गाजर का हलवा


अगर आप पकवान विधियाँ पढ़ने के शौक़ीन हैं तो गाजर का हलवा सबसे सरल पकवानों में से एक हैं| अधिकतर विधियाँ कद्दूकस की गई गाजर में मावा (खोया) और चीनी मिलकर आंच पर चढ़ाने की सामान्य प्रक्रिया से शुरू होती हैं और मेवा मखाने की सजावट पर ख़त्म हो जाती हैं| मेरे जैसे स्वाद लोभी लोगों के लिए यह विधियाँ कूड़ा – करकट से आगे नहीं बढ़ पातीं|

गाजर का हलवा बनाना जितना सरल है, गाजर का अच्छा हलवा बनाना उतना कठिन और समय लेने वाला काम है| कोई भी हलवा बनाने समय यह ध्यान रखने की बात है कि हलवा मूँह में जितना जल्दी घुल जाए उतना बढ़िया| दूसरा हलवा चबाने में कम से कम श्रम की आवश्यकता हो| गाजर हलवे का लक्ष्य यह हो कि न दांत को चबाने में कष्ट हो न आंत को पचाने का कष्ट हो, स्वाद और ताकत पूरी आये|

गाजर का हलवा अधिकतर सस्ती गाजर के इन्तजार में टलते रहने वाला काम है| गाजर के हलवे के लिए अधिकतर पकाऊ और मोटी गाजर का प्रयोग किया जाता है| मगर इससे हलवे के स्वाद में कमी आती है| कच्ची मीठी ताजा गाजरें सबसे बेहतर हलवा तैयार करती हैं|

दूसरा, खोये का प्रयोग हो सके तो न करें| दूध का प्रयोग दो तरह से फ़ायदेमंद हैं| पहला आपको खोये की गुणवत्ता पर कोई संदेह नहीं करना पड़ेगा| दूसरा, यह दूध गाजर के साथ उबलने में गाजर के कण कण में जाकर उसे बेहतरीन स्वाद प्रदान करेगा|

गाजर को अलग से उबालना भी उसके स्वाद को कमतर करता है| गाजर को हमेशा दूध के साथ ही उबालें| अगर खोये का प्रयोग कर रहे हैं तो खोये के साथ उबालें| खोया अगर लेना है तो कोशिश करने की कम से कम थोडा बहुत दूध गाजर के साध प्रारंभ से ही डालकर चलें| खोया या मावा, केवल आपके समय की बचत करता हैं| इससे स्वाद में कमी ही आती है, कोई बढ़ोतरी नहीं होती|

एक किलो गाजर के साथ दो किलो दूध अगर लेकर चलते हैं तो बेहतर है| जिन्हें खोया डालना है वह एक किलो दूध के लिए २५० ग्राम खोया के सकते हैं| हो सके तो शुद्ध समृद्ध दूध का प्रयोग करें| आधे अधूरे दूध के प्रयोग से आधा अधूरा स्वाद ही आना है| यही बात खोया की गुणवत्ता पर भी लागू होती है|

किसी भी भोज्य या पकवान के बारे में एक बात पूरी तरह तय है| आप उसे जल्दीबाजी में नहीं बना सकते| अगर आप प्रेशर कुकर में हलवा बनाना चाहते है, तो उस तरह के स्वाद के लिए तैयार रहे| माइक्रोवेब ओवन में बने हलवा का अलग स्वाद होगा| मैं यह नहीं कहता कि यह स्वाद अच्छे नहीं है| मगर हर पकवान का अपना एक शास्त्रीय स्वाद होता है| उस शास्त्रीय स्वाद की अपनी अलग ही बात होती है|

गाजर के हलवे का आनंद कढ़ाई में धीमी धीमी आँच पर इसे बनने देने में है| ठण्डा मौसम और धीमी आंच बेहतरीन गाजर हलवा का सब से पुख्ता वादा है| सही आंच का कोई भौतिक मापदंड नहीं हो सकता क्योंकि जाड़े के मौसम का तापमान और रसोई में हवा का उचित बहाव भी इसमें अपना योगदान रखता है| आँच इतनी धीमी हो कि गाजर या दूध कढ़ाई के तले से न लग जाए| किसी भी तरह का जलना या जलने की गंध जैसा कुछ न हो| साथ ही यह आँच इतनी तेज भी हो कि पर्याप्त मात्रा में वाष्पीकरण होता रहे| बेहतर है कि आप हर दस पांच मिनिट में करछल को कढ़ाई के तले तक इधर से उधर चला लें| सामिग्री की उलटते पलटते रहें| साथ थी साथ आंच को अपने मन के हिसाब से हल्का या बहुत हल्का करते रहें – बोरियत नहीं होगी|

चीनी या मीठा डालने का भी अपना समय और मात्रा है| चीनी अगर अपने पसंदीदा स्वाद से हल्का सा कम रखेंगे तो हलवे का शानदार स्वाद ले पायेंगे| वरना हम सब लोग, रोज ही किसी न किसी मिठाई में चीनी का स्वाद लेते ही रहते हैं| कहना यह कि हलवे का स्वाद बना रहे, चीनी का स्वाद उस के सर पर न चढ़ जाए| मैं आजकल सफ़ेद चीनी के मुकाबले भूरी चीनी लेना पसंद करता हूँ| इसका स्वाद हलवे में चार चाँद लगा देता हैं|

कई बार हम हलवा पूरी तरह पकने का इन्तजार करते हैं फिर मीठा डालते हैं| इससे हलवा में मीठा स्वाद आने की जगह हलवे के चाशनी में पग जाने का स्वाद आने लगता है| हलवे के रस के पूरी तरह सूखने से ठीक ठाक पहले मीठा डाल दें| अधिक पहले मीठा डालने में स्वाद पर अधिक अंतर भले ही न आये, करछल चलाने में श्रम थोड़ा अधिक हो जाता है| अतः ऐसा न करें| हर पकवान और रिश्ते को पकने का उचित समय चाहिए होता है|

इलायची और अन्य मेवा अधपके हलवे में डालने से अधिक स्वाद और खुशबू पैदा करते हैं| हो सके हल्की भुनी इलायची का प्रयोग करें| मेवे हल्के हल्के तले हुए हों| किशमिश न डालें – अगर जबरदस्ती डालें तो कंधारी किशमिश का स्वाद ठीक रहेगा|

बहुत बार हम मेवे को अपनी और अपने हलवे की समृद्धि के दृष्टिकोण से डालते हैं| मेवा हलवे के स्वाद में कोई वास्तविक वृद्धि नहीं करता| मेवा वाला हलवा हमें मानसिक संतुष्टि देता है – स्वादेंद्रिय की संतुष्टि नहीं| मेवा मखाने का यह स्वाद हम अलग से भी ले सकते हैं|

गाजर का हलवा हो या कोई अन्य पकवान बार बार गरम होने से उसका स्वाद बदलता रहता है| बार बार गर्म होने से पकवान अपना बेहतरीन स्वाद खो देते हैं| गाजर का हलवा अगर बढ़िया बना है तो ठंडा भी बहुत बढ़िया लगता है|

एक प्रश्न बार बार आता है.. गाजर हलवे में घी कौन सा हो? अगर आपने भैंस का शुद्ध सम्पूर्ण प्राकृतिक दूध प्रयोग किया है तो इस प्रश्न का कोई अर्थ नहीं| अन्य स्तिथि में गाजर हलवे को आँच से उतारते समय जी भरकर देशी घी का तड़का लगा दें|

साल २०१८ में हमारा हाल


गहराना – विचार वेदना की गहराई की मई २०११ में शुरुआत बहुत सादा और चुपचाप हुई थी| अक्टूबर २०११ आते आते एक पाठक रोजाना का औसत आया और पहली बार सौ पाठक जून २०१२ में मिले मगर जनवरी २०१२ के बाद ही माहवार सैकड़ा पक्का हो पाया| साल २०१५ इस माने में खास था कि ब्लॉग-अड्डा के मुताबिक यह हिंदी के पांच अच्छे ब्लॉग में था| साल २०१६ में पढ़े गए पृष्ठों की संख्या पांच हजार साल को पार कर पाई| मगर एक महीने में हजार के पार पहुँचने पहुँचते मार्च २०१७ आ लगा|

साल २०१८ में लगभग पंद्रह हजार पाठकों ने इसके सत्ताईस हजार पृष्ठों को पढ़ा| इस वर्ष २०१८ में इस ब्लॉग को हिंदी के श्रेष्ठ ब्लॉग में शामिल किया गया|

इनमें से सोलह हजार पृष्ठ भारत और आठ हजार पृष्ठ यूनाइटेड स्टेट्स में पढ़े गए जबकि डेढ़ हजार पृष्ठों के साथ कनाडा तीसरे स्थान पर था| यूनाइटेड किंगडम से पाठकों का न आना समझ से परे है|

अधिकतर पाठक गूगल आदि सर्च इंजन से आते हैं या उन्हें ख़ुद यूआरएल याद है| इस साल कम से कम दो हजार बार इस ब्लॉग को मोबाइल पर पढ़ा गया है| सनद रहे कि शुरुआत से अब तक कुल छियासठ हजार पाठक यह ब्लॉग पढ़ चुके हैं|

यूँ ही बात दूं कि साल २०१८ में लिखी गईं ५० पोस्ट के साथ अब तक कुल ३७६ हो गईं| आप भी आयें कभी हमारे ब्लॉग पर|

चतुर सहायक, सकुशल जीवन


जिन्दगी की रफ़्तार पर दौड़ने के लिए वक़्त से आगे दौड़ना होता है| ज़िन्दगी रोज रफ़्तार बढ़ा देती है| इसी रफ़्तार को पाटने और बढ़ाते जाने की कोशिश का नाम विज्ञान और तकनीक है| इस तकनीक का कुशल प्रयोग करना चतुर होना है, चतुर  होना है|

इंसान के लाखों सालों के इतिहास में कुछ हजार ही हुए हैं पहिया ढूंढे हुए| पिछले हजार साल में इंसान में बैलगाड़ी से लेकर चतुर कार तक का सफ़र तय किया है|

इंसान को अपनी जिन्दगी के थपेड़ों का सामना करने के लिए जिस सच्चे साथी की जरूरत हैं, वह वैज्ञानिक तकनीक ही है| जब गहरी नींद के बाद आँख नहीं खुलती, कलाई में पड़ा हुआ कड़ा हौले हौले आपकी कलाई सहला कर ही जगा आपको देता है| आपकी रात भर की नींद का पूरा खाका आपके सामने है| अपने दिन की योजना करने से पहले आपको अपनी आज की क्षमता और स्वास्थ्य का पता चल चुका है| आपका चतुर  कड़ा आपसे कहता है, आज थोड़ा सा और पैदल चलो मेरे आका|

चतुर पहनावा (Smart Wearable)

आप तैयार होकर ताकत और ऊर्जा से भरा कलेवा करते हैं| अपनी लखटकिया बाइक पर बैठते ही आपका हेलमेट गंतव्य का ट्रेफ़िक मुक्त रास्ता बताने लगता है| आप निश्चित ही सुरक्षित और मित्रवत हेलमेट के साथ है| लम्बे और शांत मार्गों पर अपने इस मित्र से कुछ गाने या कहानी सुनाने की फ़रमाइश भी कर सकते हैं|

दिन भर आप अपने लिए रोजी रोटी, ऐश-ओ-आराम, शान-ओ-शौकत और ढेर सारा अहम कमाने के लिए परिश्रम करते हैं| शाम तक आपका थकना स्वाभाविक है|

शाम को कार्यालय से आप अपना चतुर ऐनक लगा कर निकल लेते हैं| आपका ऐनक आपको राग भैरव में “मोहे भूल गए साँवरिया” सुना कर आपका मन हल्का कर रहा है और आप अपने साहब को “ऐ मालिक तेरे बन्दे हम” गाते गाते कार्यालय से निकल लेते हैं|

चतुर घर  (Smart Home)

घर में घुसते हुए आपको पता लगता है की बच्चों ने धमाचौकड़ी मचा रखी है| आपके बैठक में जलती हई तेज नर्तक रोशनियाँ, आपकी आँखें बहुत दूर से ही चौंधा देती हैं| मगर घर के अन्दर आपका पहला कदम एकदम शानदार हैं| आप पाते हैं कमरे में शांत संगीत हैं, मध्यम रौशनी हैं और आपके कुछ प्यारे प्यारे से दो बच्चे मुस्कुरा रहे हैं| आप खुश होते हैं कि यह कमाल बच्चों का नहीं, आपका है – आपके चतुर  घर का है| आपका कॉफ़ी पीने का मन है और कमरे की रोशनियाँ अपना रंग बदल कर उस रंग में रंग जाती है|

सामने दीवार पर लगा मोनिटर बता रहा है, आपके घर के दरवाजे पर आपका बचपन का वो यार आया है, जिसके साथ बचपन में आपने मंदिर के पिछवाड़े बैठकर पहली बार दारू पी थी| ये पठ्ठा खुद तो दारू पीता नहीं, मगर आपको पीना सिखा गया| आप खुश है, थकान उतर गई है| आप सोफे पर बैठे बैठे ही दरवाजे को खुल जाने का हुक्म दे देते हो| वो अन्दर आकर अपने मोबाइल रिमोट से आपके टेलिविज़न पर सहगल के “ग़म दिए मुस्तकिल” की जगह “देशी दारू इंग्लिश बार” लगा देता है|

बात से बात निकलती है, बातों में वक़्त बदलता है| आप याद करते हैं, जब आप जब भी दिल्ली या कलकत्ता जाते थे तो रास्ता भूल जाते थे| कभी समझ नहीं आता था कितनी रेड लाइट के बाद वो तीसरी रेड लाइट आएगी जिससे तीसरा लेफ्ट कट लेना है| अब हाल ये है कि न रास्ता पूछने की जरूरत, न याद रखने की| आपको हर कदम पर रास्ता बताने वाला मौजूद है| अनजान शहरों में भी आप सिर्फ एक ऐनक के सहारे अपने रस्ते चले जाते हैं| यह रास्ते शायद ही गलत होते हैं| कोई गलती हो तो आप उसे सुधारने में मदद कर सकते हैं|

चतुर रोशनियाँ (smart lights)

अब तो हाल यह की घर के बाहर तो क्या घर में भी तकनीक आपको राह दिखाती है| आपका ख्याल रखती है| अब आपकी जरूरत के हिसाब से घर अपने आप की ढाल लेता है| रंग, रोशनियाँ, गीत, संगीत, फिल्म सब आपके मूड के हिसाब से बदल जाते है| जब आप यह महसूस करते हैं कि आपके मन के हिसाब से आपका घर अपने को ढाल लेता है तो अधिक सकारात्मक महसूस करते हैं| आप के घर में आज टेलिविज़न ही नहीं, और भी उपकरण चतुर  होते जा रहे हैं| इस सब से दैनान्दिक जीवन पहले की अपेक्षा और अधिक सरल होता जा रहा है| यह अलग बात है कि यह तकनीक आज भी बहुत से लोगों की पहुँच से बाहर है|

आपको अपने कैमरे को बार बार निर्देश नहीं देने पड़ते, आपके घरेलू उपकरण अपने काम पहले की अपेक्षा अधिक सरलता से और स्वयं ही कर लेते हैं|

तकनीक से शिकायतें भी हैं| बचपन की बहुत सी शरारतें अब मुश्किल हो गई हैं| आजकल के बच्चों को तो वो मजे भी नहीं कि दोपहर में किसी का दरवाज़ा खटखटा कर छुप जाए और पकड़े न जाएँ| अब तो दरवाजे दरवाजे कैमरा लगा है| अब बच्चे और चोर दोनों ही किसी बुजुर्ग को परेशान नहीं कर सकते|

बातों के साथ आपका मूड बदल जाता है और एक बार फिर आप कमरे की रौशनी का रंग और चमक बदल देते हैं| नाचने का मन भी होना ही चाहिए| आपके दुनिया भर के गानों का संग्रह है| आप अपने पालतू जिन्न को हुक्म देते हैं, पुराने गाने और हल्का पंखा चलाने के लिए| तकनीक की अदृश्य शक्ति आपके हुक्म की तामीर करने के लिए मौजूद है|

आप आज दुनिया के किसी भी कौने से अपने माता पिता के संपर्क में रह सकते हैं| उनकी यादों को अपने पास संजो सकते हैं| बूढ़े माँ-बाप को बार बार न रौशनी जलाने के लिए उठना, न दरवाजा खोलने के लिए| इस तरह की बहुत सी सुविधाएँ हैं| बस इतना है कि वो थोड़ा बहुत हाथ पैर चलाते रहे, आरामतलबी में बिस्तर न पकड़ लें| तो इस सब के लिए भी उनके पास नया कड़ा है तो कलाई में पड़ा पड़ा उनको चेताता रहता है|

आज सबसे जरूरी है किसान का चतुर होना| किसान को कब कहाँ क्या बोना है, कब कितना बोना है. अन्य किसानों की बीज बुआई के हिसाब से दाम की संभावित घट बढ़ का कुछ अंदाजा रहे, कब कहाँ भण्डारण करना है, कब उसे बेचने का फायदा है, क्या लागत क्या दाम, यह सब बताने के लिए चतुर  उपकरण हों| ट्रेक्टर या अन्य उपकरण खेत में स्वचालित तरीके से काम कर पायें| न अधिक खाद पानी लग जाये न अधिक जहर की खेत में फ़ैल पाए, इसका इंतजाम होना चाहिए| चतुर घर से ज्यादा जरूरी है चतुर खेत| खेतों को चतुर बनाने के काम में कोई चालाकी नहीं होनी चाहिए| भोजन ऐसी जरूरत है, जिसका विकप्ल हाल फ़िलहाल नहीं है, इसका ख्याल किया जाना चाहिए|

यह नई तकनीक आराम भी है तो संभावित आलस्य भी| इस बीच चाय आ गई| बात लम्बी चलती रही| और तभी ख़त्म हुई जब टेलिविज़न ने आपका पसंदीदा सॉप ओपेरा चला दिया| टीवी पर जब भी #GetFitWithFlipkart अथवा #SmartHomeRevolution का विज्ञापन आता है आप प्रसन्नता से मुस्करा उठते हैं|