किनाया – मनीषा कुलश्रेष्ठ


इस किताब को पढ़कर एक बात तो साफ है – तुर्की और वहाँ बिखरी पड़ी यूनानी सभ्यता से आप को मुहब्बत हो जाती है। अगर आप इस किताब को पढ़ते समय तुर्की घूमे और यूनान छोड़ आए, तो आप उन इशारों तक नहीं पहुँचे जिन तक यह किताब आपको ले जा सकती है। किनाया यानी संकेत – जो सीधे नहीं होते, आपको उन्हें सुलझाना और खोलना पड़ता है।

इस का उपशीर्षक है – तीसरे पहर की सिम्फ़नी – इस उपन्यास को पढ़ते हुए मैं सोच पा रहा हूँ – ज्ञात इतिहास की सभ्यताएं अपने तीसरे पहर में है – ग्रीक साम्राज्य, तुर्क खलीफ़ा और अब एक बार फिर एशिया व यूरोप के बीच झूलता तर्कीए, साथ में साइप्रस और यूनान। खैर, सब यह इशारे करना इस खूबसूरत उपन्यास का सीधा मकसद तो नहीं लगता।

यह तो जीवन के तीसरे पहर की एक त्वरित मगर संभली हुई सुंदर प्रेम कथा है, जहाँ अनुभव का ठहराव है और बौद्धिक जिज्ञासा का भटकाव है। जी, इसमें पात्र प्रेम पिपासु नहीं ज्ञान पिपासु है। यह उपन्यास कथा और कथेतर के बीच संवाद करता हुआ वर्तमान और पुरातत्व से भी संवाद करता है। यह उपन्यास आधुनिक विचारशील वयस्क प्रेम की एक परिभाषा गढ़ने में सफल रहा है।

न सिर्फ उपन्यासकार बल्कि उपन्यास के सभी प्रमुख पात्र गज़ब के बौद्धिक (बुद्धिजीवी कहने से बचते हुए) हैं। सकारण, यह उपन्यास बहुत से सूक्ति वाक्यों से भरा हुआ है और अपने विन्यास में यह सूक्त कविता करते हैं।

इस उपन्यास में मेरी एक प्रिय बात और है – खूब सारे पेय, खाद्य और पकवान – मेरे लिए तो खाद्य पर्यटन ही सबसे बड़ा पर्यटन है। और यहाँ तो हर कुछ पन्नों के बाद कुछ न कुछ स्वादिष्ट पेय या खाद्य हैं। यह कहते मुझे संकोच नहीं करना चाहिए कि इसका तेरहवाँ पृष्ठ पढ़ने के बाद मैंने बेहद स्वादिष्ट डकार ली और फिर बहुत दिनों बाद असीमित खाया।

मनीषा कुलश्रेष्ठ के लेखन के प्रमुख आयाम शोध और घुमक्कड़ी ही रहे हैं। अपनी रचनाओं में कथावस्तु और ज्ञानवस्तु को साधना उनका अधिकतर श्रम लेता है। इस उपन्यास में उन्होंने अपनी कथावस्तु और ज्ञानवस्तु को सौन्दर्य के साथ साधने में पूरी सफलता प्राप्त की है।

इस उपन्यास का एक बहुत खूबसूरत पहलू है अंतरंग पलों का सौन्दर्यपूर्ण वर्णन। अश्लीलता अपनी कोई झलक तक नहीं दिखा पाती। किसी भी रचनाकार के लिए इसे साधना दुष्कर है। यह उपन्यास इन वर्णन में उत्तेजना नहीं शांति और प्रेम प्रदान करता है।

इस उपन्यास को पढ़ते हुए एक बात और मन में आती है अगर हमारे विद्यालय किसी गूढ़ विषय को इस तरह किसी प्रेम कहानी के साथ पढ़ते पढ़ाते तो कौन कक्षा छोड़ बाहर भटकता।

ऐश्वर्य मोहन गहराना

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