विश्व-बंदी ६ अप्रैल


उपशीर्षक – भक्ति विषाणु 

सरकार को करोना के साथ भक्ति विषाणु से भी लड़ना पड़ रहा है| मीडिया भी कम विषाणु नहीं| उत्तर प्रदेश के कई जिलों की पुलिस के ट्विटर हैंडल्स पर कुछ सरकारपरस्त मीडिया चेनल को निशानदेह करकर असत्य और भ्रामक खबर न फ़ैलाने का अनुरोध दिखाई दिया| भले ही इस प्रकार के ट्विट बाद में हटा लिए जाए परन्तु यह सरकार की बढ़ती चिंता का द्योतक है| बलरामपुर की एक भाजपा नेत्री के विरूद्ध दिए जलाने के साथ हवा में गोलीबारी कर डालने के लिए कार्यवाही की गई – यह अलग बात की माफीनामे के साथ शायद उन्हें छोड़ दिया गया| देश दुनिया में बीमारी फ़ैल रही है और संवेदनहीन समर्थक भक्त बनकर अपने नेता को भी उपहास का पात्र बना दे रहे हैं|

सब से अधिक चिंता की बात अस्पतालों का बीमार घोषित कर दिया जाना है| मुंबई के एक नामी गिरामी अस्पताल में तीस से अधिक चिकित्सक और चिकित्साकर्मी बीमार हो गए हैं| अब अस्पताल को आम लोगों के लिए बंद किया गया है| देश में अन्य कई अस्पतालों के बारे में भी ऐसी खबरें हैं| आवश्यक साजोसामान की कमी लगातार चिंता का विषय है| तबलीगियों और विदेश से वापिस आए लोगों के बाद दिखा जाये तो बीमारों का बड़ा समूह चिकित्सा से जुड़े लोग हैं| सरकारी अस्पताल में भीड़ की अधिकता  और संसाधन की कमी के चलते उपकरण और दवा की किल्लत समझ आती है| मगर प्रसिद्ध निजी अस्पतालों में ऐसा होना चिंता का नहीं अपितु निंदा का विषय है|

देश भर में तबलीग की आड़ में मुस्लिम विरोधी बात हो रही है और मुस्लिम को चिकित्सकों का विरोधी बताया जा रहा है| परन्तु हिन्दू मकान मालिकों और पड़ोसियों द्वारा स्वधर्मी चिकित्सकों के विरुद्ध गाली गलौज की बातें भी लगातार सामने आ रही हैं|

आज पुलिस ने मोहल्ले में फिर से मार्च किया| वैसे यहाँ लोग कम ही निकल रहे हैं परन्तु पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता|

मौसम में आज काफी गर्मी महसूस हुई| प्रदूषण रहित माहौल में सूर्य अपने पूर्ण आभामंडल के साथ प्रकाशमान है| हवा की ठंडक तेजी से कम हो रही है| अगर जल्दी धूल भरी आँधियाँ नहीं आतीं तो गर्मी बहुत महसूस होगी|

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Janta Curfew


मैं रविवार २२ मार्च २०२० को जनता कर्फु के पालन की घोषणा करता हूँ और स्वैक्षिक रूप से २१ मार्च २०२० को भी जनता कर्फु का पालन करूंगा|
क्या आप इसका पालन करेंगे?

आप इस मीम को शेयर कर सकते हैं:

I m participating in #JanataCurfew on Sunday. Are you_ I will observe it on Saturday also. (1)

बंद कानों वाली दुनियाँ


दीवारों के कान होते हैं| जो कुछ नहीं सुनना चाहिए, सब सुन लेतीं हैं| दीवारों के चार छः मुँह भी होते हैं, जो कुछ सुन लेतीं हैं, गा गाकर दुनियाँ को सुना देतीं हैं| दुनियाँ दीवारों के कानों सुनीं बातें खूब सुनती है|

मगर यह दुनियाँ तो बहरी है| कौन किसी की सुनता हैं यहाँ? न मैं न तुम – कोई नहीं| सारी दुनियाँ अकेली और उदास है| कौन यहाँ किसी का दुःख बाँटने बैठा है? कोई किसी का कन्धा थपथपाने वाला नहीं, कोई गले लगाने वाला नहीं, कोई पीठ पर हाथ रखने वाला नहीं| दुनियाँ हजार हजार कोठरियों का बंद पिंजड़ा है| इन सभी कोठरियों को हवा की जरूरत है| खुलनी चाहिए कई खिड़कियाँ दस दिशाओं में| कुछ खुले आसमान कुछ तारों भरी रात कुछ हरे मैदान कुछ झम-झमझमाती हुई बारिश|

वक़्त के पीछे भागती इस दुनियाँ में कोई इंसान नहीं रहता छोटी छोटी कोठरियाँ रहतीं हैं| बंद डिब्बे – जो शायद ही कभी खुलते हैं – कहते हैं तो झरोके की तरह हवा की किसी हल्के फुल्के झोंके से| खुलने से डरने वाले डिब्बे – खुली और तेज हवा में चटकनियाँ चढ़ा लेते हैं|

बस, मेट्रो, ट्रेन, हवाई जहाज, स्टेडियम, और सारी दिल्ली में होने वाले तमाम समारोह खुली हवा लेकर आते हैं और हमें बुलाते हैं| मगर क्या वहाँ इंसान जाते हैं?

यूँ ही टैक्सी में बैठे बैठे मैंने कान पर फुसफुसिया लगाये गाने सुन रहा था| चालक ने अचानक पूछा, आप भी श्रीमान बंद डिब्बा निकले| सुनाई तो नहीं दिया – महसूस हुआ – उसने कुछ कहा है| धीरे से कान से फुसफुसिया हटाया और सड़क की तरफ देखने लगा| चालक ने फिर पूछा, झिरी से झाँक रहे हैं? मुस्कुरा दिया| लगा हवा का कोई हल्का सा झोंका है| चलो, अपनी जिन्दगी के इस बंद डिब्बे का एक छोटा सा झरोका खोल लिया जाए| यूँ ही कुछ यूँ ही सी बातचीत शुरू हुई| गाड़ी और बातचीत चलती रही – चालीस किलोमीटर|

कई बार सोचता हूँ – फ़िल्में, गाने, किताबें, क्या हैं ये सब? जब सारी दुनियाँ बाहें फैलाये खड़ी हो अपने कान क्यों बंद कर लेता हूँ मैं? दुनियाँ का दरवाज़ा खोलने की चाबी खुद अपने कान में लगानी होती है|

दुनियाँ आँख से नहीं कान से देखी जाती हैं, आँख सिर्फ़ यह बतातीं हैं कि देखना कब और कहाँ है?

मैं अक्सर टैक्सी में होता हूँ तो एक छोटी दुनिया बना लेता हूँ, जिसमे मेरा और चालक का सारा जहाँ थोड़ी देर के लिए सिमट आता है|