Reddit (नए विंडो में खुलता है) Reddit पसंद करें लोड हो रहा है...