धृतराष्ट्र के पुत्र


||एक||

धृतराष्ट्र के सौ पुत्र!

मैं हजारों देखता हूँ,

दृष्टि दिगन्त दुःख है,

गान्धारी पीड़ा धारता हूँ||

||दो||

राज्य प्रासाद के प्रांगण में

चौपड़ नहीं बिछती सदा,

शत-पञ्च के बहुमत से

कौरव विजयी होते रहे||

||तीन||

जो सत्य के साथ हों,

पांच गाँव माँगें सदा,

हस्तिनापुर की जय हो,

पाण्डव करें पुकार,

एकलव्य क्या कहे

क्या धर्म आधार||

 

-ऐश्वर्य मोहन गहराना

नया भला भोर


“नया भला भोर होगा कल”

सुना और चुप रहा

प्रदूषण भरे दिन के

प्रथम प्रहर का मतिमंद सूर्य||१||

 

अँधेरी सांय संध्या,

धूमिल अंधरे में

गहराती रही,

दिन

आशावान रहा

अब कोई अँधेरी रात न होगी||२||

 

सोचता हूँ मुस्करा दूँ

गहन अँधेरे में,

अँधेरा तो देखेगा

मेरी हिमाकत||३||

 

अरी जलेबी


अरी जलेबी गोल मटोल

घूमा घामी पोलम पोल

चाशनी तेरी झोलम झोल

रंग तेरा लालम घोल|

तेरी मौसी इमरती माई

फिर भी तू हमको भाई

इमरती हमने सूखी पाई

तेरे संग में दूध मलाई|

दूध मलाई राबड़ी भाई

देख के हमने दौड़ लगाईं

कड़ी कुरकुरी बड़की माई

मरी मुलायम हमने पाई|

ठण्डी मंडी तुझको खाऊँ

दही जामन उसमें पाऊँ

ठण्डी गर्मी क़स्बा गाऊँ

दूगनम दून मैं खा जाऊँ||

– – ऐश्वर्य मोहन गहराना