विश्व-बंदी ७ मई


उपशीर्षक – करोना काल में कार्यालय सुरक्षा

जिन चिंताओं का निदान सरलता से संभव है, उन्हें नकारात्मक विचार नहीं कहा जा सकता| करोना काल में असुरक्षित कार्यालय की चिंता इसी प्रकार की चिंता है| सुरक्षा का सकारात्मक विचार है|

दिल्ली महानगर में करोना का शिकार हुए लोगों में एक हिस्सा उन लोगों का है, जो इस से लड़ने के लिए सड़कों या अस्पतालों में तैनात रहे है| हो सकता है इनके बचाव के लिए कुछ और कदम उठाए जा सकते थे, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि अर्थव्यवस्था खोल दिए जाने की स्तिथि में अन्य कार्यालय भी बीमारी फैलायेंगे| परन्तु असावधानी भयाभय स्तिथि उत्त्पन्न कर सकती है|

सामान्यतः सुरक्षित माने जाने वाले कार्यालयों को लेकर आम अधिकारीयों, कर्मचारियों और उनके परिवारों में अधिक चिंता है| क्योंकि इस प्रकार के कार्यालयों में लापरवाही का स्तर अधिक पाया जाता है|

मेरा स्पष्ट मत है, इन कार्यालयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही के कारण किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बीमारी या एकांतवास का सामना करना पड़ता है तो इसकी आपराधिक जिम्मेदारी उस कार्यालय या संस्था के कार्यपालक अधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों की होगी – कंपनी के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी और निदेशक मंडल, संस्थाओं के मामले में सचिव और कार्यपालक कार्यकारिणी|

सुरक्षा के दो स्तर हैं जिनका पालन होना है – भले ही वह सरकारी दिशानिर्देशों का भाग हो या न हो: पहला कार्यालय स्तर पर और दूसरा कर्मचारी से सुरक्षित आवागमन को लेकर|

कार्यालय स्तर पर:

  • जबतक असंभव न हो जाए, अधिकारी व कर्मचारी घर से काम करें| उन्हें अपने सप्ताह से ४० ४५ घंटे स्वयं सुनने की सुविधा दें परन्तु कार्य अवश्य पूरा करवाएं|टीसीएस का उदहारण लेकर चलें|
  • कार्य के आवश्यक उपकरण – कलम, कंप्यूटर, काग़ज आदि कार्यालय दे सकता है और अगर अधिकारी व कर्मचारी अपने निजी उपकरण प्रयोग करता है तो मानदेय दिया जा करता है|
  • केवल स्वस्थ्य अधिकारी व कर्मचारी को ही कार्यालय आने की अनुमति दें| सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को दैनिक स्वास्थ्य सूचना दर्ज करने के लिए कहा जा सकता है|
  • हर अधिकारी व कर्मचारी को अपने साथ रह रहे परिवारीजनों के स्वस्थ्य की सूचना देने की अनुमति रहे और अगर साथ रह रहे किसी परिवारीजन को स्वास्थ्य सम्बन्धी असुविधा या कठिनाई महसूस हो तो सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी को तुरंत घर से ही कार्य करने के लिए कहा जाए|
  • कार्यालय में तापमापक, साबुन, सेनिटाईज़र, जल, पेय जल, आदि की सम्पूर्ण व्यवस्था हो| सफाई का उच्च कोटि का प्रबंध हो| कड़ाई से दैनिक उच्चस्तरीय जाँच सुनिश्चित हो|
  • हर व्यक्ति मास्क, मुखोटे, घूँघट, पर्दा, बुर्का, हिज़ाब, चादर, दुप्पटे, अगौछे, गमछा आदि का अवश्य प्रयोग करे|
  • यथा संभव अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यालय पहुँचने और निकलने के समय अलग अलग हों| भोजनावकाश समय भी भिन्न रहे|

आवागमन स्तर पर

  • अधिकारी व कर्मचारी घर से निकलने से एक घंटे पूर्व और पहुँचने के एक घंटे बाद तापमान ले और स्वस्थ्य दर्ज करे|
  • भीड़ से बचे| कार्यालय प्रदत्त या निजी वाहन का प्रयोग हो| अनावश्यक गप्पों, मुलाकातों, बैठकों और सम्मेलनों से बचें|
  • बिना स्वास्थ्य जाँच किए किसी अधिकारी व कर्मचारी को कार्यालय में प्रवेश न करने दिया जाए|
  • हर अधिकारी व कर्मचारी को यह दर्ज करना अनिवार्य हो कि वह आज का काम घर से क्यों नहीं कर सकता था? कार्यालय में उसकी कितने समय के लिए उपस्तिथि आवश्यक है और उसके बाद उसे घर बिना दोबारा पूछे घर जाने की सामान्य अनुमति होनी चाहिए|
  • सरकारी छुट्टियों के दिन कार्यालय कतई न खुलें| काम की दैनिक लेखा-जोखा लिया जा सकता है|

सभी उच्च अधिकारीयों के लिए यह आवश्यक है कि कम से कम अपने स्तर से तीन स्तर नीचे के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर निगाह रखें और उनसे अधिकतम कार्य घर से ही करवाने का प्रबंध करें|

अगर कोई भी अधिकारी, संस्था, कंपनी, कार्यालय या विभाग सामान्य आवश्यक सावधानियों का पालन नहीं करता तो आपराधिक कार्यवाही के लिए तैयार रहे, भले ही सजा आपको सेवानिवृत्ति के बाद ही क्यों न मिले| न तो सरकार और न ही सरकार के दिशा-निर्देश (भले ही आधे- अधूरे रह गए हों) इस आपराधिक लापरवाही की सजा दिलवाने से आपको रोक पायेगी, जब तक की सामान्य बुद्धि युक्ति सुरक्षा न अपनाई गई हो|

अगर सुरक्षा के सामान्य बौद्धिक नियमों का पालन करने की ठान ली जाए तो सावधानियाँ न तो कठिन हैं न ही महंगी हैं|

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गृहकार्यालय में गृह से समन्वय


जब ठीक पंद्रह दिन पहले गृहकार्यालय के विषय पर एक चलता फिरता सा आलेख लिखा था तब सोचा न था कि यह बेहद गंभीर विषय है| कालचक्र घूमा और दुनिया बदलने लगी| कल अपने कानूनपरक ब्लॉग पर घर से काम करने के अपने अनुभव लिखे तो बहुत सराहना मिली और जिज्ञासाएं भी सामने आईं| कठिन समय है| हम सब के सामने घर पर रह कर बहुत श्रम करने की चुनौती है वर्ना अर्थव्यवस्था ही नहीं मानवता को भी खतरा हो सकता है| स्वास्थ्य और अर्थव्यस्था बनाये रखने की यह बड़ी चुनौती है|

घर से काम करते समय सबसे बड़ी चुनौती है घर पर समूचा ध्यान देना| परिवार का सहयोग कठिनाई से मिलता है| आसन्न संकट में सम्बन्धी, परिचितों और परिवार को घर से काम करने की महत्ता समझाने की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि मुझे समझना पड़ता था| अपितु परिवार को गंभीरता से यह बताने की जरूरत है कि आप छुट्टी पर नहीं है| यह काम का कठिन समय है और हमारी भूमिका अर्थचक्र को चलाये रखने वाले सिपाही की है|

घर से काम करते समय आपको दो महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं – पहला, समय जो कार्यालय की आवाजाही से बचता है और दूसरा, समय जो आपके चुन सकते हैं| (Time and Timing)

जिस दिन से आपको घर से काम करना शुरू करना है उस से पहले दिन परिवार के साथ बेहद शानदार समय बिताएं| जो पहले ही घर से काम कर चुके है वह आज शाम ऐसा कर सकते हैं| बेहद शानदार नींद लें| ध्यान दें पहले दिन आपको आपको आलस्य का सामना करना होगा, इसलिए नींद पूरी होनी चाहिए|

दूसरा; मीठा, नमकीन, चाय नाश्ते की इच्छा पर लगाम रखनी होगी| घर में इन सब चीजों की असीमित आपूर्ति हो सकती है परन्तु इसके चार बेहद बड़े नुक्सान हैं:

  • खाद्य पदार्थ का अनावश्यक उपभोग;
  • संभावित मोटापा और बीमारियाँ;
  • समय की बर्बादी; और सर्वाधिक महत्वपूर्ण –
  • पहले परिवार कार्य के प्रति आपको दायित्वहीन मानेगा बाद में कार्यालय भी ऐसा मानने को मजबूर होगा| क्योंकि चाय नाश्ते के चक्कर में आप काम पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाएंगे|

अपने समय का बाकि परिवार के समय के साथ सुर-ताल मिलाना होगा| शेष परिवारी जन का घर से काम करने के दिन कौन से हैं; बच्चों की धमा – चौकड़ी का समय क्या है; दोपहर को सोने और टेलिविज़न देखने के समय क्या हैं? विशेष महत्त्व की बात यह है कि परिवार में कौन कब अपने कार्यालय के साथ सामूहिक विचारविमर्श (tele –conferencing or Video-conferencing) करने वाला है?

आप समूचे परिवार को ध्यान में रखकर ही अपना काम कर पायेंगे| यहाँ शहंशाह बनने की कोशिश न करें| छोटे बच्चों का ध्यान प्रेमपूर्वक सही स्थान पर लगाकर रखें|

गृहकार्यालय


अंग्रेजी का ऑफिस मुझे अनावश्यक ही महत्वपूर्ण बना दिया गया शब्द लगता है| ऑफिस की आवश्यकता पैदा करना मानवीय असह्ष्णुता का उदहारण है| लम्बे समय तक राजा रंक व्यापारी किसान सब अपने अपने घर से काम करते थे|

हिंदी का शब्द कार्यालय अधिक महत्वपूर्ण है – कार्यालय – कार्य का घर| घर का वह भाग जहाँ बैठकर आप जीविका के लिए कार्य व्यवहार करते हैं| मुझे यह परिभाषा उपयुक्त लगती है|

भारत में पुराने पुराने रईसों की पुरानी पुरानी कोठियां आज तक इस बात का प्रमाण दे रहीं हैं कि बड़े बड़े रोजगार प्रदाता अपने घर में ही अपना कार्यालय बनाये रहे| बाद में जब लोगों ने मिल कर काम करना शुरू किया होगा बाद में जब समस्या उत्पन्न हुई होगी कि किसके घर बैठा जाए|

पुराना प्रश्न है, हम किसी के दरवाजे क्यों जाएँ? कोई दूसरे का नौकर नहीं बनना चाहता|

जब से मैंने अपना काम खुद प्रारंभ किया मुझे घर से काम करना ही उचित जान पड़ा| इसके कई कारण रहे –

  • घर से कार्यालय आने जाने में समय बर्बाद न करना;
  • बचे समय का सदुपयोग;
  • शारीरिक थकान में कमी;
  • वाहन से उत्पन्न वायु, ध्वनि एवं प्रकाश प्रदुषण में कमी;
  • राष्ट्र को विदेशी मुद्रा की बचत; एवं
  • कार्यालय के लिए होने वाले अतिरिक्त खर्च में कमी|

पुराने घरों में दो बैठकों की व्यस्था होती थी| पहली बैठक व्यावसायिक आगंतुकों के लिए होती थी पर बाद में यह बैठक मर्दाना बैठक में बदल गई| दूसरी बैठक पारवारिक मित्रों के लिए थी परन्तु यह समय के साथ जनाना बैठक बन गई| समाज में महिलाओं की उठती परन्तु सीमित सामाजिक भूमिका के समय में यह वर्गीकरण व्याप्त रहा| आज जब समाज में महिला-पुरुष की स्तिथि बराबरी पर आने जा रही है मुझे लगता है कि दोनों बैठकें फिर से व्यावसायिक बैठक और पारवारिक बैठक में बदल जाए तो बेहतर है| व्यावसायिक बैठक में आप जीविका अर्जित करते रहें|

कंपनियों और अन्य व्यावसायिक संगठनों के लिए गृहकार्यालय का विचार सरल नहीं है, उनके लिए कार्यालय से गृहकार्य ले जाने की व्यवस्था हो सकती है|

(कोरोनावायरस के कारण गृहकार्यालय विश्वभर में चर्चा हो रही है)