शहरी रोजगार योजना कितनी जरूरी?


30 मई 2022 बिज़नस स्टैंडर्ड दिल्ली हिन्दी पृष्ठ 6

हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से शहरी इलाकों में रोजगार के लिए पलायन होता है| इसमें से एक बड़ी संख्या में पलायन गैर-महानगरीय शहरों के लिए होता है| यह सभी पलायित लोग रोजगार की तलाश में आते हैं और इनके पास रोजगार मिल पाने की कोई गारंटी नहीं होती| 
दूसरा, कोविड उपरांत आर्थिक हालात में असंगठित क्षेत्र में रोगजार असुरक्षा बहुत बढ़ी है| रोजगार के अवसर यदि कम नहीं तो कठिन अवश्य हुए हैं| 

ऐसे में इन रोजगार विहीन लोगों के अपराध की ओर कदम बढ़ाने का खतरा पैदा होता है| जो लोग अपराध की ओर नहीं जा पाते उन्हें कुपोषण आदि का सामना करना होता है| इन लोगों के पास शहरों में घर आदि न होने से सड़कों और खाली जगह पर इनके अवैध आवास भी खतरा पैदा करते हैं|
इस लिए हमें शहरी रोजगार योजना की आवश्यकता है| यदि यह योजना छोटे और मँझोले शहरों में ठीक से लागू होती है तो महानगरों की ओर पलायन में भी कमी आएगी| वास्तव में इस योजना की आवश्यकता छोटे और मँझोले शहरों में इसलिए भी अधिक है क्यों कि महानगरों में लगातार चलने वाली योजनाएँ वहाँ सरकारी तौर पर समुचित रोजगार उत्पन्न करतीं हैं| छोटे और मँझोले शहरों में इस योजना के लागू होने ने उन शहरों में मूलभूत सुविधाओं की ओर भी काम होगा और विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी|