कंपनियों द्वारा चुनावी चंदा देने के कानून में सुधार का समय


हाल में भारत सरकार के द्वारा कम्पनी कानून में सुधार के लिए सलाह देने के लिए गठित की गई समिति ने अपनी सिफारिशें सरकार को एक फरवरी २०१६ को सौप दीं| सरकार यद्यपि इन प्रस्तावों और सुझावों के अनुरूप कानून बनाने या कानूनी सुधार करने के लिए बाध्य नहीं है, परन्तु सभी सम्बंधित पक्षों (शायदपढ़ना जारी रखें “कंपनियों द्वारा चुनावी चंदा देने के कानून में सुधार का समय”

डायरेक्टर साहब


निवेशक जागरूकता श्रंखला ४   अभी हाल में मेरे पास कुछ ऐसे मामले आये जिनमे साधारण लोग कंपनी का डायरेक्टर बनने के लालच में पैसा गवां बैठे| यहाँ चालक लोगों में जल्दी तरक्की का रास्ता देखने वाले, पढ़े लिखे, नौजवानों को अपने जाल में फंसाया था|     एक मामले में कुछ नए लोगों नेपढ़ना जारी रखें “डायरेक्टर साहब”

नकली दोस्त


निवेशक जागरूकता श्रंखला ३  कहते है खराब या नकली दोस्तों से तो एक अच्छा दुश्मन बेहतर है| साथ ही सच्चाई यह है कि आज बिना मतलब के कोई दोस्ती भी नहीं करता| सबकी बात ध्यान से सुनें, समझें, मगर अपना दिमाग जरूर लगाएं| अगर बात आपकी समझ के परे है तो उसे समझने की फालतूपढ़ना जारी रखें “नकली दोस्त”

दोगुना पैसा


निवेशक जागरूकता श्रंखला २   क्या कोई पैसा दुगना कर सकता है? जादू से या किसी और तरह से? मुझे तो आजतक कोई ऐसा इंसान या भगवान् नहीं मिला| क्या रामायण में भगवान् राम में अपने लिए जादू से, तंत्र – मंत्र से कंद मूल फल या पैसा पैदा किया? कहते हैं वो तो भगवान्पढ़ना जारी रखें “दोगुना पैसा”

बचत और महंगाई


निवेशक जागरूकता श्रंखला १ हम कमाते किस लिए हैं; खर्च करने के लिए| मगर हम सारी जिन्दगी कभी नहीं कमाते| जीवन के पहले बीस पच्चीस साल हम कमाने लायक नहीं होते और बाद के पंद्रह बीस साल कमाने लायक नहीं रहते| कुछ खर्चे रोज होते है, कुछ हर महीने तो कुछ हर साल.. कुछ कबपढ़ना जारी रखें “बचत और महंगाई”