जूते


मेरे पिता उस दौर में जन्में थे, जब (उनके हिसाब से) जूते की पालिश की चमक आपके भाग्य की चमक को दर्शाती थी।
पापा जब भी चमकदार जूता देखते, खरीद लेते।
मगर बाद में उन्हें पोलिश करने का समय नहीं निकाल पाते।

यह बात  नीचे दी फेसबुक पोस्ट  की वजह से याद आई|

 

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