रचनाकार

ऐश्वर्य – मोहन गहराना का जन्म उत्तर भारतीय मध्यवर्गीय परिवार में हुआ है| उनके पूर्वज जमींदार होने के साथ साथ सरकारी नौकरियों में भी रहे| सुधारवादी विचारधारा के चलते उनके पूर्वजों ने उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दू धार्मिक सुधार आन्दोलन आर्यसमाज के विचारों को अपनाया| साथ ही बीसवीं शताब्दी में आचार्य विनोबा भावे के भूदान आन्दोलन के समय में अपनी अधिकतर भूमि दान में दे दी| आज भी उनका परिवार अपने खुलेपन, वैचारिक स्वंतंत्रता और परिवर्तनशीलता के लिए जाना जाता है|

ऐश्वर्य – मोहन गहराना विज्ञान और विधि विषयों में स्नातक हैं| वह मुंबई स्तिथ भारतीय बीमा संस्थान के एसोसिएट सदस्य हैं| उनके पास भारतीय कम्पनी सचिव संस्थान, नई दिल्ली की फेलो सदस्यता है| साथ ही वह दिवाला व्यवसायी के रूप में भी पंजीकृत है|

ऐश्वर्य – मोहन गहराना दिल्ली में निजी तौर पर कंपनी सचिव से साथ साथ दीवाला व्यवसायी के पेशे में भी अभ्यासरत हैं|

लिखना, पढ़ना, गंभीर विचार  – विमर्श को सुनना और विचारों को आलोचनात्मक रूप से समझना ऐश्वर्य – मोहन के शौक और आदत हैं| वैचारिक दुर्घटना वश वह काव्यात्मक रचनाएँ भी लिख लेते हैं| ऐश्वर्य मोहन समय मिलने पर कभी कभी छायांकन करना पसंद करते हैं|

अपने विचारों में ऐश्वर्य मोहन यद्यपि ईश्वर के अस्तित्व को नकारते नहीं हैं परन्तु ईश्वर की पूजा की आवश्यकता के विचार को समर्थन नहीं देते| उनके आर्थिक विचार सामाजिक पूंजीवाद की ओर झुकाव रखते हैं|

कृपया, अपने बहुमूल्य विचार यहाँ अवश्य लिखें...

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