होली २०१४


 

 

रंग हम भारतियों के जीवन में हमेशा ही महत्वपूर्ण होते हैं| रंगीन कपड़े, रंगोली, रंगीन फूल मालाएँ, रंगीन मिजाज नेता सब हमारे जीवन के रंगमंच को इन्द्रधनुषी बनाते हैं| होली तो रंग का त्यौहार है| होली पर आप कोई भी रंग नहीं प्रयोग कर सकते हैं| रंग का चयन न सिर्फ आपकी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है वरन आपके व्यक्तित्व की भी झलक दे सकता है|

हमारे यहाँ होली का चलन है कि आप जिस से जलते हों, चिड़ते हों, जो आप से ज्यादा समझदार हो, जो आप से आगे निकल गया हो, जिस से आप पिछड़ गए हों, जिस के कपड़े आप के कपड़ों से अच्छे हों, जिसका पति आपके पति से ज्यादा सुन्दर हो, जिस की पत्नी आप की पत्नी से ज्यादा चतुर हो, जिस का नया घर हो, जिस के नई राजनीतिक पार्टी हो, जो किसी दल – दल से बाहर हो, और जिसके पास बिना दारू वाले दोस्त हों; उस पर काला रंग लगाया जाये| उस के बाद अपने ही जैसे बौद्धिक, मानसिक, सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक स्तर के कुछ लोगों के साथ.. मुँह काला, मुँह काला का नारा लगाया जाना चाहिए| बाकी लोगों को कर्ण प्रिय लगे इसके लिए बुरा न मानों होली है, होलिका मैया की जय, भारत माता की जय, वंदेमातरम् आदि नारे भी लगाये जा सकते हैं|

गहरे नील रंग का प्रयोग आपके व्यक्तित्व को सुधार सकता है, बशर्ते आप सवर्ण हों| नीला रंग आपको सभी समुदायों को साथ लेकर चलने वाला; अवसर की समझ रखने वाला, आपसी सामाजिक व्यवहार में विश्वास रखने वाला बना सकता है| परन्तु यदि आप गैर सवर्ण जाति से हों तो इस रंग से परहेज करें| इस रंग के प्रयोग से आपको कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा वरन लोग समझेंगे की आप जहाँ के तहाँ ही रह गए हैं|

यदि आप सवर्ण हिन्दू है तो आप हरे रंग का प्रयोग कर सकते है| यह रंग पर्यावरण के प्रति आपके प्रेम का उदगार है| हरे रंग का असर देर तक रहता है| यदि आप इस रंग के लिए मेहँदी या पालक का प्रयोग करें तो आपको अति बुद्धिमान भी समझा जा सकता है| परन्तु चीन देश से रंग आयात करने वाले लोग आपके ऊपर काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं|

मैं मुस्लिम समुदाय को हरे रंग के प्रयोग की सलाह नहीं दूंगा भले ही यह चीन से आयत हुआ हो या घर पर पालक पीस कर बनाया गया हो| इस से अजीब से बू आती है और केसरिया रंग के सांड भड़क सकते है| बल्कि भारतीय मुस्लिम को तो २०१४ के पहले पांच महीने हरी तरकारी जैसे मैथी, पालक, सरसों साग, सेम आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए| आप केसरिया रंग का प्रयोग सावधानीपूर्वक कर सकते है|

सवर्ण हिन्दू होने की स्थिति में आप केसरिया रंग का प्रयोग भली भांति कर सकते है| इस से आपके देश भक्त, समझदार होने का सबूत मिलता है|

दिहाड़ी मजदूर, आदिवासी और गरीब लोग लाल रंग के प्रयोग से बचें| इस रंग के प्रयोग से सांड भड़क सकते हैं| होली के आसपास तो आपको चोट भीं नहीं लगनी चाहिए वरना उसका लाल रंग आपके जीवन के लिए संकट हो सकता है|

आखिरी और महत्वपूर्ण सलाह है| किसी भी स्तिथि में टेसू के रंग का प्रयोग न करें वर्ना कोई भी आपको टेसू समझ सकता है|

होली की चुनावी शुभकामनाएं!!

उलूक उत्सव


 

इस बार का उलूक उत्सव बहुत लम्बा चलेगा| पृथ्वी पर इस तरह के सबसे बड़े समारोह की घोषणा हाल ही में हो गयी| अनोपचारिक रूप से यह उत्सव पिछले दो साल से चल रहा है|

जनता को उल्लू बनाने का यह उत्सव पूरे जोर पर आ गया है| इस उत्सव को, कहते हैं प्राचीन भारत में भी कई स्थानों पर मनाया जाता था| परन्तु हाल में इस उत्सव की शुरुआत समस्त विश्व को उल्लू बना चुके बरतानिया में हुई| उसके बाद इस उत्सव को मनाने का प्रचलन चल पड़ा है| इस उत्सव को न मनाने वालों को असभ्य गंवार जंगली माना जाता है और उन के ऊपर अक्ल के बम्ब गिराए हा सकते हैं| ये बात अलग है कि दुनिया में ऐसे ऐसे मूर्ख भरे पड़े हैं कि अक्ल के आधुनिक बम्ब से भी वो मर जाते हैं पर अक्ल आती नहीं| अफगानिस्तान, लीबिया, मिस्र, इराक़ ऐसे ही भोंदू बक्से हैं|

खैर, हमारे पुरखे उतने बड़े वाले ढक्कन नहीं थे, इसलिए उन्होंने बाकायदा अपनी वसीयत लिख छोड़ी है; हमें कम से कम हर पांच साल बाद ये उत्सव, जश्न जलसा जलूस मनाना होता है| इस तरह से छोटे मोटे उत्सव हमारे देश में कहीं न कहीं चलते रहते हैं|

इस उत्सव में दो कुछ समझदार लोग बाकी बचे लोगों को उल्लू बनाते हैं| बाकायदा उल्लू पत्र छापे जाते हैं; जगह जगह उल्लू सभाएं होती हैं| इस सभाओं को समय अनुसार रंगा सियार सभा, गीदड़ भबकी सभा, मगरमछी आंसू सभा, लोमड़ी चाल सभा, कुत्ता पूँछ सभा भी कहा जाता हैं| कई बार लोगों लो इन सभाओं में आने, बुलाने और बहलाने के लिए पैसे, खाना, शराब, कबाब और शबाब का इंतजाम किया जाता है| कई बार इन लोगों इस मनोरंजन में आने ले लिए टिकट भी खरीदना पड़ता है जिसका पैसा बड़ा मालिक पहले से बाँट दिया करता है|

कुछ लोग तो पैदायशी उल्लू होते है, उन्हें कार्यकर्ता कहा जाता है| जो लोग अपनी मर्जी से उल्लू बनते है उन्हें वालेंटियर कहा जाता है| इन लोगों के ऊपर सबसे ज्यादा लफड़ा रहता है| इन्हें लाठी, कुर्सी, चाकू, छुरा चलाने का भी काम रहता है| जब यह अस्पताल जाते है तो इनके घर वाले दिवाली मानते है और मर जाते है तो दीवाला| शहीदों में इनका नाम विश्वयुद्ध में मरने खपने वालों से भी ऊपर लिखा जाता है और बाद में मिटा दिया जाता है|

जो सबसे ज्यादा लोगों को उल्लू बनता है, उसको इस बात का हक़ मिलता है कि अपने इलाके के हर जाहिल गंवार जंगली के ऊपर राज करे| इन लोगों की मेहनत ऐसे ही खत्म नहीं होती बल्कि पांच साल तक देश का बेड़ा गर्क करने में इनका जूता भी दर्द कर जाता है|

आप उनके जूते की चिंता न करें| वर्ना वो आपकी चमड़ी उधार मांग ले जायेंगे|

 

अनगढ़ दाढ़ी और भेदभावी पूर्वधारणाएँ


1इतनी बुरी तरह से जन मानस में घर कर चुकीं हैं कि जब तक खुद उसका शिकार नहीं होते, हमें इस भेदभाव का बोध नहीं होता|

अभी हाल में मैंने अपने शौक के लिए दाढ़ी बढ़ाने का निर्णय लिया| अब मेरी नई नवेली अनगढ़ दाढ़ी को भी बन ने संवरने की जरूरत होती है| इस से पहले कि कैंची अपना काम करती, मैंने सोशल मीडिया 2पर एक फोटो डाल दिया| उस पर आई टिप्पणियाँ हमारे समाज के पूर्वधारणाएं खुलकर सामने रखतीं हैं|

इन टिप्पणियों की मानें तो अनगढ़ दाढ़ी में आप खतरनाक अपराधी, गैंगस्टर, आतंकवादी, जिहादी, मुस्लिम, सिख, या फिर घने – बुद्धिजीवी ही हो सकते हैं|

मुझे यह मानने में दिक्कत नहीं हैं की अनगढ़ दाढ़ी बदसूरत लग सकती है| परन्तु क्या अनगढ़ दाढ़ी को अपराध या धर्म से जोड़ा जाना उचित है?