ई ससुरी NET NEUTRALITY है क्या बे ?


अनुभव सिन्हा जाने-माने फिल्म निर्माता-निर्देशक हैं. उनके ब्लॉग का पता है- http://benarasi-babu.blogspot.in/ नेट नयूत्रलिटी पर अच्छा लिखा है| पढ़ने योग्य| यह आलेख bargad.org से रिब्लोग किया जा रहा है|

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Anubhav Sinha अनुभव सिन्हा

अनुभव सिन्हा जाने-माने फिल्म निर्माता-निर्देशक हैं. उनके ब्लॉग का पता है-http://benarasi-babu.blogspot.in/

मैंने मेरे एक डायरेक्टर फ्रेंड से पूछा कि net neutrality के लिए कर क्या रहे हो.  वो थोड़ा शर्मिंदा हो गया और बोला सुन तो रहा हूँ कि कुछ चल रहा है, पर सच कहूँ, तो समझ नहीं आ रहा कि है क्या ये. मैं थोड़ा चिंता में पड़ गया. अगर पढ़े लिखे लोग अनभिज्ञ हैं, तो किसी और को क्या समझ आएगा.  सोचा, चार लाइनें लिख देता हूँ, चार लोगों को भी समझा पाया तो काफी होगा.  अंग्रेजी में काफी बातें उपलब्ध हैं नेट पर, हिंदी में कम हैं. मैं इंजीनियर भी हूँ और ‘भैय्या’ भी, सो सोचा, हिंदी वाली ज़िम्मेदारी मैं निभा देता हूँ.

पहली बात, इंटरनेट है क्या?  दुनिया भर में हज़ारों लाखों करोड़ों कंप्यूटर हैं, जो आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. किसी कंप्यूटर पर संगीत है, तो किसी पर…

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राग दरबारी


हिंदी के कालजयी उपन्यास राग दरबारी के बारे में मैंने किसी भी साहित्यिक पत्रिका या चर्चा से अधिक गैर साहित्यिक लोगों से जाना| जब २८ अक्टूबर २०११ में उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल की मृत्यु हुई, तब राग दरबारी की चर्चा सोशल मीडिया में अफसरशाह, कूटनीतिज्ञ और पब्लिक पालिसी से सम्बद्ध लोग अधिक कर रहे थे| मजे की बात यह है कि वो सभी इसे निर्विवाद रूप से बेहद शानदार साहित्यिक कृति के रूप में याद कर रहे थे| राग दरबारी को “एनिमल फार्म” जैसी कृतियों जितना महत्वपूर्ण बताया जा रहा था| राग दरबारी पर हुई उस समय हुई साहित्यिक चर्चा मुझे आजकल की अधिकतर पंडिताऊ और दलिताऊ चर्चाओं की तरह ऊबाऊ लग रही थी|

इस वर्ष आखिरकार मैंने राग दरबारी खरीद ही लिया| यह एक शानदार निवेश साबित हो रहा है| राग दरबारी पढ़ते समय मुझे कई बार लगा की शायद यह आजकल में ही लिखा गया उपन्यास है| क्या पिछले पचास वर्ष में भारत में कुछ भी नहीं बदला है? यकीन नहीं हुआ कि राग दरबारी १९६८ में प्रकाशित हुआ था| अगर कंप्यूटर और मोबाइल का बेहद हल्का सा राग भी राग दरबारी के दरबार में रहता तो हम इसे २००८ में प्रकाशित हुआ मान सकते थे| यही तो कालजयी उपन्यास की जय है|

राग दरबारी पढ़ते समय मैं मोदी और केजरीवाल के किस्से भी परिभाषित होते हुए देख पाया, जो उपन्यास लिखे जाने के लगभग चालीस वर्ष बाद घट रहे हैं| इस उपन्यास में अनेक उपकथायें हैं आज कल घटित होती हैं, या कहें आजकल भी घटित होती हैं| कुछ घटनाएं नहीं तो उनके सन्दर्भ आजकल के समय में दिखाई दे जाते हैं|

“वास्तव में सच्चे हिन्दुस्तानी की यही परिभाषा है कि वह इंसान जो कहीं भी पान खाने का इंतजाम कर ले और कहीं भी पेशाब करने की जगह ढूंढ ले|”

इस एक वाक्य में मुझे मोदीजी के सफाई अभियान से लेकर गुटखा (तम्बाखू युक्त पान मसाला जो पान का आधुनिक समय बचाऊ विकल्प है) महसूस होता है| इस तरह से नगीने राग दरबारी में बिखरे पड़े हैं| राग दरबारी भारत की वर्तमान राजनीति, लोकतंत्र, अफसरशाही, भाई-भतीजावाद, जाति-प्रपंच, साम्प्रदायिकता, अध्-पढ़ता आदि अनेकानेक पहलूओं पर कालजयी व्यंग है|

राग दरबारी की रोचकता इसकी कहानी का सरल होना और रोजमर्रा की जिन्दगी के बेहद करीब होना है| बेहद साधारण कहानी को श्रीलाल शुक्ल जी ने बेहद रुचिकर तरीके से कहकर पाठक के सामने सजाया है जिसमें कथानक खुद अपने हर पहलू की विवेचना करता चलता है| कथानायक रंगनाथ वास्तव में सहनायक है| कहानी के कथ्य में उपन्यासकार लगातार अपनी सहज उपस्तिथि बनाये रखता है मगर कथानक में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करता| उपन्यासकार की टिप्पणियाँ कथानक को सजीव बनाते हुए उसे आगे बढ़ातीं है| यह टिप्पणियाँ ही हैं जो हमें कथानक को कालजयी रूप से पढ़ने में मदद करती हैं| राग दरबारी का हर पृष्ठ पढ़ते हुए आपको के सम्पूर्ण कहानी का अहसास होता है जो आपके करीब से ही उठाई गयी है| आपने राग दरबारी को कहीं न कहीं जीवन में महसूस किया है| इसके पात्र अपने साधारण परिवेश के बाद भी जाने पहचाने हुए हैं| सभी पात्र जीवन के सभी कार्य उसी साधारण तरीके से कर रहे हैं जिन्हें हम सभी अपने अपने साधारण तरीके से करते हैं|

पुस्तक केवल पढने लायक नहीं है वरन हमेशा अपने साथ रखने लायक है|

 

नया स्मार्टफ़ोन


आज के समय में अगर आप स्मार्ट हो या न हों मगर आपका फ़ोन हर हाल में स्मार्ट होना चाहिए| आज जीवन की हर सुविधा स्मार्ट फ़ोन के जरिये लोगों तक पहुँच रहीं है| मोबाइल बैंकिंग और मोबाइल टिकटिंग आदि ऐसे कुछ उदहारण है जिनका प्रयोग आपको ज्यादातर करना होता है| उधर सरकार भी अब ई- गवर्नेंस के साथ साथ मोबाइल – गवर्नेंस की बात करने लगी है| मुझे लगता है की स्मार्ट फ़ोन को इसलिए लिया जाना चाहिए कि वो आपके जीवन में कुछ और स्मार्टनेस लाये और आपको ई- गवर्नेंस, मोबाइल गवर्नेंस, मोबाइल बैंकिंग, मोबाइल टिकटिंग आदि अनेक सुविधाओं से समय पर जोड़ पाए|

किसी भी मोबाइल या स्मार्ट फ़ोन में भारतीय परिस्तिथि के अनुसार लम्बी लाइफ वाली ऐसी बैटरी होनी चाहिए जो जल्दी चार्ज हो जाये| हो सके तो आपको मोबाइल के साथ पॉवर बैंक साथ में चिपका कर न घूमना पड़े|

स्मार्ट फ़ोन की अपनी खुद की कार्यक्षमता बहुत अच्छी होनी चाहिए| किसी भी स्मार्ट फ़ोन की कार्यक्षमता उसके प्रोसेसर और रैम पर निर्भर करती है| इन दोनों का अच्छा होना बहुत जरूरी है|

किसी भी स्मार्ट फ़ोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बेहद सरल सहज और तीव्र कार्यक्षमता वाला होना जरूरी है| यदि ऑपरेटिंग सिस्टम को समझना आसान होता है तो ज्यदातर लोग उसे समझ पाते हैं और आसानी से प्रयोग कर पाते हैं| किसी भी स्मार्ट फ़ोन की सफलता उसके अच्छे ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी टिकी होती है|

जब से हम लोगों ने मोबाइल या स्मार्ट फ़ोन का प्रयोग प्रारंभ किया है हमें फ़ोटो और सेल्फी का रोग भी लग गया है| अब इसके लिए स्मार्ट फ़ोन में अगर अच्छा कैमरा नहीं है तो इसका मकसद किसी भी तरह पूरा नहीं होता है| कैमरा कहीं भी किसी भी परिस्तिथि में अच्छा चित्र निकल सके तभी स्मार्ट फ़ोन का कैमरा कहला सकता है|

स्मार्ट फ़ोन को एक फ़ोन ही होना चाहिये उसे न तो टैब की तरह बड़ा होना चाहिए न ही साधारण मोबाइल फ़ोन की तरह छोटा| आपकी उंगलियां उस पर आसानी से अपना काम कर सकें| उसका कुंजीपटल (keyboard), दृश्यपटल (display), और गति स्मार्ट होनी चाहिए| आप स्मार्टफ़ोन पर अपने सन्देश तेजी से लिख सकें| आने वाले सन्देश आँखों पर बिना जोर डाले पढ़ सकें, यह बहुत जरूरी है| कुल मिला किसी भी स्मार्ट फ़ोन का यूजर इंटरफ़ेस बहुत ही शानदार होना चाहिए|

भारत में खासकर दिल्ली जैसे राज्यों में जहाँ लोग रोमिंग में जाते रहते हैं दो सिम रखने का चलन है| इसलिए स्मार्ट फ़ोन को डूएल सिम होना ही चाहिए|

स्मार्ट फ़ोन तकनीकी इतनी तेजी से बदल रही है कि आज कोई भी अपने स्मार्ट फ़ोन को दो या तीन साल से ज्यादा चलाने के बारे में नहीं सोचता है| स्मार्ट फ़ोन का महंगा होना ऐसे में लोगों के लिए चिंता का विषय होता है| कोई भी स्मार्ट फ़ोन खरीदते समय जादातर लोग उसके लिए अपने एक महीने के वेतन से अधिक पैसा नहीं देना चाहते| भले ही इस बारे में कोई सोच समझ कर निर्णय न लिया जाये मगर ओसतन बज़ट एक माह के वेतन के बराबर ही होता है|

जल्दी ही एक ऐसा डूएल सिम स्मार्ट फ़ोन लांच होने जा रहा है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसमें 2.3GHz 64-बिट इंटेल एटम Z3580 प्रोसेसर और चार जीबी का रैम है| इसका डिस्प्ले साढ़े पांच इंच का है| उसका कैमरा २ मेगापिक्साल मास्टर कैमरा है जो कम रौशनी में भी सरलता से तस्वीर निकाल सकता हैं| उसकी बैटरी ३९ मिनिट में ६०% चार्ज हो जाती है| मुझे यह जानने में दिलचस्पी बनी हुई है कि इसकी बैटरी कितनी देर में पूरी तरह चार्ज हो जाती है, क्योकि बैटरी का चार्ज होना गणित का नहीं वरन भौतिकशास्त्र का प्रश्न है| मुझे लगता है जिस प्रकार की सूचना आ रही है ASUS Zenfone 2 खरीद लिए जाने लायक स्मार्ट फ़ोन होना चाहिए|