रक्षा बंधन हमारा ही त्यौहार हो सकता है


रक्षा बंधन हमारा ही त्यौहार हो सकता है| जी हाँ हमारा ही|

दुनिया का वो सभ्य देश, जहां नारी की पूजा दहेज़ से होती है और मार मार कर उसकी आरती उतारी जाती है|

दुनिया का वो सभ्य देश, जहाँ भाभी को मारने वाले मर्द भाई पर उसकी बहन को गर्व होता है, माँ ख़ुश होती है, भभी को लाड़ आता है, और बेटी को पराये घर का सबक मिलता है|

दुनिया का वो सभ्य देश, जहाँ अपनी निकम्मी मर्दानगी की चिंता में लोग रोजी रोटी की चिंता से ज्यादा परेशान हैं| जहाँ कर मर्द, राजी, गैर – राजी, मान – न – मान हर औरत पर अपनी मर्दानगी की पताका लहराता है|

दुनिया का वो सभ्य देश, जहां सभ्य लोग इस बात पर शर्मिदा नहीं होते कि वहां वैश्या तक का बलात्कार हो जाता है और क़ानून को शर्म तक नहीं आती|

जहाँ बलात्कार करने पर मर्द अपना सीना ठोंक कर हर नुक्कड़ पर उसके गान गाता है, और लड़की को निगाह झुकानी पड़ती है|

जहाँ बलात्कार पर चर्चा तब तक नहीं होता जब तक मीडिया उसे स्पोंसर न करे| वो सभ्य देश जहाँ बलात्कार होने पर लड़की को चुप रहने को कहा जाता है, उसकी बदनामी मानी जाती है, उसका नाम कानूनन छिपाया जाता है|

वो देश जिसमें लड़की पैदा होने पर बाप को दहेज़ की चिंता होती है और उस से ज्यादा उसकी “इज्जत” की|

उसी देश में तो बहन को डर लगेगा| उसी देश में तो बहन को भाई का सहारा चाहिए होगा| उसी देश में तो बहन को रक्षा का वचन चाहिए होगा| उसी देश में तो एक बहन को हर साल – साल – दर साल भाई को रक्षा का वो वचन याद दिलाना पड़ेगा| उसी देश में तो बहन को रक्षाबंधन का सहारा लेना पड़ेगा| उसी देश में रक्षाबंधन प्रमुख त्यौहार होगा|

रक्षा बंधन हमारा ही त्यौहार हो सकता है| जी हाँ हमारा ही|

आइये कुछ तो शर्म करें| थोड़ी सी शर्म करें| थोड़ी सी ही….|

हैप्पी इंडिपेंडेंस दीपा करमाकर


दीपा करमाकर को नहीं मिला न गोल्ड,

दुःख तो बहुत हो रहा होगा आपको,

जिस देश में बहुत से घरों में बहन बेटियां ही नहीं होतीं

उस देश में दीपा गोल्ड नहीं ला पाई,

जिस देश में घर में अगर बहन बेटियां होतीं हैं

उन्हें ठीक से दाल और दूध नहीं मिलता,

मोटी हो जाएगी तो करीना सी कैसे दिखेगी

उस देश में दीपा गोल्ड नहीं ला पाई,

जिस देश में बहन बेटियों को दाल दूध मिलता है,

तो उसे सिर्फ घर के बदन कमरे में पढाई करनी होती है

उस देश में दीपा गोल्ड नहीं ला पाई,

चलिए घर की बहन बेटी से कहिये,

खेलेगी तो चहरे पर पर चोट का निशान आ जायेगा

उस देश में दीपा गोल्ड नहीं ला पाई,

चलिए छोड़िये अगले ओलम्पिक में किसी और उम्मीद करेंगे

तब तक हैप्पी इंडिपेंडेंस डे!!!

बचिए कंपनी फिक्स्ड डिपाजिट से


जल्दी से दोगुना होने वाला पैसा हम सभी को जान से ज्यादा नहीं तो कम प्यारा भी नहीं है| पहले ज़माने में पैसा दोगुना करने का काम बाबाजी लोग करते थे| आज के ज़माने में पैसा दोगुना करने का ठेका कंपनियों के पास है|

कंपनी फिक्स्ड डिपाजिट में अच्छे ब्याज का वादा ललचाता है| बड़ी कंपनी का नाम आपको आश्वस्त करता है| मगर हाल में कंपनी डिपाजिट में लोग बुरी तरह फंसे हुए हैं और कंपनियां कैश क्रंच यानि नगदी की कमी की गहरी खाई में धंसी हुईं हैं| कई जानी मानी कंपनियां नगद पैसे की कमी के चलते ट्रिब्यूनल के पास जाकर पैसा वापसी का समय बढ़वाने में लगी हैं|

हाल में एक सज्जन मिले, जो तीन चार साल पहले किसी बड़ी कंपनी में “की मैनेजरियल पेरसोनेल” कहे जाने वाले एक ऊँचे पद से रिटायरमेंट लेकर आये थे| रिटायरमेंट फण्ड में से ढेर सारा पैसा किसी और कंपनी के फिक्स्ड डिपाजिट में फिक्स्ड कर दिया| जब वापसी का टाइम आया तो कंपनी ने बोला इन्तजार करो, हम ट्रिब्यूनल से टाइम मांग कर आते हैं| सरकार ने बोला कंपनी ट्रिब्यूनल कंपनी ट्रिब्यूनल से टाइम मांग कर आती है| भगवान ने बोला धीरज धरो| खैर बाद में पैसा मिल तो गया, मगर जरूरत के समय पर नहीं|

कंपनी फिक्स्ड डिपाजिट आज सबसे अधिक रिस्क का निवेश है| पिछले कुछ समय में सरकार ने कुछ कदम उठाये हैं निवेशकों के हित में|

पहला कदम है, फिक्स्ड डिपाजिट लेने वाली कंपनी को क्रेडिट रेटिंग लेनी होती है| यह रेटिंग मात्र एक आकलन है और यह रिस्क का मोटा अंदाजा भर है|

दूसरा कदम है, डिपाजिट का बीमा| फिक्स्ड डिपाजिट लेने वाली कंपनी को बाजार से डिपाजिट का बीमा करवाना होता है| मगर आज तक सरकार इस कदम को टालने पर मजबूर है| कारण – बीमा कंपनी कंपनी डिपाजिट का बीमा करने को अपने लिए खतरनाक मानती हैं – मतलब बेहद घाटे का सौदा| इतने बड़े भारत देश में कोई बीमा कंपनी, किसी भाई बन्धु कंपनी के डिपाजिट का भी बीमा करने को तैयार नहीं|

तीसरा कदम है, कंपनी की जायदाद की गिरवी| यह गिरवी, कंपनी के डिपाजिट ट्रस्टी के नाम पर रखी जानी है|

चौथा कदम है – निवेशक जागरूकता| सरकार ने कंपनियों को कहा है कि वह निवेशकों को भेजे जाने वाले कागजातों में एक दावात्याग यानि डिस्क्लेमर डालें| डिस्क्लेमर की भाषा पढ़िए और सुरक्षित रहिये –

“यह स्पष्ट रूप से समझा जाये कि रजिस्ट्रार के पास परिपत्र (फॉर्म) अथवा विज्ञापन के प्ररूप में परिपत्र फाइल करने को यह न माना जाये कि उसे रजिस्ट्रार अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा संस्वीकृत अथवा अनुमोदन दिया गया है| रजिस्ट्रार अथवा केन्द्रीय सरकार की किसी भी जमा स्कीम की वित्तीय सुदृढ़ता के लिए, जिसके लिया जमा स्वीकार या आमंत्रित की गई है अथवा विज्ञपन के प्ररूप में परिपत्र में दिए गए विवरणों या मतों की सत्यता के लिए कोई जबाबदेही नहीं है| जमाकर्ता जामा स्कीमों में निवेश करने से पूर्व पूरी सतर्कता बरतें|”