कोविड की अफ़वाह


दुःख है कि शपथ जैसे नाटकों को हम पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं, परन्तु अपने सुरक्षापर्दे (मास्क) को अपनी नाक पर नहीं बिठा पा रहे|

करोनाकाल के कार्यालय योद्धा


मैंने इस करोना काल में अपने कई क्लाइंट के साथ बात की| तीन श्रेणी विशेष के कर्मचारी कार्यालय आने की अनुमति माँगते पाए गए|

भीषण लू-लपट और करोना


मैं अति नहीं कर रहा चाहता हूँ कोई भी अति न करे| न असुरक्षित समझने की न सुरक्षित समझने की| गर्मी और करोना से बचें – भीषण लू-लपट और करोना का मिला जुला संकट बहुत गंभीर हो सकता है|

विश्व-बंदी २५ मई – फ़ीकी ईद


न होली पर गले मिले थे न ईद पर| कोई संस्कृति की दुहाई देने वाला भी न रहा – जो रहे वो क्रोध का भाजन बन रहे हैं|

विश्व-बंदी २४ मई


जिस समय उत्तर भारतीय करोना के लिए गौमांस और शूकरमांस भक्षण के लिए केरल को कोस रहे थे और बीमारी को पाप का फल बता रहे थे – केरल शांति से लड़ रहा था| यह लड़ाई पूरे भारत की सबसे सफल लड़ाई थी|

विश्व-बंदी २३ मई


मजे की बात यह है कि जब भी यह इस प्रकार के मित्र तर्कपूर्ण और समझदारी की बात काम धंधे से इतर प्रयोग करते हैं तो मेरा विश्वास प्रबल रहता है कि अपने पूर्वाग्रह को थोपने का प्रयास हो रहा है|

विश्व-बंदी २२ मई


उपशीर्षक – नकारात्मक विकास – नकारात्मंक प्रयास

विश्व-बंदी २१ मई


उपशीर्षक – परदेशी जो न लौट सके
परन्तु सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि लौटा कौन कौन नहीं है?

विश्व-बंदी २० मई


उपशीर्षक –  ज़रा हलके गाड़ी हांको

क्या यह संभव है कि आज के करोना काल को ध्यान रखकर पाँच सौ साल पहले लिखा गया कोई पद बिलकुल सटीक बैठता हो?

विश्व-बंदी १९ मई


दुआ सलाम दूर की भली लगती हैं, गलबहियाँ ख़ुदा जाने|

विश्व-बंदी १८ मई


ऐसा नहीं है कि जीवन यापन का संकट केवल मजदूरों के लिए ही खड़ा हुआ है| इस संकट से हर कोई कम या ज्यादा, पर प्रभावित है| हर किसी की कमाई में लगभग तीस प्रतिशत की कमी आई है

विश्व-बंदी १७ मई


माँग होए मोती बिके, बिन माँग न चून|
रहीम अगर आज दोहा लिखते तो वर्तमान सरकार को इसी प्रकार कुछ अर्थ नीति समझाते|

विश्व-बंदी १६ मई


त्रियोदशी संस्कार के चक्कर में कई लोगों को करोना का खतरा उत्पन्न होना हमारी सामूहिक असफलता है|

विश्व-बंदी १५ मई


करोना ने भारत ने कॉर्पोरेट सुशासन के लिए बेहतरीन उपहार दिया है|अगर आप किसी  भारतीय कंपनी में अंशधारक हैं, तो यह वर्ष उस कंपनी की आम सभाओं में शामिल होने के लिए उचित वर्ष है|

विश्व-बंदी १४ मई


इस्तरी होकर आए कपड़े आज चार घंटे धूप में रखे गए, मगर पहनने से पहले की चिंता यानि भय जारी है|

विश्व-बंदी १३ मई


पिछले एक माह में में प्रवासी मजदूरों का अपने जन्मस्थानों की तरफ़ लौटने की बातें सामने आई हैं| मगर अन्य लोग भी विचार कर रहे हैं|

विश्व-बंदी १२ मई


नहीं, मैं नकरात्मक नहीं हूँ| मेरे लिए न मौत नकरात्मक है न वसीयत, बीमारी को जरूर मैं नकारात्मक समय समझता हूँ और मानता हूँ| वसीयत अपने बच्चों और शेष परिवार में भविष्य में होने वाले किसी भी झगड़े की सम्भावना को समाप्त करने की बात है|

विश्व-बंदी ११ मई


ट्रेन में न खाना, न कम्बल, न चादर – मगर लोग जा रहे हैं| और वो लोग जा रहे हैं जो लॉक डाउन हो या न हो, जहाँ हो वहीँ रुको का उपदेश दे रहे थे|

विश्व-बंदी १० मई


पूँजीपशुओं की पूरी ताकत उन्हें गुलाम की तरह रखने में लगी हुई है| मगर गुलाम बनने के लिए आएगा कौन?

विश्व-बंदी ८ मई


इस तालाबंदी के दौरान सबसे अधिक प्रयोग के बाद भी कम चर्चा में रहा है ऑफिस प्रदत्त लैपटॉप|
हर ऐसी कंपनी जिसने अपने अधिकारीयों और कर्मचारियों को लैपटॉप दिए हैं, वह इस समय सबसे अधिक सुविधाजनक स्तिथि में हैं|

विश्व-बंदी ७ मई


मेरा स्पष्ट मत है, कार्यालयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही के कारण किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बीमारी या एकांतवास का सामना करना पड़ता है तो इसकी आपराधिक जिम्मेदारी होगी

विश्व-बंदी ६ मई


हिंदुस्तान में वक़्त सिर्फ़ पञ्चांग के लिए बदलता है, इंसान के लिए नहीं|

विश्व-बंदी ५ मई


अर्थशास्त्र में इस प्रकार सुराक्रय का पुण्य प्रधानमंत्री के कोश में दान देने के समकक्ष माना जाता रहा है|

विश्व-बंदी ४ मई


मुझे कोई सभ्य तुलना समझ नहीं आ रही| तालाबंदी का सरकारी ताला अभी ढीला ही हुआ कि दिल्ली वाले सड़कों पर ऐसे निकले हैं जैसे कई दिन के भूखे कुत्ते बिल्ली शिकार पर निकले हों|

विश्व-बंदी ३ मई


जिन गिने चुने कार्यों के लिए एप बढ़िया सेवा प्रदान कर सकते हैं उनमें निश्चित रूप से “असुरक्षित संपर्क चेतावनी” और “असुरक्षित संपर्क पुनर्सूचना” निश्चित ही आते हैं| परन्तु आरोग्य सेतु के बारे में बहुत से प्रश्न हैं जो अनुत्तरित हैं|

विश्व-बंदी १ मई


करोना काल कतई सरल नहीं| कोई आश्चर्य नहीं कि लॉक डाउन के टोन डाउन होते समय श्रेय लेने के लिए श्रेय-सुखी प्रधानमंत्री जनता के सामने नहीं आ पा रहे|

विश्व-बंदी ३० अप्रैल


इस बार किसी को वेतन का इन्तजार नहीं है, वेतन कटौती की बुरी तरह आशंका है| देश का हर अधिकारी कर्मचारी अपने मोबाइल में यह देखना चाहता है इस बार वेतन कितना कटकर आ रहा है|

विश्व-बंदी २८ अप्रैल


ग़लतफ़हमी है कि धर्म भारतियों को जोड़ता और लड़ाता है| हमारी पहली शिकायत दूसरों से भोजन को लेकर होती है| इसी तरह भोजन हमें जोड़ता भी है| करोना काल में भारतीयों को भोजन सर्वाधिक जोड़ रहा है|

विश्व-बंदी २७ अप्रैल


करोना के फैलाव के साथ साथ प्रकृति का विजयघोष स्पष्ट रूप से सुना गया है| दुनिया में हर व्यक्ति इसे अनुभव कर रहा है| सबसे बड़ी घोषणा प्रकृति ने ओज़ोनसुरक्षाकवच का पुनर्निर्माण के साथ की है|

विश्व-बंदी २६ अप्रैल


लॉक डाउन कब खुलेगा? इस प्रश्न के पीछे अपने अटके हुए काम निबटाने से अधिक यह चिंता है कि हम अपनी घरेलू नौकरानी को कब वापिस काम पर बुला सकते हैं| जो लोग घर से काम कर रहे हैं उनके लिए यह जीवन-मरण जैसा प्रश्न है|

विश्व-बंदी २५ अप्रैल


हमारे लिए न तो तालाबंदी पहली है न कर्फ्यू| परन्तु पुरानी सब तालाबंदी मेरे अपने विकल्प थे| मेरे जीवन की पहली तालाबंदी बारहवीं की बोर्ड परीक्षा से पहले आई थी|

विश्व-बंदी २४ अप्रैल


क्या होता, अगर ३१ दिसंबर २०१९ को मैं आपसे कहता कि भारत को स्वदेशी और स्वालंबन के सिद्धांत की और बढ़ना चाहिए और इन विषयों पर गाँधी के विचारों पर चिन्तन करना चाहिए? शायद मैं खुद अपने आपसे सहमत नहीं होता| परन्तु… … …

विश्व-बंदी २२ अप्रैल


उपशीर्षक – न्यायलोप और भीड़हिंसा अगर समाचार सही हैं तो एक ऐसे गाँव ने जिसमें गैर हिन्दू आबादी नहीं है क्रोधित हिन्दूयों की बड़ी भीड़ ने दो साधू वेशभूषाधारियों की बच्चाचोर मानकर हत्या कर दी| मृतकों की वास्तविक साधुओं के रूप में पुष्टि हुई| कई दिनों तक भारत के दुष्प्रचारतंत्र (आप समाचार तंत्र कहने केपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २२ अप्रैल”

विश्व-बंदी २१ अप्रैल


यह लगभग सुखद परन्तु अत्यंत दुःखद समाचार था| भारत में ८० फ़ीसदी लोगों में करोना के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे| यह शायद वैसा ही है कि जैसा एचाईवी पॉजिटिव होना एड्स होना नहीं होता, पर संवाहक होना हो सकता है|

विश्व-बंदी २० अप्रैल


… … …. परन्तु यह सब अटकलें हैं| वास्तव में मेरा दिमाग यह सोच रहा है कि क्या दिल्ली जैसे महानगर सुरक्षित है? देखा जाये तो अलीगढ़ कहीं अधिक सुरक्षित लगता है| पर कब तक, कितना? … … …

विश्व-बंदी १८ अप्रैल


उपशीर्षक – नए ध्रुव  कल शाम हल्की बारिश हुई थी आज तेज हवाओं के साथ वैसी ही बारिश जैसी अक्सर फ़सल करने के दिनों में उत्तर भारत में आती रहती है| हवाएं गर्मी से राहत लेकर आईं| सूरज छिपने के साथ बादल भी कम हो गए| दिल्ली में कुल ७६ कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित हो चुकेपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १८ अप्रैल”

विश्व-बंदी १७ अप्रैल


उप-शीर्षक: संशोधित समेकित दिशानिर्देशों के साथ गृह मंत्रालय का आदेश आज जब भारत सरकार के सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का ईमेल मिला| इसमें संशोधित समेकित दिशानिर्देशों के साथ गृह मंत्रालय का आदेश दिनांक 15.04.2020  संलग्न करते हुए मंत्रालय ने आग्रह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए इकाइयों मेंपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १७ अप्रैल”

विश्व-बंदी १६ अप्रैल


रोज दरवाज़ा खटकने पर ये आशंका होती है कि यमदूत तो नहीं| सुबह सुबह देशी गाय का अमृत माना जाने वाला दूध देने आने वाला दूधवाला भी समझता है, मैं उसे और वो मुझ में यमदूत के दर्शन करने की चेष्टा कर रहा है|

विश्व-बंदी १५ अप्रैल


रोग के खतरनाक वाहक होने के उच्चतम खतरों के बाद भी, उच्च मध्यवर्ग विदेशों से अपने घर वापिस आने में सरकारी सहायता और विमान प्राप्त करने में सफल रहा| इस वर्ग का एक बड़ा तबका लॉक डाउन के बावजूद सम्बंधित राज्य सरकारों की सहायता से हरिद्वार से अहमदाबाद और वाराणसी से आन्ध्र प्रदेश वापिस पहुँचाया गया| यह सभी लोगों जहाँ रह रहे थे वहाँ इनके पास उचित रहना, खाना, देखभाल और इनका पूरा ध्यान रखने की व्यवस्था थी| परन्तु यह परिवार से दूर थे, इन्हें परिवार और परिवार को इनकी चिंता थी| क्या भारत के निम्न वर्ग के पास परिवार और पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है?

विश्व-बंदी १४ अप्रैल


उपशीर्षक – लम्बा लॉक डाउन  View this post on Instagram The #lockdown one was about to over, the lockdown 2 was inevitable, I harvested my hair myself with help of trimmer of my electric shaver causing loss of about Rs. 300 to economy and GDP. A post shared by ऐश्वर्य मोहन गहराना (@aishwaryamgahrana) on Aprपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १४ अप्रैल”

विश्व-बंदी १३ अप्रैल


उपशीर्षक – अनिश्चितता सभी चर्चाओं में एक बात स्पष्ट है| मध्य वर्ग लॉक डाउन के लिए मन-बेमन तैयार है| उच्च वर्ग को शायद कोई फर्क नहीं पड़ता परन्तु उनके लिए लम्बा लॉक डाउन अधिक कठिनाई भरा होगा| भारत के बाहर भी हालात अच्छे नहीं इसलिए उनकी चिंता है है कि किसी प्रकार काम धंधे कोपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १३ अप्रैल”

विश्व-बंदी १२ अप्रैल


उपशीर्षक – संशय और भूकम्प  शुरूआती गर्मियों उदास छुट्टियाँ का रविवार बचपन में बड़ा भारी पड़ता था| रसोई पर कुछ खास करने का दबाव रहता तो अनुभव बदलते मौसम में गरिष्ट से बचने की सलाह देता| पंद्रह दिन में किस्से कहानी, किताबें, पतंगे, पतझड़ और खडूस हवाएं नीरस हो चुके होते – ककड़ी, खरबूजा, तरबूजा,पढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १२ अप्रैल”

विश्व-बंदी ११ अप्रैल


९८% पाकिस्तानी सामाजिक कार्यों के लिए ज़कात करते हैं, और इस तरह वह पाकिस्तान के जीडीपी के १% से अधिक के बराबर की रकम सामाजिक ज़िम्मेदारी ओअर खर्च करते हैं| यह पढ़ते हुए मुझे शर्मिंदा महसूस करना पड़ा कि भारतियों द्वारा सामाजिक ज़िम्मेदारी पर अपने जीडीपी का आधा प्रतिशत भी खर्च नहीं किया जाता|

विश्व-बंदी १० अप्रैल


उपशीर्षक – स्व-मुंडन  अगर लॉक डाउन नहीं होता तो अपने शहर अलीगढ़ पहुँचे होते| शिब्बो की कचौड़ी, जलेबी हो चुकी होती और चीले का भी आनंद लेने का प्रयास चल रहा होता| शायद अपने किस्म की कुछ खरीददारी जो दिल्ली में अक्सर संभव नहीं होती, उसे अंजाम दिया गया होता| इस से अधिक यह भीपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी १० अप्रैल”

विश्व-बंदी ९ अप्रैल


उपशीर्षक – कार्य असंतुलन  आजकल पता नहीं लग रहा कि कौन सा दिन कार्यदिवस है और कौन सा छूट्टी| दीर्घ सप्ताहान्त जैसे शब्द बेमानी हो चले हैं| घर से कार्य की अवधारणा में भी गजब की गड़बड़ हो रही है| घर से काम करने की छुट्टी या घर से काम की छुट्टी या घर कापढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी ९ अप्रैल”

विश्व-बंदी ८ अप्रैल


उपशीर्षक – अर्धस्नान की पुनः स्मरण  अपनी किशोर अवस्था में मुझे बार बार हाथ धोने की आदत थी| पूजा करने, योग ध्यान करने, खाने पीने, पढ़ने बैठने, घुमने जाने आने से लेकर सोने से पहले भी हाथ मुँह धोता था| मेरे एक मित्र थे जिनको कार्यालय में हर आधा घंटे बाद उठकर हाथ धोने कीपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी ८ अप्रैल”

विश्व-बंदी ७ अप्रैल


उपशीर्षक – आराम की थकान  लॉक डाउन को बढ़ाये जाने की इच्छा, आशा, आशंका और समर्थन की मिली जुली भावना के साथ मुझे यह भी कहना चाहिए कि मैं इस से थकान भी महसूस कर रहा हूँ| साधारण परिस्तिथि में कई बार ऐसा हुआ है कि मैं महीनों घर से नहीं निकल सका हूँ| परन्तुपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी ७ अप्रैल”

विश्व-बंदी ६ अप्रैल


उपशीर्षक – भक्ति विषाणु  सरकार को करोना के साथ भक्ति विषाणु से भी लड़ना पड़ रहा है| मीडिया भी कम विषाणु नहीं| उत्तर प्रदेश के कई जिलों की पुलिस के ट्विटर हैंडल्स पर कुछ सरकारपरस्त मीडिया चेनल को निशानदेह करकर असत्य और भ्रामक खबर न फ़ैलाने का अनुरोध दिखाई दिया| भले ही इस प्रकार केपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी ६ अप्रैल”

विश्व- बंदी ५ अप्रैल


उपशीर्षक – करोना बाबा की जय  बचपन में एक झोली वाला बाबा होता है जो बच्चे पकड़ कर ले जाता है| मेरी छोटी सी बेटी को लगता है उसका नाम है कोविड| मुडगेली (बालकनी) से खड़ी होकर वो उस गंदे बाबा को पत्त्थर मार कर भागना चाहती है| वो चाहती है कि कार्टून की दुनियापढ़ना जारी रखें “विश्व- बंदी ५ अप्रैल”

विश्व- बंदी ४ अप्रैल


उपशीर्षक – निशानदेही  आज लोदी रोड पुलिस थाने से फ़ोन आया| पति-पत्नी से पिछले एक महीने आने जाने का पूरा हिसाब पूछा गया| पूछताछ का तरीका बहुत मुलायम होने के बाद भी तोड़ा पुलिसिया ही था| कुछ चीज़े शायद स्वाभाव से नहीं निकलतीं या शायद मेरे मन में पुलिस कॉल की बात रही हो तोपढ़ना जारी रखें “विश्व- बंदी ४ अप्रैल”

विश्व- बंदी ३ अप्रैल


उपशीर्षक – मोमबत्ती  मुग़ल काल में एक प्रथा थी जो सल्तनत में ज्यादा उत्पात मचाता था उसे जबरन हज पर भेज देते थे| अगर औरंगज़ेब भी जिन्दा होता तो तब्लिग़ वालों को किसी जहाज में चढ़ा कर हज के लिए भेज देता और कहता कि जब मक्का और हज खुलें तब पूरा करकर ही लौटना|पढ़ना जारी रखें “विश्व- बंदी ३ अप्रैल”

विश्व- बंदी २ अप्रैल


उपशीर्षक – मूर्खता का धर्म युद्ध  आज मानवता के संरक्षक भगवान विष्णु के अवतार श्री राम का जन्मदिन है| मानवता अपनी मौत मरना चाहती है| ताण्डव हो है| मैं मूर्खता का धर्म युद्ध देख रहा हूँ| कौन सा धार्मिक संप्रदाय ज्यादा मूर्ख है इस बात की होड़ चल रही है| पहले भारत के प्रधानमंत्री कीपढ़ना जारी रखें “विश्व- बंदी २ अप्रैल”

विश्व-बंदी ३१ मार्च


उपशीर्षक – वित्तवर्ष का अंत  कुछ घंटों में यह वित्त वर्ष बुरी यादों के साथ समाप्त होने जा रहा है| मैं आशान्वित हूँ कि नया वर्ष फिर से बहारें लाएगा| इस साल पहले दस महीने शानदार बीते| बहुत कुछ नया सीखा, किया और कमाया| मगर बही खाते कर चटख लाल रंग उड़ा उड़ा उदास सापढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी ३१ मार्च”

विश्व-बंदी २९ मार्च


उपशीर्षक – सरकारी क्षमा प्रार्थना  ट्रेन के डिब्बों को १० हजार आइसोलेशन कैंप में बदला जा रहा है? क्या अस्पताल इतने कम पड़ने वाले हैं? बिस्तरों की कमी होने पर यह उचित हो सकता हैं – परन्तु बेहद चिंताजनक है| इस समय तक हजार लोग बीमार हो चुके हैं और सौ करीब ठीक हुए हैं|पढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २९ मार्च”

विश्व-बंदी २८ मार्च


उपशीर्षक – प्रसन्न प्रकृति के दुःख  कौन कहता है कि यह दुःखभरा समय है? प्रकृति प्रसन्न है| दिल्ली के इतिहास में मार्च में कभी इतनी बारिश दर्ज नहीं दर्ज़ की गई| बसंत और वर्षा की प्रणय लीला चल रही है| यति और रति दोनों के लिए उचित समय है| इन्हीं फुर्सत के रात-दिन ढूंढने केपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २८ मार्च”

विश्व-बंदी २७ मार्च


उपशीर्षक – नीला आकाश और बिलखती सड़कें  तनाव को मुखमंडल की आभा बनने से रोकना मेरे लिए कठिन है| ७५ मिनिट की परीक्षा ५५ मिनिट में पूरी हुई| अब मैं किसी भी कंपनी में निर्देशक बन सकता हूँ| समयाभाव में अटका पड़ा यह काम पूरा हुआ| कुछ और रुके पड़े काम पूरे किए जाने है|पढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २७ मार्च”

विश्व-बंदी २६ मार्च


उपशीर्षक – कुछ नवारम्भ  होली पर ही बहुत दिनों से छूटा हुआ योगाभ्यास पुनः प्रारंभ कर दिया था| आसन प्राणायाम के मौसम भी अच्छा हैं चैत्र का महिना भी| सुबह से शरीर के बारे में सोच रहा हूँ| किसी भी प्रकार के फ़्लू-जुखाम-खाँसी के लिए गहराना परिवार का अजमाया नुस्खा है – एक कली लहसुनपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २६ मार्च”

विश्व-बंदी २५ मार्च


उपशीर्षक – पहला दिन  नवसंवत्सर, नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, उगाडी, नवरेह, सजिबू चेइरावबा कितने त्यौहार हैं आज? शांति बनी हुई है| अजान और घंटे की आवाज औपचारिकता कर कर रह गई| सड़क सूनी थीं और बहुत कम लोग निकल रहे थें| मगर बाजारों में गुपचुप भीड़ इक्कट्ठी हो रही थी|  भीड़ यानि राष्ट्रीय पराजय| पढ़े लिखोंपढ़ना जारी रखें “विश्व-बंदी २५ मार्च”