जलता हुआ घर


जलता हुआ घर
याद दिलाता है
जब जलाए थे 
घर मेरे बंधुओं ने

हर्षित हुआ था मैं
ऋषि-शिशु का रुदन
श्रवण संगीत सा
लगा था मुझे

आज मेरी शिशु
चिर-शांत हुई
वह असह संगीत
चिल्लाते हुई

हे हनुमान!
क्षमा करना
तुम स्वयं को 

मैं स्वयं को|
समस्त स्वमेव स्वयं||