घटते वेतन की अर्थ-व्यवस्था


सामान्य घरों और विराट कंपनियों की अर्थ व्यवस्था को आप खर्च कम कर कर बचा सकते हैं परन्तु सरकार खर्च कम कर कर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बचा रही हैं या डुबा रही है यह सरल प्रश्न नहीं है|

विश्व-बंदी ३० अप्रैल


इस बार किसी को वेतन का इन्तजार नहीं है, वेतन कटौती की बुरी तरह आशंका है| देश का हर अधिकारी कर्मचारी अपने मोबाइल में यह देखना चाहता है इस बार वेतन कितना कटकर आ रहा है|

नाकारा सरकारी कर्मचारी या व्यवस्था


किसी भी व्यस्त रेलवे स्टेशन की टिकिट खिड़की पर जाइये| एक लम्बी लाइन लगी होगी| परेशानहाल, बेचारे, थके – मांदे खीजते, पसीने से तर-बतर आम जनता की| उस लाइन में लगे सभी पचास लोगों को एक ही उम्मीद होती है – जल्दी टिकट मिलजाने की| एक ही देवता होता है – बुकिंग क्लर्क| एक हीपढ़ना जारी रखें “नाकारा सरकारी कर्मचारी या व्यवस्था”