हँसते इश्कियाते मुस्कुराते


मुद्दा तो यही है न, इश्क़ और हँसी पर लिखना है| वो भी अपने “बैटर हाफ” वाला इश्क़; यानि, वो इश्क़ जो होता है तो कोई बताता नहीं, नहीं होता तो सब बताते हैं| तो भाई, बैटर हाफ के साथ, इश्क़ की ईमानदार बात उन्हीं दिनों सो सकती है जब वो वास्तव में बैटर हाफपढ़ना जारी रखें “हँसते इश्कियाते मुस्कुराते”

महंगी गाड़ी और हीरा


एक प्रसिद्ध फ़िल्मी संवाद है; “अगर लड़की स्कूटी पर हो तो प्यार हो जाता है, मगर मर्सडीज़ में हो तो करना पड़ता है|” साथ ही एक पुरानी कहावत भी है; “लडकियों का सच्चा दोस्त हीरा ही होता है”| अपने विद्यार्थी जीवन से ही हम उन युगल को देखते आयें हैं जिनमें एक पक्ष प्रायः पढाई,पढ़ना जारी रखें “महंगी गाड़ी और हीरा”

मोदी और विवाह


नरेन्द्र मोदी के विवाह के बारे में जबरन दबाये और उठाये जाते विवाद से केवल दो बातें सामने आतीं है: १.      भारतीय समाज में बाल विवाह न केवल दो व्यक्तिओं बल्कि तो परिवारों को कई दशक का दुःख देने वाली बुराई है जिसे समाप्त होना चाहिए| २.      धार्मिक अतिवादिता न तो किसी को तलाक लेनेपढ़ना जारी रखें “मोदी और विवाह”

विवाह, प्रेम और कामुकता


  यह प्रेममयी सप्ताह है| प्रेम आज सबसे कम चर्चित और सबसे अधिक विवादास्पद शब्द है| धार्मिक कट्टरपंथियों  ने इसे ममता, वात्सल्य, स्नेह, मित्रता और आदर का पर्याय बनाने का प्रयास किया है तो सांसारिक अतिवादियों ने कामुकता का| विवाह और प्रेम की आपसी स्तिथि तो और भी खराब है| विवाह जहाँ धार्मिक या अधिकपढ़ना जारी रखें “विवाह, प्रेम और कामुकता”

सहमति और अपराध


पिछले एक वर्ष में हमारे देश में सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य में जिस शब्द की सबसे अधिक कमी खली वह है: “सहमति”| वर्ष के प्रारंभ में बलात्कार के सन्दर्भ में सहमति शब्द की कमी दिखाई दी और अंत में “समलैंगिक संबंधों” के सन्दर्भ में| कानूनी दावपेंच के बाहर, बलात्कार की परिभाषा बहुत ही सरल है| किसीपढ़ना जारी रखें “सहमति और अपराध”