श्वेतकेश


श्वेतकेश अनुभव की कोई उद्घोषणा नहीं है, परन्तु अनुभव का प्रतीक अवश्य माना जाता है| ईश्वर की कृपा से मुझे मात्र चौदह वर्ष की अवस्था में यह अनुभव प्रतीक प्राप्त हुआ| दो चार लट इस तरह सफ़ेद हुई कि उसका श्रेय हमारे छोटे से शहर के बड़े नामी से केश-विन्यासक को मिला| चरण पादुका से मेरी और शब्द श्लोकों से निरपराध केश-विन्यासक की सेवा हुई| केश-विन्यासक महोदय कुपित होकर मुझे अपनी गली में देखकर भी लाल पीले होने लगे| जब केश दीर्घकाल तक भी काले न हुए तब परिवार में चिंता हुई| 

बीस की वय तक इतने बाद सफ़ेद हुए कि केश काले करने प्रारम्भ हुए| जब जीवन की पच्चीसी संभालने का समय था, तब मैं चिकित्सालय के चक्कर लगा रहा था| अलीगढ़ विश्वविद्यालय के तिब्बिया कॉलेज चिकित्सालय के इलाज से प्रारम्भ हुआ| जीवन के किन्तु परन्तु के चलते एक दिन मेरी समस्या का उपचार करने वाले एसोशिएट प्रोफ़ेसर साहब दो तीन महीने के लिए अमेरिका के किसी विश्वविद्यालय चले गए| पीछे रह गए असिस्टेंट प्रोफ़ेसर साहब ने पर्चा देखा तो बोले इस युवावस्था में गठिया का इलाज क्यों करा रहे हो? गठिया? मुझे लगा कि दोनों में से कम से कम सठिया गया है| लाभ हानि के फेर में दोबारा न गया|  मेरे श्वेत केशों को मेरी यह लापरवाही बहुत रास आई| जब तक कुछ समझ आता, इलाज छूट चुका था| 

वर्ष बीतते रहे, हम केश काले करते रहे, सफ़ेदी झाँकती रही| दाढ़ी मूंछे जरूर विशुद्ध कृष्णवर्णी रहीं| बालों के रंग का जीवन पर इतना प्रभाव रहा कि रंग करने के तुरंत बाद में अपनी आयु से पाँच वर्ष छोटा लगता तो हफ्ते भर बाद वास्तविक आयु से पाँच वर्ष बड़ा| कई बार यह भी रहा कि जो कन्या सप्ताह भर पहले मुस्कुरा कर प्रेम से मिलती वही अगले सप्ताह पूरे आदर से पेश आती| 

जब आप दस बीस साल बाल रंगने के बाद धीरे धीरे झुंझलाहट पैदा होने लगी| एक दिन तय किया, अब बस| नकली रंग का नकली जीवन कब तक जिया जाए| वास्तविकता को वास्तविक जीवन मे सरलता से स्थान नहीं मिलता| समाज और सभ्यता कि चिंता में हो हल्ला करते लोग, वास्तविकता का मज़ाक उड़ाने में कुशलता का परिचय देते हैं| कई बार ऐसा होता है कि मुझे बूढ़ा बाबा कहने वाले लोग रंग रोगन के बाद भैया पर उतर आते| हाल फ़िलहाल बगैर लीपापोती और लीपापोती के बाद कि मेरी उम्र मे अंतर बीस तीस का महसूस होता है| मैंने अपनी इस खूबी का प्रयोग बखूबी किया भी है| मैंने सफेदी को अपने अतिशय अनुभवों कि गवाही देने मे कई बार प्रयोग किया| बिना किसी झूठे प्रदर्शन के कई बार मुझे अनुभवी और समझदार माना गया| 

पिछले दो वर्षों में करोना के चलते रंगने सजने का बहुत दबाब नहीं रहा| कई तरह के प्रयोग करने के लिए लोग स्वतंत्र रहे| पूरे डेढ़ वर्ष के बाद मैंने पास के एक केश- विन्यासक से सेवाएं प्राप्त कीं| केश कतरने के बाद उन्होने बोला वाह, क्या शानदार रंग निकल कर आया है आपके बालों का| पूछिए मत, मेरे सरल हृदय पर क्या बीती| जब  केश- विन्यासक महोदय को लगा, ग्राहक को बात अच्छी नहीं लगी तो वह अपनी सेवा पुस्तिका लेकर आया और बोला, आपके जैसे रंग के बाल करने के लिए हमारी संस्था दो हजार रुपये लेती है| 

बलुए रंग के खिचड़ी बाल के लिए भी कोई इतना खर्च करता है क्या?