शिव मिष्ठान भंडार, फ़तेहपुरी, चांदनी चौक


अगर पुरानी दिल्ली में सुबह सुबह बेहतरीन उत्तर भारतीय शाकाहारी नाश्ते का दिल करे तो शिव मिष्ठान भंडार का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है| दिल्ली के बाहर आज भी जलेबी और हलवा नाश्ते का हिस्सा है| दूध जलेबी, दही-जलेबी, हलवा-पूड़ी, पोहा जलेबी, यह सब नाश्ते हैं| अगर आपको सुबह सुबह मीठे नाश्ते का मन करे तो भी यह जगह आपके लिए है|

दुकान कई बड़ी ब्रांड वाली दुकानों के साथ है, मगर उनसे ज्यादा भीड़ यहाँ पर है| नाश्ते की ज्यदातर दुकानों से अलग यहाँ बैठने का पूरा इंतजाम है क्योकि यह दिन भर खाने के लिए उपलब्ध है| मगर ध्यान दें, यहाँ का प्रसिद्ध नागौरी-हलवा नाश्ते में खाए जाने की चीज़ है और सुबह बनता है| यह जगह देर तक सोने वाले आलसियों के लिए नहीं है| नागौरी-हलवा सुबह दस बजे तक ख़त्म हो जाता हैं|

नागौरी हलवा में दो अलग अलग चीजें है| पहला नागौरी – यह एक तरह की पूड़ी है| यह साधारण पूड़ी और बेड़मी पूड़ी से एकदम अलग है| इसके साथ है – आलू सब्जी या छोले, जो शायद उन लोगों के लिए है जिन्हें हलवे से पूड़ी खाना गले नहीं उतरता| मगर असली चीज़ है हलवा| नागौरी को आप सब्जी या हलवे, जिस से मन करे खा सकते हैं| मैं सलाह दूंगा, हलवे के साथ जरूर खाएं|

जो लेट लतीफ़ लोग नागौरी-हलवा नहीं खा पाते या नहीं खाना चाहते, उनके लिए बेड़मी पूड़ी सब्जी बेहतरीन है| पूड़ी ठीक से सेंकना अपने आप में एक कला है| यहाँ आपको एकदम सही सिकी पूड़ी मिलती है|  मसाला बहुत हल्का है| इस कारण आलू सब्जी का अपना स्वाद निखर कर आता है| छोले – भठूरे, कचौड़ी, समौसा भी बेतरीन हैं|

जलेबी, इमारती, गुलाब जामुन, सूजी हलवा, मूंग दाल हलवा, और मालपूआ बेहतरीन हैं| गर्मियों में अगर जाएँ तो यहाँ की शानदार लस्सी का स्वाद लेना न भूलें|

सौ से अधिक साल पुरानी इस दुकान में देश के बड़े बड़े लोग अलग अलग समय में आ चुके हैं|

स्थान: शिव मिष्ठान भंडार, फ़तेहपुरी, हौज़ क़ाज़ी, चावड़ी बाज़ार, पुरानी दिल्ली,

भोजन: शाकाहारी

खास: नागौरी-हलवा, पूड़ी-सब्जी,

पांच: साढ़े-चार

सन्नाटा


सन्नाटा शब्द से तो आप परिचित हैं| ध्वनि प्रदुषण के इस युग में सन्नाटा आप को डराता भी  होगा| परन्तु ब्रजमंडल में सन्नाटा अपनी अलग शान रखता है| कोई अच्छी दावत नहीं जो सन्नाटे के बिना पूर्ण हो सके| जड़ों के कटते हुए कुछ लोग जरूर दावतों में अजब गजब सा रायता रखने लगे हैं| परन्तु, हमारे यहाँ नाश्ता तो सन्नाटे के बिना आज भी पूरा नहीं होता| मैंने हाल में अलीगढ़ की कचौड़ी के ऊपर लिखी पोस्ट में सन्नाटे का जिक्र किया है|

सन्नाटा विश्व का पहला ऊर्जाहीन (low calories) प्रोबोइटिक पेय है, जिसमें आपके मस्तिष्क को शून्य स्तिथिप्रज्ञ में पहुँचाने की विकत क्षमता है| बेहतरीन सन्नाटा आपके दिमाग को सुन्न करता हैं, सभी नकारात्मक विचारों को दिन भर के लिए एवं सकारात्मक विचारों को थोड़ी देर के लिए दूर करता है और आँख कान जैसी इन्द्रियों को थोड़ी देर ले लिए अंधकार और असीम शांति में भेज देता है| बेहतरीन सन्नाटा आपको पौष मास की अमावस की गहरी काली रात में घने जंगल में प्राप्त होने वाली अनंत शांति का अहसास कराता है|

महत्वपूर्ण बात यह है कि सन्नाटा प्रोबोइटिक दही से बनता है| भगवान् कृष्ण के ब्रजमंडल में दही और प्रोबोइटिक दही क्या कमी| सन्नाटे की विधि से पहले संक्षेप में प्रोबोइटिक दही की विधि बता देता हूँ|

प्रोबोइटिक दही विधि

अच्छे से उबलाकर ठंडा किया गया गाय का दूध लें| अगर गाय का दूध न हो तो वसा-रहित कोई भी दूध ले लें| पहले सामान्य ढंग के दही जमाने  रख दें| जब दही खट्टा होने लगे तो उसे चार घंटे फ्रिज में रख दे|

यदि आपको सन्नाटा बनना है तो दही को बेहद खट्टा होने दे परन्तु ध्यान दे की ख़राब होने से पहले चार पांच घंटे फ्रिज में रहे|

सन्नाटा विधि

अब अच्छा खट्टा प्रोबोइटिक दही लें| कम से कम चार गुना पानी मिला ले| बेहद अच्छे से उसे चला ले जैसे सामान्य रायता चलाते है| स्वाद-अनुसार आप जितना नमक डालना चाहते हैं उससे बस थोडा सा ही ज्यादा नमक डालें| अब कुटी या पीसी पीला मिर्च (लाल काली नहीं) अपने स्वाद अनुसार डाल लें| फ्रिज में रख दें| ठंडा ठंडा पिए|

नोट –  में बेहद खट्टे मठ्ठे का प्रयोग करते हैं| जिसमें बिलकुल मख्खन न बचा हो|

अगर रायता फैलाना हो, तो नीचे कमेंट लिखकर रायतापसंद होने का सबूत दें|

चिदंबरम’स न्यू मद्रास होटल, खन्ना मार्किट


जब से मैं लोदी रोड इलाके में रहने आया हूँ, यह मेरा पसंदीदा भोजनालय है| दिल्ली शहर के कई बड़े नामी दक्षिण भारतीय भोजनालय, मेरी राय में, स्वाद में इसके मुकाबले नहीं ठहरते| हर महीने मैं एक बार यहाँ से कुछ न कुछ गृह वितरण पर मंगाया जाता है| भोजन घर मंगाने का हमें थोड़ा नुक्सान है| एक तो वेलकम ड्रिंक रसम नहीं मिलता और दूसरा तीन चटनी की जगह एक से काम चलाना पड़ता है|

यहाँ पहुँचते ही आपको गर्मागर्म शानदार रसम पीने के लिए मिलती है| जब तक आपका मुख्य व्यंजन  आये, आप रसम के घूँट भर सकते हैं| रसम पीने से न सिर्फ भूख बढ़ती है, वरन पाचन क्षमता भी बढ़ती है| रक्तचाप वाले रसम न लें, यहाँ रसम में हल्का नमक ज्यादा रहता है| रसम पर भोजन की बात समाप्त क्या, शुरू भी नहीं हुई है| यहाँ सुबह के नाश्ते से रात के भोजन का इंतजाम है|

यहाँ सबसे बेहतरीन दही-बड़ा| यहाँ का दही-बड़ा दिल्ली की किसी भी चाट-पकौड़ी की दुकान से बेहतर है| निश्चित ही बड़ा, उत्तर भारतीय बड़े से भिन्न है| मगर सिर्फ इसलिए की यह बड़ा भिन्न है, मैं इसकी तारीफ नहीं कर रहा हूँ, वरन इसका स्वाद लाजबाब है| यहाँ की एकमात्र मिठाई केसरी-बात (सूज़ी-हलवा) बेहतरीन है| यहाँ केसरी-बात दिल्ली या उत्तर भारत में मिलने वाले सूजी-हलवे से थोड़ा अलग तरीके से बनता है| यहाँ नाश्ते में पोंगल मेरा प्रिय है| मसाला इडली का स्वाद भी बेहतर है|

खाने की बात करें तो रवा डोसा, मैसूर डोसा मसाला, नीलगिरी उत्तप्पम पसंद आते हैं| यहाँ आकर कहने वालों के लिए तीन तरह की चटनी है – नारियल, टमाटर और कड़ी-पत्ता| लेकिन आपको यहाँ मिलता है एक और पकवान – रागी डोसा, जो गर्म-गर्म खाने में आपको अलग और शानदार स्वाद देता है| रागी दक्षिण भारत में उगने वाला पोष्टिक अन्न है| रागी डोसा ठंडा होने पर उतना अच्छा नहीं लगता, इसलिए गप्पे मारते हुए खाने के लिए नहीं है| चिदंबरम रवा स्पेशल मसाला डोसा स्वाद पसंद लोगों के लिए है| यहाँ घर पर कुछ भी नहीं मंगाया जा सकता, कुछ चीजें यहाँ आकर ही खानी होतीं है|

यहाँ की थाली एक बार जरूर खानी चाहिए| दो सब्जी, चावल, निम्बू चावल, सांभर, रसम, दो पूड़ी, दही, केसरी-बात, पापड़, आचार के साथ यह कई लोगों के लिए खुराक से अधिक हो जाती है| मगर इसकी खास बात है, दक्षिण भारतीय तरीके से बनीं सब्जियां| थ्री –इन –वन डोसा और उत्तपम भी पसंद किये जाते हैं|

सन 1930 में दक्षिण भारतीय सरकारी अधिकारीयों को ध्यान में रख कर खोला गया यह भोजनालय 1950 से इस स्थान पर है| यह नई दिल्ली के सरकारी कार्यालयों में बहुत लोकप्रिय है| इस भोजनालय के बाहर दक्षिण भारतीय नमकीन भी मिलता है| जो निश्चित ही उत्तर भारतीय नमकीन से अलग स्वाद देता है|

स्थान: चिदंबरम’स न्यू मद्रास होटल, खन्ना मार्किट, लोदी रोड, नई दिल्ली,
भोजन: शाकाहारी
खास: दही-बड़ा, डोसा, पोंगल, रागी डोसा,
पांच: चार