ब्लॉग: AishMGhrana

 सुशासन मात्र शासक का ही उत्तरदायित्व नहीं है| साथ ही सरकारी उत्तरदायित्व मात्र ही सुशासन का मूल नहीं है| सुशासन और उत्तरदायित्व, शासन से समाज और समाज से शासन के बीच चलने वाला निरंतर चक्र है| लोकतान्त्रिक व्यस्था में उत्तरदायी शासन ही सुशासन का साधन है, उत्तरदायी जनगण सुशासन की कुंजी हैं| शासन, समाज, व्यवसाय और व्यक्ति सभी में सुशासन में रहने का अनुशासन होना चाहिए और सभी वर्गों के अपने उत्तरदायित्व हैं|

यदि सुशासन और उत्तरदायित्व के अनुशासन को अपना लिया जाये तो यह स्वतःस्फूर्त होते हैं| अन्यथा इन्हें विधि – विधान का रूप देकर लागू करना समाज और शासन की प्राकृतिक बाध्यता है|

मेरा यह चिट्ठा ऐशमघराना (AishMGhrana) इसी सुशासन और उत्तरदायित्व की बात करता है| इसी क्रम में यह स्वतः ही मुख्यतः विधिक चिट्ठा बन गया है| मुझे हर्ष है कि इसका नाम भारत के जाने माने विधिक ब्लॉग के साथ लिया जाता है|

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