तीन हाइकू


वक़्त ठहर जाता

अरमां यूँ ही पिघलते रहते

इश्क़ के अक्ल होने तक||

 

जुनूं था दीवाने को

तेरी मुहब्बत का इश्क़ और

इश्क़ का इबादत होना||

 

दिल चुभता सुबह सुबह

फंस गया पंक्षी चहकत चहकत

पानी की गरारी में||

 

कोशिश की है आज हाइकू लिखने की| मन की बात छुपाने के लिए और छुपाने से जायदा कहने के लिए सही माध्यम लग रहा है|

 

अच्छी लड़की


[१]

ओढ़ाती है दुपट्टा

रत्ती भर इज्जत को

पानी से पर्दा रखती है

बंद गुसलखाने में

डर डर कर नहाती है

अच्छी लड़की|

[२]

फब्तियां और फितरे

डराते नहीं हैं मगर

शरीर की कैद में

दम तोड़ देती है इज्जत

चुप रहती है

अच्छी लड़की|

[३]

सड़क किनारे मूतते मर्द

माँ बहन पड़ोसन

रण्डीखाने में ढूंढते हैं

जिसे नहीं पाते वहाँ

चस्पा देते है तमगा –

अच्छी लड़की|

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..


अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

कहता है हम जानवर से इंसान बने है!!

इसने कभी जानवर देखे भी हैं?

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

क्या सुना है हिरण ने

किसी हिरण के बच्चे को सींग भी मारा हो?

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

क्या सुना है शेर ने कभी मारी हो भेड़

अपनी भूख से ज्यादा ?

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

क्या कभी देखा है किसी भेड़िये को

भेड़िये के बच्चे मारते हुए?

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

क्या सुना है कभी

मच्छर को मच्छर का खून पीते हुए?

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..

अम्मी ये डार्विन झूठ बोलता है..