कहो शहंशाह


कहो शहंशाह,
अनुभव अपना

फंस गए थे जब

भव्य राजपथ के ऊँचे सोपान पर 

द्विदिश मध्य 

प्रजा की पिनपिनाहट में?

कहो शहंशाह

क्या स्मरण हुआ था 

उस श्वानपुत्र का
कुचला गया था जो 

राज-रथ से?

कहो शहंशाह

स्मरण हुआ था क्या
बिसरे यथार्थ का 

बलि होते अल्पमानव का
अन्य अल्पमानवों के 

कर कलमों से?

कहो शहंशाह

बचपन, मातामही, विद्यालय,
दुग्ध, दधि, छठ, राजयोग, राजहठ,

क्या स्मृति जागी विश्वेश्वर-विधाता?

कहो शहंशाह

पहचान पाये क्या

मुख अपना वा यम का?

पुराना बंदगला


गज़ब खबर थी,

जाड़ों की धूप का आना 

गुनगुने अहसास का छाना

हकीकत थी इनका इंतज़ार| 

पहन लेना पुराना बंदगला,

पुरानी गरम अचकन शेरवानी 

ओढ़ लेना लिहाफ़ फटे गिलाफ़ 

इन सबकी बची खुची गर्मी| 

बची हुई तासीर मुहब्बत की,

धीमी आंच पर तलते पकौड़े 

तेज आंच पर सिंकते दो हाथ

इनका अड़ियल अधूरापन| 

पड़े रहना गिलाफ़ ओढ़कर

चढ़ाए लिहाफ़ पर एक टाँग

रुकी मुस्कान का अलसाना| 

पिघलती हुई ख़ुशी जेहन में| 

कहवा और चाय गरम गरम

तले काजू बादाम गरम हलवे 

ढूँढना ठंडी आंच अँगीठी में| 

शिकवे जाड़ों और जिंदगी के| 

संभाल फिर फिर रख देना

सबसे गरम लबादे लोई खेस

चटख़ रंग गर्म कपड़े ऊनी

धुप्प और धूप की उलझन| 

आराम के इन्तजार में

निकल जाना जाड़े का

खा लेना गर्म रूखी रोटी| 

गज़ब खबर थी,

जाड़ों की धूप का आना 

बुढ़ापा आने से थोड़ा कम

चाय का प्याला


तुम चाय न बनाय करो तो अच्छा
चीनी दे जात है री अक्सर गच्चा
रंग ओ रंगत में लगे है हिंदुस्तानी,
स्वाद में रह जात है अंग्रेज़ बच्चा,
उबला पानी हो या पत्ती काढ़ा
स्वाद न आवे चाय का सच्चा,
डाल तो कभी अर्क ए अदरक
रूह ए तुलसी भी कभी सच्चा,
दूध पानी का तो हिसाब रख,
चाय मे न कर कोई घोटाला,
कभी तो सोच चाय मसाला
कौन पिये ये चाय का हाला?