चा बार, कनॉट प्लेस


परिचित पूछते हैं कि क्या कभी कभी चाय पीने वाले को भी चाय के लिए पसंदीदा जगह ढूढ़नी पड़ती है| मुझे लगता है, चाय बेहतर हो तब ही उसका असली मजा है| चा बार, चाय के लिए दिल्ली में मेरी पसंदीदा जगह में से एक है| जब मैं पहली बार गया था तब ऑक्सफ़ोर्ड बुकपढ़ना जारी रखें “चा बार, कनॉट प्लेस”

चिदंबरम’स न्यू मद्रास होटल, खन्ना मार्किट


जब से मैं लोदी रोड इलाके में रहने आया हूँ, यह मेरा पसंदीदा भोजनालय है| दिल्ली शहर के कई बड़े नामी दक्षिण भारतीय भोजनालय, मेरी राय में, स्वाद में इसके मुकाबले नहीं ठहरते| हर महीने मैं एक बार यहाँ से कुछ न कुछ गृह वितरण पर मंगाया जाता है| भोजन घर मंगाने का हमें थोड़ापढ़ना जारी रखें “चिदंबरम’स न्यू मद्रास होटल, खन्ना मार्किट”

गोविंदा का छप्पन भोग


प्राचीन भारत में व्यवसायी धार्मिक हुआ करते थे आजकल धर्म व्यवसायिक हो गए हैं| लम्बे समय से कुछ धर्म-सम्प्रदाय मात्र अपने अनुयायियों के लिए उत्पाद बनाते और बेचते रहे हैं| इससे इनके आश्रम, मठ, मंदिर, मस्जिद के खर्चे निकल जाते थे| महंगे प्रसाद और ऊँचे चंदे देने के बाद मिलने वाले भोजन पर चर्चा करनापढ़ना जारी रखें “गोविंदा का छप्पन भोग”

इन्द्रप्रस्थ का राजतिलक


  बार बार.. हर युग में.. युद्ध होते हैं| अधर्म के सहारे, धर्म युद्ध लड़ें जाते हैं| प्रत्येक मानव को देवराज इंद्र का आसन चाहिए| निर्विवाद, अपराजेय आसन.. भोग, विलास और अप्सराएं| इन्द्रासन तक पहुँचने का मार्ग, इन्द्रप्रस्थ होकर जाता है| इन्द्रप्रस्थ का राजमुकुट भी तो स्वर्ण आभासित पुरुस्कार है| अहा! पुरस्कार के लिए प्रतियोगिताएंपढ़ना जारी रखें “इन्द्रप्रस्थ का राजतिलक”

रेलवे की साजिशाना लूट


    जी हाँ| मैं यही कह रहा हूँ कि हमारी प्यारी “भारतीय रेल” हमें साजिश कर कर लूटती है| और मेरे पास ये कहने की पर्याप्त आंकड़े है, जो मैंने खुद रेलवे से सूचना के अधिकार का प्रयोग कर कर प्राप्त किये है| मैंने अपनी आँखों से इस लूट को देखा जिसका विस्तृत ब्यौरापढ़ना जारी रखें “रेलवे की साजिशाना लूट”