पुल और ट्रक


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रंगशाला


 

रंगमंच और युवा रंगकर्मियों को आगे बढाने हेतु “रंगशाला” का आयोजन होला एंटरटेनमेंट द्वारा निपा रंगमण्डली के सहयोग से किया जा रहा है| युवा प्रतिभा को परखना और निखारना, समय की मांग है| रंगशाला का उद्देश्य रंगकर्मी को दर्शक और अवसर को रंगकर्मी तक पहुँचाने का माध्यम प्रदान करना है|

 

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साथ ही, इस उदेश्यपूर्ण आयोजन से बिना आर्थिक लाभ उठाये समाज को कुछ देने का प्रयास भी है; किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ गैर सरकारी संगठन स्पर्श को दिया जायेगा| “स्पर्श” विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए काम करता है|

 

“निपा रंगमण्डली” भारतीय रंगमंच के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने वाला सुपरिचित नाम है; जिसे विभिन्न राष्ट्रिय और अन्तराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए| निपा रंगमण्डली ने कई बेहतरीन रंगकर्मी और फ़िल्मकर्मी दिए हैं|

 

प्रतिभागी:

ग्रैंड फिनाले से पहले, दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी ड्रामा संगठनोंऔर अन्य रंगसमूहों को अपना पंजीकरण कराया गया है और अपनी वास्तविक रंग प्रस्तुति का चलचित्र अवलोकन के लिए भेजा है|
अयोग्य पाई गई प्रस्तुतियों को हटा देने के बाद भारतेंदु नाट्य केंद्र के पूर्व निदेशक श्री सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ द्वारा चयनित प्रविष्टियों की सूचना होला एंटरटेनमेंट के वेबसाईट और फेसबुक पेज पर २० मई को दी जाने वाली है|  इस प्रकार प्रयास होगा मंत्रमुग्ध करने वाली प्रस्तुतियां ग्रैंड फिनाले के दिन दर्शकों के सामने प्रस्तुत हों| विजेताओं को जानने के लिए तैयार रहिये|

 

रंगशाला के रंग होंगे: हास्य, रुदन, जाग्रति और विचारों का नवजीवन|

 

ग्रैंड फिनाले (४ जून):

ग्रैंड फिनाले श्री राम कला केंद्र में होगा| तीन चयनित रंग समूह ग्रैंड फिनाले में प्रस्तुति देंगे और जन समूह से प्रसन्नता पूर्ण सराहना की आशा रहेगी|

 

अधिक जानकारी:

इस आयोजन के बारे में अधिक जानकारी जुटाने और इसका समर्थन और सहयोग करने के लिए इस लिंक पर आयें|

इस आयोजन के समर्थन के लिए टिकट प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जा सकते हैं| जिनकी कीमत मात्र पांच सौ रूपये है| 

साईकिल बे-कार नहीं है!!


बचपन में पंडित सुदर्शन की कहानी पढ़ी थी, साईकिल की सवारी| तभी से मन में यह भाव घर कर गया कि आपका स्वास्थ्य, समय और संसार सब कुछ एक अदद साइकिल के बिना सफल नहीं को सकता| उस समय मुझे स्कूटर चलाना तो आता था पर साइकिल नहीं| हेंडल सम्हालने से साथ पैर चलाना एक मुश्किल काम था| आज भी मुझे लगता है कि साइकिल चलाना निपुण प्रवीण लोगो का काम है और आरामपसंद लोग इसे नहीं कर सकते| अब दिल्ली शहर को देखिये सब लोग दिन भर कार में चलते है, और अपनी ख़ूबसूरत शामें किसी महफ़िल कि जगह जिम में बर्बाद करते है| मजे कि बात ये कि यही लोग हर रोज पर्यावरण प्रदूषण पर बतकही करते है| दूसरी और यूरोप में बड़े बड़े लोग साईकिल पर घूमते है| सब मर्म समझने की बात है, साईकिल चलना और उसे बढ़ावा देना आज की जरूरत है| यह बढ़ती महंगाई में घर के बज़ट को ठीक रखती है, आपके एक अच्छी कसरत देती है और पर्यावरण की साफ़ सुथरा बनाने में इसका बढ़ा योगदान है|

यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि यहाँ लोग साईकिल को गाँव गँवार, नौकर मजदूर की सवारी समझते है| अरे भाई! दिखावे से न आप का घर चलता है न ही देश| सस्ती सुन्दर साईकिल दुनिया भर में शान की बात है, अपने यहाँ क्या बात हो गई| साइकिल को नीचा करके रखना तो बढ़ी बढ़ी मोटर कंपनी वालो की साजिश है, अपना माल बेचने की| मोटर कार महंगी आती है, रखरखाव पर अधिक खर्च होता है, जगह भी अधिक लेती है, ईधन भी मांगती है, बदले में आपको बिमारी ही देती है| मैं किसी भी तरह कार के खिलाफ नहीं हूँ, परन्तु दोनों की उपयोगिता भिन्न है| हमें एक दो किलोमीटर की दूरी के लिए कार के प्रयोग से बचना चाहिये|

दुनिया भर में सडको पर अलग से साईकिल लेन हैं, हमारे यहाँ उस पर सफेदपोश लोग बेकार मैं कार खड़ी कर देते है| कोई उन्हें कुछ नहीं कहता कि बाबूजी, पार्किंग में कार खड़ी करने के पैसे नहीं थे तो क्यों ये हाथी पाल लिया| खाई, छोड़िये उन बेचारों को| यहाँ तो साईकिल कि बात करनी है|

पुद्दुचेरे सहित देश के कई शहर में आज भी घूमने के लिये साइकिल किराए पर मिल जाती है| दिल्ली मेट्रो आजकल उधार पर साइकिल देती है, पार्किंग कि सुविधा भी| यह उसका अपने सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का तरीका है|साईकिल के प्रयोग को इसी तरह के प्रोत्साहन की जरूरत है|