इन्द्रप्रस्थ का राजतिलक


 

बार बार.. हर युग में.. युद्ध होते हैं| अधर्म के सहारे, धर्म युद्ध लड़ें जाते हैं|

प्रत्येक मानव को देवराज इंद्र का आसन चाहिए| निर्विवाद, अपराजेय आसन.. भोग, विलास और अप्सराएं|

इन्द्रासन तक पहुँचने का मार्ग, इन्द्रप्रस्थ होकर जाता है| इन्द्रप्रस्थ का राजमुकुट भी तो स्वर्ण आभासित पुरुस्कार है|

अहा! पुरस्कार के लिए प्रतियोगिताएं रचीं जातीं हैं|

ओह!! प्रतियोगितायें नहीं; युद्ध, गृहयुद्ध, महायुद्ध, धर्मयुद्ध, रचे जाते हैं| युद्ध तो योद्धा का खेल है, जिसे रचा, खेला और लड़ा जाता है|

पल बदलता है, काल बदलता है, युग बदल जाते हैं| प्रतियोगी बदलते हैं, प्रतिभागी बदलते हैं, योद्धा बदल जाते हैं| मानव बदल जाता है…| अरे..!! मानव तो कभी नहीं बदलता… |

अरे भाई! इंद्रप्रस्थ की सत्ता.., प्रजा की प्रसन्नता का संधान नहीं है| ये तो चौसर की बिसात है, चतुरंग का चतुर चक्रव्यूह है|

सत्ता के हर चरण में दाँव पर दाँव लगाये जाते है| चारण, चाटुकार.., मित्र, मंत्री.., माया, मदिरा और मूर्ख सजाये जाते हैं| माता, बहन, पुत्री, पत्नी, स्व – स्त्री, पर – स्त्री, भेंट चढ़ाये जाते हैं|

सत्ता में भाई नहीं होता; पिता, पितामह, पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, नहीं होते| सत्ता के शिखर की सीढियाँ प्राणविहीन नश्वर शरीरों से बनायी जातीं हैं| सत्ता की पताकाएं मृत – आत्माएँ लहरातीं हैं|

नर बलियों से ही तो सत्ता के देव प्रसन्न होते हैं|

सत्ता का सारथि ही योद्धा का एकमात्र मित्र, सखा, भाई, पिता, गुरु, देव, हृदय और आत्मा होता है| उस सारथि का हर कथन, वेद – गीता, गीत – संगीत, स्वर – स्वाहा होता है; उन्ही से तो सत्ता के महाकाव्य रचे, गढ़े, पढ़े, कहे, सुने, समझे जाते हैं|

हाय!! हाय!! आज तो घोर कलियुग है| न राजा, न राजतन्त्र.., न राजगुरु, न राजमाता.., न राजमहल, न रनिवास.., न रानी, न पटरानी.., न राजकवि, न राज दरबार.., न ही राजगायक, न राजनर्तकी|

अहा! हा हा!! राजा कभी नहीं मरा करते| इस भूलोक पर राजा ही तो देव का साक्षात अवतार है| अवतार हर युग में आते हैं| राजा, सम्राट, शहंशाह, सुल्तान, गवर्नर जनरल, लाट साहब, मंत्री, प्रधानमंत्री| असंख्य – अनंत अवतार|

अवतारी पुरुषों का पुरुषार्थ.., अवतारी स्त्रियों की आभा…, बात ही कुछ और है| सत्ता उनकी रखैल रहती है|

दंगे – फसाद, खून – खराबे, गृहयुद्ध – विद्रोह, आतंकवाद – नक्सलवाद, चाकू – बल्लम – भाले, बम – धमाके, वैश्या  – बलात्कार… अरे बस नाम ही तो बदले हैं|

सत्ता के शास्त्र में, त्रेता, द्वापर, कलियुग… सब एक हैं|

उन्माद का शंखनाद है… रुदन का संगीत है|

इन्द्रप्रस्थ के राजतिलक में आज भी नरमुण्ड हैं.. नर बलि है.. नग्न नृत्य है…||

नरमुण्ड हैं.. नर बलि है.. नग्न नृत्य है…||

घर मजदूरी


अभी पिछले दिनों खबर पढ़ी कि एक चाय की दूकान पर काम करने वाले ग्यारह साल के बाल मजदूर को चाय पीने आये दो ग्राहकों ने ठीक से आर्डर न ले पाने करण गोली मार दी|

मुझे अपने बचपन की कुछ बातें याद आ गयीं| उन दिनों हम सिकंदराराऊ के नौरंगाबाद पश्चिमी मोहल्ले में रहते थे| पड़ोस में एक परिवार उन्हीं दिनों रहने आया जिसमे चार पांच छोटी छोटी लड़कियां और साल भर का एक लड़का था| जाड़ों के दिन थे| बच्चों की माताजी सुबह धूप निकलते ही छत पर आ जातीं थीं और दिन ढलने तक वही रहती थीं|

पुरे मोहल्ले में उस जल्लाद माँ का जिक्र होने लगा| दस और बारह साल की दोनों बड़ी लड़कियां बारी से खाना बनती थी| तीसरी आठ लड़की अपने छोटी बहन और भाई को नहलाती धुलाती थी| उसकी छोटी बहन रोज जब भी उसकी माँ का मन होता, पिटती रहती थी| साल भर का राजकुंवर दिन भर माँ की गोद से चिपका रहता था| हमें लगता की ये उन लड़कियों की सौतेली माँ है|

एक दिन, माँ ने उनके घर जाने का निर्णय लिया| उस औरत के पिता जिलाधिकारी कार्यालय में काम करते थे| उसे हाई स्कूल के बाद पढाई बंद करनी पड़ी थी और उसे घर के काम में लगा दिया गया था|

उसके अनुसार पंद्रह साल की उम्र से काम करते करते थक गयी थी और फिर ये “नाश-पीटियाँ” आ गयीं| सारा शरीर बिगाड़ कर रख दिया इन्होने| अब काम करना सीखेगी तो इनका ही तो भला होगा| मुझे क्या, दिनभर इनके बारे में सोच सोच कर ही परेशान रहती हूँ|

ऐसे कितने बच्चे हैं जो अपने घर में अपने ही माँ बाप के शोषण का शिकार होते हैं| लड़कियों को घर का काम करना होता है| लड़कों को ज्यादा लाड प्यार तो शायद मिलता है मगर वो भी अछूते नहीं है अपने घर में काम काज से| बाजार हाट, उठा-धराई|

मगर कब तक?

कुत्ता काटा


कहते है कुत्ते इंसान के सबसे बड़े दोस्त होते है| खासकर उन इंसानों के जिन्हें दूसरे इन्सानों में कम दिलचस्पी होती है या जिन्हें इंसानों से दोस्ती करने में कोई दिक्कत होती है| लोग कुत्ता पलने में बड़ी मेहनत करते हैं|

कुत्ता पालने में एक बड़ी बात यह है कि बड़ा साहब होने का अहसास बना रहता है| कार्यालय में भले ही चपरासी पानी न लाकर देता हो, घर में भले ही बच्चे दुलत्ती झाड़ते हो; कुत्ता बाबू तो दम हिलाते हीं हैं|

रोज कुत्ते को बिस्कुट डालने से आपको एक बंधुआ मजदूर मिलता है जिसे आप अपनी मर्जी से दुलारते और दुत्कारते हैं|

मगर भूल जाते हैं कि उसकी रोटी और बिस्कुट से ऊपर भी कुछ जरूरत हैं|

उसकी चिकित्सकीय जरूरतें|

अभी हाल में मुझे एक पालतू कुत्ते ने काट लिया| कुत्ता अपनी मालकिन से संभाले नहीं संभल रहा था और उसने समझा कि मैं भी उसे सँभालने की कोशिश करने आया हूँ| काट लिया|

कुत्ता स्वामिनी को सांप सूंघ गया, पापा पापा करते हुए घर में घुस गयी और पिताजी अपनी भोली सी सूरत बनाये बाहर आ गए|

कहने लगे आप को इंजेक्शन नहीं लगेंगे, इस कुत्ते को लगेंगे| मैंने पूछा, अभी तक कभी लगवाए हैं कोई इंजेक्शन| भोले भंडारी ने जबाब दिया, कभी टाइम नहीं मिला, इस बार पक्का लगवाएंगे|

खैर, कुछ सहानुभूति रखने वालों की सलाह पर सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन विभाग में पहुँचा| अरे भाई, यहाँ तो कुत्ते काटे का अलग से चिकित्सक विराजमान है| शायद गंभीर मामला है| अरे ये क्या, जैसे ही हमने कहा कि कुत्ते ने काटा है तो उसने बाकी मरीज छोड़ कर हमें देखा|

जब इंजेक्शन का नंबर आया तो पता चला कि कुत्ते काटे वाले अपना अलग अस्तित्व रखते हैं और उनका तो शायद अपना अलग राज्य बन जाए| हर दस मिनिट में एक कुत्ता काटे का मरीज|

सफदरजंग अस्पताल में, रक्षाबंधन वाले दिन सुबह साढ़े नौ बजे कुत्ता काटे का इंजेक्शन लगवाने वाले कम से कम सौ लोग जमा थे और इस से ज्यादा आने वाले थे|

एक बहुत बड़ा वर्ग, पालतू कुत्तों का शिकार बना था| ज्यादातर कुत्ता मालिक, कुत्ते का चिकित्सीय विवरण नहीं देना चाहते थे| शायद कुत्तों का टीकाकरण नहीं कराया गया था| और एक मरीज ने तो कहा कि कुत्ते से ज्यादा कटखना तो कुत्ता मालिक और उसकी पत्नी थे|

सोचने की बात है, नयी दिल्ली महानगर पालिका वाले, सड़क पर घूमते गरीब, बेघर कुत्तों को तो पकड़ कर ले जाते हैं| और पालतू कुत्ते और उनके कटखने मालिक| देश के सारे राहगीर उनके रहमोकरम पर छोड़ दिए जाते हैं|

तुर्रा यह है कि हमारे एक बड़े भाई हैं, कुत्ता प्रेमी भी हैं; कहते हैं: “ कुत्ता काटने से डरने की कोई बात नहीं है, इलाज है उसका|”

हमने कहा, “भाई साहब! डरने की कोई बात नहीं है, आप दुसरे माले से कूद जाओ, हड्डी टूटने का इलाज है|” देखें कब कूदते हैं|

अरे भाई लोगो! अब कितना पढोगे!! अगर घर संसार, गली कूचे में आपने भी कोई कुत्ता पाला हो तो उसका टीकाकरण तो करवा लाओ| और उस काले, पीले और सफ़ेद कुत्ते का भी जिसे आपने कोई रोटी डाली हो या किसी मन्नत के लिए कुछ खिलाया पिलाया हो|