ट्रॉफी, टॉफी और लड़कियाँ


 

लड़कियाँ ट्रोफ़ियां होतीं हैं

शानदार रंगबिरंगी सजावटी|

 

जीत ली जातीं हैं;

प्रेम से, मुहब्बत से,

जंग से, रंग से,

पैसे से, परम्परा से,

जोर से, जमीन से,

चटपटी मीठी बातों से|

 

दांव चढ़ जाती है;

प्रेम की, परंपरा की,

परिवार की, पैसे की,

दान की, दहेज़ की,

मायके की, सुख की,

दुहाई की, दुःख की|

 

सजाई जातीं है;

अगल में, बगल में,

सगाई में, ससुराल में,

बैठक में, बिस्तर में,

चौके में, चूल्हे में,

सजावट में, समारोह में|

 

लडकियाँ टोफियाँ होतीं हैं

शानदार रंगबिरंगी सजावटी|

 

बाँट दी जातीं है;

पुरुषों में, पत्थरों में,

प्रसाद में, पुरुस्कार में,

महलों में, मंदिरों में,

रिश्ते में, नाते में,

कोठिओं में, कोठों में|

 

चूस लीं जातीं हैं;

गंध में, सुगंध में,

रंग में, बिरंग में,

संवाद में, स्वाद में,

प्रकाश में, अंधकार में,

मन में, मंदिर में|

 

लड़कियाँ

ट्रॉफी होतीं है, टॉफी होतीं हैं|

 

लड़कियाँ

नहीं जानतीं जिन्दा होना|

 

लड़कियाँ

जानतीं है लड़कियाँ होना|

 

हर पल मेरी बातें


 

हर पल

मेरी बातें करता|

 

सुबह शाम

मोबाइल मचलता|

 

जागना, सोना, खाना, पीना,

बिन मेरे न जीना|

 

चल दीं, पहुँचीं,

हर जगह पर क्यों होती हो,

बारिश धूप में क्यों रोती हो|

 

चिंता, हर दम हर पल,

नींद उड़ा बैठा है|

 

सुबह छोड़ना दफ्तर तक,

लेने आना रोज,

हरपल उसकी आँखें

करती मुझको खोज|

 

न चिंता खुद के खाने की

न अपने दफ्तर जाने की|

 

कितना ही अच्छा है,

कितना ही भोला है,

कितना प्यार भरा है,

कितना ध्यान धरा है||

 

न पूछो उसकी बातें,

सोचती हूँ,

क्या होगा जब पाऊँगी,

उसने जीवन में सिर्फ प्यार करा है,

मुझको पाने की खातिर,

सोंप सका क्या मुझको,

अपने जीवन की थाती?

 

क्या माता की आशा,

क्या पिता का तप,

क्या भाई के बल,

क्या बहन का स्नेह,

कुछ मान रख पाया है?

 

पढ़ न सके तुम मेरी खातिर,

कर न सके तुम मेरी खातिर,

उन्नति के पथ की बातें?

 

प्रेम की पोथी बांची थी जब,

ज्ञान की पोथी क्यों छोड़ी?

करते थे आने जाने का क्रम,

कर न सके तुम थोड़ा श्रम?

 

मैं प्रेम तुम्हारा हूँ,

जीवन का धिक्कार नहीं,

जो उन्नति को रोके,

वो सच्चा प्यार नहीं||

 

सर फोड़ दिया


ख़ुशी का कतरा

मिला एक पल

देर से मिलने का शिकवा

न मिलने की शिकायत

भूल जाने का झगड़ा

सर फोड़ दिया साले का

अरे वही

ख़ुशी का कतरा

सर फोड़ दिया साले का