मैं, मैं रहूँ|
मुझे में मैं न हो|
मैं मैं न सोचूँ,
मैं मैं न कहूँ,
मैं मैं न करूँ|
मैं मैं, मैं और मैं
हम हो जाएँ|
हम इतना मिलें
एक हो जाएँ|
हम मैं हो जाएँ||
मैं, मैं रहूँ|
मुझे में मैं न हो|
मैं मैं न सोचूँ,
मैं मैं न कहूँ,
मैं मैं न करूँ|
मैं मैं, मैं और मैं
हम हो जाएँ|
हम इतना मिलें
एक हो जाएँ|
हम मैं हो जाएँ||
जल्दी है मुझे
दौड़ जीतने की|
जल्दबाजी में मैंने छोड़ दिया है
जूते पहन कर आना|
बदहवाश सा दौड़ रहा है
वक़्त मेरे आगे|
मेरे सीने में जलता बारूद
उसे रुकने नहीं देता|
पहाड़ से ऊपर उठते हुए
रुक जाना है मुझे,
बारीक सी कंकड़ी
मेरे पैर में चुभी है|
मन का आक्रोश
उदास है
सहमा हुआ क्रोध
मुस्कुराता है|
मेरा वो पुराना जूता
कहाँ है
जिसका जिक्र करना
छोड़ दिया है मैंने|
बिना बुलाये तो ऐश्वर्य भगवान् के घर भी नहीं जाता, मगर भगवान् बुला न ले, इस डर से कोने में दुबक जाता है|
बिना बुलाये तो ऐश्वर्य भगवान् के घर भी नहीं जाता, मगर बिना बुलाये मंदिर मस्जिद रोज जाता है और प्रार्थना करता है भगवान् बुला मत लेना|
बिना बुलाये तो ऐश्वर्य भगवान् के घर भी नहीं जाता, मगर भूल जाता है भगवान् का घर तो उसके दिल में है; ऐश्वर्य बिना बुलाये अपने दिल में भी नहीं जाता, कभी नहीं||
बिना बुलाये तो ऐश्वर्य भगवान् के घर भी नहीं जाता, मगर उसे सच में यह पता नहीं भगवान् है कौन? है, है भी, या नहीं है|