होली का संस्कृतितत्त्व


होली को जब भी रंगों का त्यौहार कहा जाता है, हम धर्म की बात नहीं, बल्कि संस्कृति की बात कर रहे होते हैं| होली, जैसा कि नाम से मालूम होता है – बुआ होलिका के दहन और भतीजे प्रहलाद के बच जाने का उत्सव है| यह होली की धार्मिक कथा है| रंगोत्सव के रूप मेंपढ़ना जारी रखें “होली का संस्कृतितत्त्व”

मेरा वाला संत


मामला यह है ही नहीं कि कोई व्यक्ति संत है या नहीं है| सोशल मीडिया पर सारा मामला “मेरा वाला संत” का है| गलतियाँ, पाप, सजाएं और प्रायश्चित सामान्य से लेकर संत व्यक्ति को लगे ही रहते है| मानव है तो उसके पास मन भी है, गुण अवगुण भी| पहले भी संत, महंत, सन्यासियों, साधुओंपढ़ना जारी रखें “मेरा वाला संत”

अनगढ़ दाढ़ी और भेदभावी पूर्वधारणाएँ


इतनी बुरी तरह से जन मानस में घर कर चुकीं हैं कि जब तक खुद उसका शिकार नहीं होते, हमें इस भेदभाव का बोध नहीं होता| अभी हाल में मैंने अपने शौक के लिए दाढ़ी बढ़ाने का निर्णय लिया| अब मेरी नई नवेली अनगढ़ दाढ़ी को भी बन ने संवरने की जरूरत होती है| इसपढ़ना जारी रखें “अनगढ़ दाढ़ी और भेदभावी पूर्वधारणाएँ”

पाप और अपराध


  धर्म का लक्ष्य हमें मोक्ष की ओर ले जाना हैं| यदि हम ध्यान से समझें तो धर्म का अंतिम लक्ष्य सृष्टि के समस्त जीव; मानव, पशु, कीट, पादप, जीवाणु और विषाणु को मोक्ष दिला कर सृष्टि को समापन तक ले जाना है| क्या राज्य का लक्ष्य मोक्ष है? नहीं; राज्य का मूल लक्ष्य समाजपढ़ना जारी रखें “पाप और अपराध”

ईश्वर पर सुंदरराजन की हत्या का आरोप


  मृत्यु जीवन की अंतिम सच्चाई है, इसे कभी न तो झुठलाया जा सकता है| परन्तु मृत्यु के पीछे के कारण कई बार बेहद महत्वपूर्ण ही जाते है| एक सामान्य मृत्यु सदैव स्वागत योग्य है| बीमारी और दुर्घटना में मृत्यु सदैव दुःखद है| परन्तु हत्या आदि सदा ही मृत्यु के दुःखद कारण है, जिन्हें अभीपढ़ना जारी रखें “ईश्वर पर सुंदरराजन की हत्या का आरोप”